‘At Home’ रिसेप्शन का खास निमंत्रण: बस्तर के 50 शिल्पकारों की कला से सजी 80वीं स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां

दिल्ली। देश इस साल स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस खास मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक ‘At Home’ रिसेप्शन की तैयारियां जोरों पर हैं। इस वर्ष का निमंत्रण पत्र भारतीय कला और संस्कृति की विविधता को खूबसूरती से दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘At Home’ कार्यक्रम में करीब 650 मेहमानों को आमंत्रित किया गया है। निमंत्रण किट में महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला व हस्तशिल्प को प्रमुखता दी गई है। इसमें बस्तर के करीब 50 शिल्पकारों की कारीगरी शामिल है, जिन्होंने ढोकरा और लौह (पिटवा) शिल्प में अपना योगदान दिया है। कुल मिलाकर करीब 130 कारीगरों की टीम ने इस किट को तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लगाया। राष्ट्रपति भवन और अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) की टीम ने मिलकर इसका कॉन्सेप्ट तैयार किया था।
छत्तीसगढ़ के शिल्पकारों को मिला राष्ट्रीय मंच
इस साल के निमंत्रण से छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का सुनहरा मौका मिला है। एक समय नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर के शिल्पकारों की यह भागीदारी सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं, बल्कि देश की विविध लोककलाओं और स्थानीय शिल्प परंपराओं को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का प्रयास भी है।
निमंत्रण किट में बस्तर की ढोकरा कास्टिंग, पिटवा लौह शिल्प से बने फ्रेम और घंटियां (रीसाइकल्ड स्क्रैप आयरन से बनी), मध्य प्रदेश की बाघ टेक्सटाइल और भील चित्रकला, गोवा की अज़ुलेजो टाइल पेंटिंग तथा महाराष्ट्र की वारली कला जैसी परंपराओं को जगह दी गई है। मेहमानों का स्वागत महेश्वरी स्टोल (हाथ से बुना) से किया जाएगा।
‘At Home’ रिसेप्शन क्या है?
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाला ‘At Home’ एक पारंपरिक औपचारिक समारोह है। इसमें देश के गणमान्य नागरिकों, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित किया जाता है। इस वर्ष का समारोह 15 अगस्त की शाम को होगा।
संस्कृति और पर्यावरण का संदेश
इस बार की थीम में भारत की हस्तनिर्मित और जनजातीय विरासत के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी उभरकर सामने आया है। चार राज्यों की अलग-अलग कला परंपराओं और स्थानीय पर्यावरणीय प्रयासों (जैसे पवित्र वनों की रक्षा, खाजन भूमि आदि) को एक साथ प्रस्तुत कर देश की ‘विविधता में एकता’ की तस्वीर पेश करने की कोशिश की गई है।
राष्ट्रपति भवन का यह ‘At Home’ समारोह इस बार सिर्फ स्वतंत्रता दिवस का औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की लोककला, जनजातीय विरासत और सांस्कृतिक विविधता को देश के सामने रखने वाला खास अवसर बनने जा रहा है।












