पानी में उतरते ही आग के गोले में बदला SpaceX का Starship, पहली बार ऑर्बिट पहुंचने के बाद हुआ धमाका

तीन घंटे की उड़ान के बाद प्रशांत महासागर में हुआ splashdown, मिशन ने पहली बार हासिल की पृथ्वी की कक्षा
नई दिल्ली। SpaceX के सबसे महत्वाकांक्षी Starship मिशन का अंत बेहद नाटकीय रहा। 28 सितंबर 2026 को अपनी 14वीं टेस्ट फ्लाइट पर रवाना हुआ Starship पहली बार पृथ्वी की कक्षा (Orbit) तक पहुंचने में सफल रहा, लेकिन मिशन के अंतिम चरण में प्रशांत महासागर में उतरते समय वाहन पलट गया और आग की लपटों में घिरकर टूट गया।
Starship ने अपनी इस उड़ान में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। यह पहली बार था जब इस विशाल रॉकेट ने ऑर्बिट हासिल की। इसके अलावा इसने 26 Starlink V3 सैटेलाइट भी सफलतापूर्वक तैनात किए। हालांकि उड़ान के दौरान एक इंजन समय से पहले बंद हो गया, जिसके बाद मिशन को मूल योजना से छोटा कर दिया गया।
ऑर्बिट पहुंचा, लेकिन वापसी में हुआ बड़ा हादसा
SpaceX ने Starship को करीब 10 घंटे की उड़ान और पृथ्वी के लगभग छह चक्कर लगाने के उद्देश्य से लॉन्च किया था। लेकिन उड़ान के दौरान इंजन संबंधी समस्या सामने आने के बाद मिशन को लगभग तीन घंटे में समाप्त करने का फैसला किया गया। इसके बाद Starship को प्रशांत महासागर की ओर वापस भेजा गया।
पुनः प्रवेश के दौरान Starship ने अपना रुख नियंत्रित रखा और अंतिम चरण में इंजन दोबारा चालू कर समुद्र में उतरने की तैयारी की। लगभग 11:57 बजे EDT वाहन ने उत्तरी प्रशांत में splashdown किया।
पानी छूते ही पलटा Starship, फिर आग का गोला
समुद्र की सतह से संपर्क के बाद Starship कुछ देर तक अपनी स्थिति में रहा, लेकिन फिर पलट गया। इसके बाद वाहन में आग लग गई और वह टूटने लगा। घटनास्थल के वीडियो में समुद्र की सतह पर Starship के आसपास आग की तेज लपटें दिखाई दीं।
विशेषज्ञों और मिशन रिपोर्टों के अनुसार समुद्र में splashdown के बाद वाहन का पलटना और बचा हुआ propellant आग पकड़ना Starship की मौजूदा टेस्ट प्रक्रिया में असामान्य नहीं माना जाता। इससे पहले भी कई परीक्षणों में splashdown के बाद वाहन नष्ट हुआ है।
उड़ान के दौरान बंद हुआ था एक इंजन
Starship के लिए मिशन पूरी तरह आसान नहीं था। उड़ान के दौरान उसके छह Raptor इंजनों में से एक इंजन समय से पहले बंद हो गया। इसके बावजूद मिशन कंट्रोल ने उपलब्ध टेलीमेट्री का आकलन करने के बाद उड़ान जारी रखने का फैसला किया।
बाद में Starship ने एक अन्य इंजन के इस्तेमाल से आवश्यक ऑर्बिटल बर्न पूरा किया और पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया।
26 Starlink V3 सैटेलाइट किए तैनात
इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक 26 Starlink V3 सैटेलाइट की तैनाती रही। ये Starlink की नई पीढ़ी के सैटेलाइट हैं और पहली बार Starship ने वास्तविक परिचालन सैटेलाइट को ऑर्बिट में पहुंचाया।
इस लिहाज से मिशन का अंतिम हिस्सा भले ही आग के दृश्य के साथ खत्म हुआ, लेकिन उड़ान के दौरान Starship ने पहली बार ऑर्बिटल मिशन पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण परीक्षण हासिल किया।
आखिर क्यों पानी में उतारना पड़ा?
Starship को भविष्य में पूरी तरह reusable बनाने की योजना है। मौजूदा टेस्टिंग में समुद्र में splashdown के जरिए SpaceX वाहन की re-entry, heat shield, orientation और landing systems से जुड़ा डेटा हासिल कर रही है।
इस मिशन में भी Starship को समुद्र में नियंत्रित तरीके से उतारा गया। कंपनी का अंतिम लक्ष्य ऐसे वाहन को विकसित करना है जिसे बार-बार लॉन्च किया जा सके और वापस लाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।
NASA के Moon मिशन से भी जुड़ा है Starship
Starship को भविष्य के चंद्र मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए विकसित किया जा रहा है। NASA के Artemis कार्यक्रम के तहत भी SpaceX का Starship मानव को चंद्रमा तक पहुंचाने वाली प्रणालियों का हिस्सा है।
इसलिए इस टेस्ट फ्लाइट में ऑर्बिट हासिल करना SpaceX के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी पड़ाव माना जा रहा है, भले ही अंतिम splashdown के बाद वाहन सुरक्षित नहीं बच सका।
मिशन का नतीजा: बड़ी सफलता के साथ नाटकीय अंत
Starship Flight 14 का अंत आग के गोले में जरूर हुआ, लेकिन इससे पहले इसने पहली बार पृथ्वी की कक्षा हासिल की और 26 Starlink V3 सैटेलाइट तैनात किए। इसलिए यह मिशन केवल “रॉकेट फेल” होने की कहानी नहीं है—इसमें ऑर्बिटल उड़ान की बड़ी उपलब्धि और वापसी के दौरान वाहन के नष्ट होने, दोनों पहलू शामिल हैं।












