
RBI के फैसले के बाद कांग्रेस महासचिव का प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना, कहा- महंगे कर्ज से बढ़ेगा जनता पर बोझ
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में बढ़ोतरी किए जाने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि देश आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार और सार्वजनिक जीवन से जुड़े 25 साल पूरे होने के कार्यक्रमों में व्यस्त हैं।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार पर तंज कसते हुए 1961 की फिल्म ‘हम दोनों’ के चर्चित गीत की पंक्ति का हवाला दिया। उन्होंने लिखा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखकर उन्हें गीत की पंक्तियां याद आ रही हैं।
RBI ने 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाया रेपो रेट
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का फैसला किया। इसके बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है।
यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब RBI ने रेपो रेट बढ़ाया है। MPC के सभी छह सदस्यों ने दर बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया। साथ ही मौद्रिक नीति के रुख को पहले के ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया गया है।
RBI के इस बदलाव का संकेत यह है कि फिलहाल महंगाई से जुड़े जोखिमों के बीच निकट अवधि में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम मानी जा रही है। RBI ने आगे की कार्रवाई को महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के आंकड़ों से जोड़कर रखा है।
रेपो रेट बढ़ने से क्या होगा?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को धन उपलब्ध कराता है। जब यह दर बढ़ती है तो बैंकों के लिए धन की लागत बढ़ सकती है और इसका असर कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
इसका प्रभाव खास तौर पर होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में EMI बढ़ सकती है या समान EMI पर कर्ज चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है।
हालांकि वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित बैंक और वित्तीय संस्थान अपनी ब्याज दरों में कितनी और कब बढ़ोतरी करते हैं।
जयराम रमेश ने महंगाई और रोजगार को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रेपो रेट बढ़ने के बाद सरकार पर आर्थिक मोर्चे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ब्याज दर बढ़ने से आम लोगों पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है और महंगे कर्ज के कारण खर्च, निवेश तथा कारोबार प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि त्योहारों के मौसम में महंगाई का दबाव मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। कांग्रेस नेता ने बेरोजगारी और आय में कमी का भी मुद्दा उठाया।
रमेश ने शेयर बाजार और रुपये की स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पिछले नौ महीनों में भारतीय शेयर बाजार से करीब 4 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं और रुपया कमजोर हुआ है।
ये आंकड़े और उनके आधार पर निकाला गया राजनीतिक निष्कर्ष कांग्रेस नेता के बयान का हिस्सा हैं, न कि RBI का आधिकारिक निष्कर्ष।
‘हम दोनों’ के गीत से सरकार पर तंज
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में देव आनंद अभिनीत 1961 की फिल्म ‘हम दोनों’ के गीत की पंक्ति का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला बोला।
उन्होंने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार जनता की आर्थिक परेशानियों के बीच अपने 25 साल के सफर का जश्न मना रही है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि GDP को लेकर सरकार के दावों के बीच आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और घटती आय जैसी समस्याओं का सामना कर रही है।
RBI ने विकास अनुमान भी बढ़ाया
दिलचस्प बात यह है कि रेपो रेट बढ़ाने के साथ RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने महंगाई के अनुमान को भी बढ़ाया है और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को लेकर सतर्क रुख अपनाया है।
इससे साफ है कि RBI का फैसला केवल विकास को लेकर चिंता पर आधारित नहीं है, बल्कि महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े जोखिम भी उसके निर्णय में महत्वपूर्ण रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है?
RBI के नए ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख के बाद बाजार की नजर आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों पर रहेगी। केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि निकट अवधि में दरों में कटौती की संभावना नहीं है और आगे का फैसला महंगाई तथा विकास से जुड़े आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा।
फिलहाल रेपो रेट 5.50 प्रतिशत है। इसका सीधा असर उन कर्जदारों पर पड़ सकता है जिनकी ब्याज दरें RBI के रेपो रेट से जुड़ी हैं। वहीं, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में जमा और कर्ज की ब्याज दरों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।











