बिलासपुर में कर्मचारियों का हल्लाबोल: DA-एरियर्स, वेतनमान और नियमितीकरण समेत मांगों को लेकर हजारों कर्मचारी सड़क पर

मोदी की गारंटी के तहत किए गए वादों को लागू करने की मांग, नेहरू चौक स्थित विकास भवन के सामने धरना-प्रदर्शन और महारैली; मुख्यमंत्री के नाम सौंपा जा रहा ज्ञापन
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों से जुड़े लंबित मुद्दों को लेकर बुधवार, 30 सितंबर को बिलासपुर में कर्मचारी संगठनों ने बड़ा धरना-प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन और तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के आह्वान पर संभाग के अलग-अलग जिलों से कर्मचारी नेहरू चौक स्थित विकास भवन के सामने जुटे। आंदोलन में महंगाई भत्ता (DA), लंबित एरियर्स, समयमान वेतनमान, नियमितीकरण और सेवा लाभ से जुड़ी मांगें प्रमुख रहीं।
संघ की ओर से पहले ही 30 सितंबर को प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन और महारैली का ऐलान किया गया था। बिलासपुर में भी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और शासन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया शुरू की।
‘मोदी की गारंटी’ के वादों को लागू करने की मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दों को ‘मोदी की गारंटी’ के तहत उठाया गया था। इनमें केंद्र के समान महंगाई भत्ता, लंबित डीए एरियर्स, समयमान वेतनमान और विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों के नियमितीकरण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
संघ पदाधिकारियों का आरोप है कि इन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों में नाराजगी है। आंदोलन के जरिए संगठन शासन से चुनावी वादों और कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कई मांगें उठाईं। इनमें प्रमुख रूप से—
- केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता देने की मांग।
- लंबित डीए एरियर्स का भुगतान।
- चार स्तरीय समयमान वेतनमान लागू करना।
- शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर सेवा लाभ और पेंशन से जुड़े लाभ देने की मांग।
- दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मध्य प्रदेश की तर्ज पर सेवा सुरक्षा की व्यवस्था।
- विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर सीधी भर्ती शुरू करना।
- सेटअप घटाने के नाम पर पदों को डाइंग कैडर में डालने की नीति पर रोक।
- संविदा, कार्यभारित और अन्य अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग।
- पंचायत सचिवों के शासकीयकरण सहित अन्य कर्मचारी हित से जुड़े मुद्दों का समाधान।
कर्मचारी संगठनों की ओर से पहले भी इन मुद्दों को लेकर शासन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
पहले भी दिया जा चुका था आंदोलन का संकेत
तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने अगस्त में ही 30 सितंबर को संभागीय मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन और रैली आयोजित करने की घोषणा की थी। संगठन के अनुसार, इससे पहले 10 जून को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद जुलाई में सांसदों और विधायकों को भी मांगों के संबंध में ज्ञापन दिए गए थे।
दफ्तर-दफ्तर संपर्क कर जुटाया समर्थन
बिलासपुर में आंदोलन को लेकर कर्मचारी संगठनों ने पहले से तैयारियां की थीं। पदाधिकारियों ने विभिन्न सरकारी कार्यालयों में संपर्क कर कर्मचारियों को आंदोलन की जानकारी दी और सहभागिता का आह्वान किया।
पुराना और नया कंपोजिट बिल्डिंग, जिला पंचायत, जल संसाधन, वन, पीएचई, पीडब्ल्यूडी और कृषि विभाग सहित विभिन्न कार्यालयों में संपर्क अभियान चलाया गया। संगठन का दावा है कि संभाग के अलग-अलग जिलों से कर्मचारी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
सरकार के सामने अब कर्मचारी संगठनों की मांग
बिलासपुर का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब कर्मचारी संगठन लंबित सेवा लाभ और वेतन संबंधी मुद्दों पर लगातार दबाव बना रहे हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ वित्त विभाग के जनवरी 2026 के आदेश के अनुसार राज्य कर्मचारियों के सातवें वेतनमान में महंगाई भत्ता 1 जनवरी 2026 से 3 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया गया था।
कर्मचारी संगठनों की मौजूदा मांगों में केवल वर्तमान डीए दर ही नहीं, बल्कि देय तिथि से महंगाई भत्ता, पुराने एरियर्स, समयमान वेतनमान और अन्य सेवा लाभ भी शामिल हैं। अब प्रदर्शन और ज्ञापन के जरिए संगठन इन मांगों पर शासन से ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं।












