राष्ट्रपति मुर्मु आज रायपुर में जारी करेंगी 200 रुपये का सिक्का, कल बस्तर में मुरिया दरबार

राष्ट्रपति का छत्तीसगढ़ दौरा आज से, रायपुर में विशेष कार्यक्रम और जगदलपुर में बस्तर दशहरा में होंगी शामिल
रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज, 22 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचेंगी। उनके आगमन को लेकर राजधानी में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए हैं। राष्ट्रपति रायपुर स्थित लोक भवन में पूज्य माता हासी देवी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी करेंगी। इसके बाद वे नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में शामिल होंगी। दौरे के दूसरे दिन, 23 अक्टूबर को राष्ट्रपति जगदलपुर पहुंचकर मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी और बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में भाग लेंगी।
रायपुर में जारी होगा 200 रुपये का स्मारक सिक्का
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 22 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:45 बजे लोक भवन में माता हासी देवी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी करेंगी। इस पहल के जरिए उनके आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान को सम्मान दिया जाएगा।

माता हासी देवी सिंधी समाज की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी महत्वपूर्ण विभूति थीं। वे शदाणी दरबार की पांचवीं आध्यात्मिक प्रमुख थीं। उनके सम्मान में स्मारक सिक्का जारी करना उनकी विरासत और समाज के प्रति योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शाम को इंडोर स्टेडियम में कार्यक्रम
सिक्का जारी करने के बाद राष्ट्रपति शाम करीब 4 बजे रायपुर के बूढ़ापारा स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। यहां नुआखाई पर्व के अवसर पर सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इन आयोजनों में सामाजिक योगदान देने वाले लोगों के सम्मान के साथ युवाओं की भूमिका और समाज के विकास से जुड़े विषयों पर जोर रहेगा।
कल जगदलपुर जाएंगी राष्ट्रपति, मां दंतेश्वरी के करेंगी दर्शन
राष्ट्रपति 23 अक्टूबर को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर पहुंचेंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे सुबह करीब 11 बजे मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद दोपहर करीब 12:45 बजे बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित मुरिया दरबार में शामिल होंगी।
राष्ट्रपति का बस्तर दौरा आदिवासी संस्कृति, धार्मिक आस्था और क्षेत्र की ऐतिहासिक परंपराओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है मुरिया दरबार की परंपरा?
मुरिया दरबार बस्तर दशहरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पारंपरिक सभा में क्षेत्र के विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि, मांझी और चालकी सहित स्थानीय प्रमुख हिस्सा लेते हैं। ऐतिहासिक रूप से यह ऐसा मंच रहा है, जहां स्थानीय लोगों की समस्याओं, मांगों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होती थी।
समय के साथ मुरिया दरबार बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है। राष्ट्रपति की इसमें भागीदारी से आदिवासी परंपराओं और स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रपति के दौरे से रायपुर में यातायात प्रभावित
राष्ट्रपति के रायपुर प्रवास के दौरान एयरपोर्ट से लोक भवन और कार्यक्रम स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की संभावना है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत कुछ सड़कों पर अस्थायी प्रतिबंध और मार्ग परिवर्तन लागू किए जा सकते हैं।
वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले यातायात संबंधी ताजा निर्देशों की जानकारी लें और अतिरिक्त समय लेकर चलें। एयरपोर्ट, सिविल लाइंस, शंकर नगर और इंडोर स्टेडियम के आसपास जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
किन रास्तों पर रखें विशेष ध्यान?
राष्ट्रपति के काफिले की आवाजाही और कार्यक्रमों को देखते हुए रायपुर में इन क्षेत्रों में यातायात प्रभावित हो सकता है:
- माना एयरपोर्ट से लोक भवन जाने वाला मार्ग।
- वीआईपी रोड और एक्सप्रेसवे के आसपास के क्षेत्र।
- शंकर नगर चौक और एसआरपी चौक के आसपास की सड़कें।
- सिविल लाइंस और लोक भवन क्षेत्र।
- बूढ़ापारा स्थित इंडोर स्टेडियम के आसपास के मार्ग।
इन मार्गों पर प्रतिबंध की सटीक अवधि और वैकल्पिक रास्तों की जानकारी के लिए रायपुर यातायात पुलिस के आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
दो दिन में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं से जुड़ेंगी राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पहले दिन रायपुर में माता हासी देवी के सम्मान में स्मारक सिक्का जारी करने और नुआखाई से जुड़े कार्यक्रमों में भागीदारी होगी। दूसरे दिन जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर के दर्शन और मुरिया दरबार में शामिल होकर वे बस्तर की ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ेंगी।












