सरगुजा में मलेरिया का बढ़ा प्रकोप, लुंड्रा-उदयपुर ब्लॉक में 74 मरीज मिले; गांवों में घर-घर जांच तेज

सरगुजा में मलेरिया के 74 मरीज मिले, लुंड्रा और उदयपुर में स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में मलेरिया के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। लुंड्रा और उदयपुर ब्लॉक में हाल की जांच के दौरान कुल 74 लोगों में मलेरिया संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब प्रभावित इलाकों में घर-घर पहुंचकर लोगों की जांच कर रही हैं। बुखार से पीड़ित लोगों के रक्त के नमूने लेकर रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट यानी RDT के माध्यम से मलेरिया की जांच की जा रही है। संक्रमण की पुष्टि होने पर मरीज का तत्काल उपचार शुरू किया जा रहा है, जबकि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
लुंड्रा और उदयपुर में मिले 74 मरीज
सरगुजा के लुंड्रा और उदयपुर ब्लॉक में मलेरिया के कुल 74 मामले सामने आए हैं। उदयपुर ब्लॉक में पहला मरीज 6 जून को सामने आया था। इसके बाद यहां पुष्टि किए गए मरीजों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार कुछ मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो रहे हैं, जबकि कुछ मरीजों का इलाज अभी जारी है। विभाग लगातार नए मामलों की पहचान करने और संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए निगरानी बढ़ा रहा है।
कई गांवों में सामने आए मलेरिया के मामले
मलेरिया के मरीज मतरिंगा, खर्रानगर, मुसरदंड, मुकना पहाड़, बारो पहाड़, बकोई और सेमी घोघरा सहित कई ग्रामीण इलाकों में मिले हैं। इनमें से कई गांव पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य कर्मचारियों को घर-घर पहुंचकर जांच करने में परेशानी होती है। इसके बावजूद विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार पहुंचकर बुखार और मलेरिया के संभावित मरीजों की जांच कर रही हैं।
घर-घर हो रही RDT जांच
स्वास्थ्य विभाग की टीमें ग्रामीणों के घरों तक पहुंचकर रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट कर रही हैं। खासतौर पर बुखार, ठंड लगने या कंपकंपी जैसे लक्षण वाले लोगों के रक्त की जांच की जा रही है।
मलेरिया की पुष्टि होने के बाद मरीज को समय पर दवा और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि संक्रमण की पहचान शुरुआती स्तर पर ही हो जाए, ताकि बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सके।
ग्रामीणों को बांटी जा रही मच्छरदानी
मलेरिया से बचाव के लिए प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से मच्छरदानियां भी वितरित की जा रही हैं। ग्रामीणों को रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करने और मच्छरों से बचाव के अन्य उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।
इसके साथ ही लोगों को घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने के लिए जागरूक किया जा रहा है। विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
बारिश के मौसम में बढ़ा मलेरिया का खतरा
बरसात के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। इसी वजह से मानसून के दौरान मलेरिया सहित मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ समय पर जांच और उपचार पर विशेष जोर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मलेरिया की समय पर पहचान और उपचार से गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
तेज बुखार और कंपकंपी को नजरअंदाज न करें
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि तेज बुखार, ठंड लगना या कंपकंपी जैसे लक्षण दिखाई देने पर इसे सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर मलेरिया की जांच करानी चाहिए।
सरगुजा के दुर्गम क्षेत्रों में बढ़े मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित गांवों में जांच, उपचार एवं बचाव संबंधी गतिविधियां जारी हैं।











