FeatureInternationalLatestNational

अंतरिक्ष में आज भी गूंज रही है भारत की इस महान गायिका की आवाज, केसरबाई केरकर की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान

 

नई दिल्ली। भारत की शास्त्रीय संगीत परंपरा से निकली एक ऐसी आवाज है, जो आज धरती से अरबों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष की यात्रा कर रही है। यह आवाज है महान हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका सुरश्री केसरबाई केरकर की। उनकी प्रस्तुति ‘Jaat Kahan Ho’ को NASA के ऐतिहासिक Voyager Golden Record में शामिल किया गया था।

यह रिकॉर्ड वर्ष 1977 में Voyager 1 और Voyager 2 अंतरिक्ष यानों के साथ अंतरिक्ष में भेजा गया था। इसका उद्देश्य पृथ्वी और मानव सभ्यता का एक सांस्कृतिक परिचय ब्रह्मांड में पहुंचाना था। रिकॉर्ड में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की संगीत परंपराओं, प्राकृतिक ध्वनियों, तस्वीरों और 55 भाषाओं में शुभकामनाओं को शामिल किया गया था।

कौन थीं केसरबाई केरकर?

केसरबाई केरकर का जन्म जुलाई 1892 में गोवा के केरी गांव में हुआ था। उनका संबंध संगीत से जुड़े परिवार से था। बचपन से ही उन्होंने संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दी और आगे चलकर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।

उन्होंने कई संगीत गुरुओं से प्रशिक्षण लिया, लेकिन उनके संगीत जीवन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उस्ताद अल्लादिया खान की रही। अल्लादिया खान जयपुर-अतरौली घराने के संस्थापक माने जाते हैं। केसरबाई ने उनके कठिन और जटिल गायन की शैली को लंबे समय तक साधा और करीब दो दशकों से अधिक समय तक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

रोजाना घंटों रियाज से बनी महान गायिका

केसरबाई की गायकी अचानक प्रसिद्ध नहीं हुई थी। इसके पीछे वर्षों की कठोर साधना थी। बताया जाता है कि उनके गुरु अल्लादिया खान ने उन्हें लंबे समय तक रोजाना कई घंटे रियाज करने की शर्त के साथ प्रशिक्षण दिया।

यही कठिन साधना आगे चलकर उनकी आवाज की सबसे बड़ी पहचान बनी। उनकी गायकी में सुरों की शुद्धता, गहराई और भावनात्मक अभिव्यक्ति को विशेष महत्व दिया जाता था।

रविंद्रनाथ टैगोर ने दिया था ‘सुरश्री’ का सम्मान

केसरबाई केरकर को संगीत जगत में ‘सुरश्री’ की उपाधि से भी जाना जाता है। उपलब्ध स्रोतों के अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर ने 1938 में उन्हें ‘सुरश्री’ की उपाधि दी थी। बाद में भारतीय सरकार ने भी उनके योगदान को सम्मानित किया और उन्हें 1969 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

कौन-सा गीत अंतरिक्ष में गया?

केसरबाई केरकर की जिस प्रस्तुति ने उन्हें धरती से बाहर तक पहुंचाया, उसका नाम है ‘Jaat Kahan Ho’। यह राग भैरवी पर आधारित ठुमरी है।

Golden Record की सूची में इसे भारत की ओर से शामिल किया गया था। रिकॉर्ड में यह प्रस्तुति लगभग 3 मिनट 30 सेकंड लंबी है और इसमें केसरबाई की आवाज के साथ हारमोनियम, तानपुरा और तबले की संगत है। यह रिकॉर्डिंग 1953 में बॉम्बे में की गई थी।

आखिर उनकी आवाज को अंतरिक्ष में भेजने का फैसला क्यों हुआ?

1970 के दशक में प्रसिद्ध खगोलशास्त्री कार्ल सागन की टीम NASA के Voyager मिशन के लिए एक विशेष रिकॉर्ड तैयार कर रही थी। इसे केवल वैज्ञानिक मिशन का हिस्सा नहीं, बल्कि पृथ्वी की सभ्यता और संस्कृति का संदेशवाहक भी बनाया गया था।

संगीत के चयन में ethnomusicologist Robert E. Brown की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने केसरबाई के ‘Jaat Kahan Ho’ को भारतीय शास्त्रीय संगीत की बेहतरीन प्रस्तुतियों में से एक माना और इसे अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले रिकॉर्ड के लिए सुझाया।

Golden Record में सिर्फ संगीत ही नहीं था

Voyager Golden Record में पृथ्वी की संस्कृति का एक व्यापक परिचय देने की कोशिश की गई थी। इसमें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें, प्राकृतिक और मानवीय गतिविधियों की आवाजें, विभिन्न भाषाओं में अभिवादन और कई देशों की संगीत रचनाएं शामिल थीं।

भारत की ओर से शामिल की गई संगीत प्रस्तुति केसरबाई केरकर की ‘Jaat Kahan Ho’ थी।

दिलचस्प संयोग: जिस साल आवाज अंतरिक्ष में गई, उसी साल केसरबाई का निधन हुआ

केसरबाई केरकर का निधन 1977 में ही हुआ, जिस साल Voyager अंतरिक्ष यान लॉन्च किए गए थे। यानी जिस वर्ष उनकी आवाज Golden Record के जरिए अंतरिक्ष की यात्रा पर निकली, उसी वर्ष महान गायिका ने दुनिया को अलविदा कहा।

‘Jaat Kahan Ho’ का मतलब क्या है?

‘Jaat Kahan Ho’ का भाव है—“कहां जा रही हो, अकेली गोरी?” गीत में एक युवती के अकेले जाने को लेकर सवाल और भावनात्मक संवाद दिखाई देता है। राग भैरवी में प्रस्तुत यह रचना अपनी भावपूर्ण गायकी के कारण खास पहचान रखती है।

विडंबना यह है कि गीत में जहां एक अकेली युवती के जाने का सवाल है, वहीं केसरबाई की आवाज खुद एक ऐसी यात्रा पर निकल गई, जिसका कोई तय अंतिम पड़ाव नहीं है।

क्या एलियन सच में यह आवाज सुन सकते हैं?

अक्सर सोशल मीडिया पर कहा जाता है कि “एलियन केसरबाई की आवाज सुन सकते हैं।” इसे थोड़ा सही तरीके से समझना जरूरी है।

Voyager के साथ Golden Record अंतरिक्ष में मौजूद है, लेकिन यह कोई ऐसा रेडियो प्रसारण नहीं है जो लगातार पृथ्वी से आवाज भेज रहा हो। यह एक रिकॉर्ड है, जिसे किसी संभावित भविष्य के खोजकर्ता को मिले तो वह विशेष उपकरण और रिकॉर्ड पर दिए गए निर्देशों की मदद से उसे पढ़ने/चलाने की कोशिश कर सकता है।

इसलिए यह कहना अधिक सही है कि केसरबाई की रिकॉर्ड की गई आवाज अंतरिक्ष में Voyager के साथ यात्रा कर रही है, न कि उनकी आवाज लगातार अंतरिक्ष में प्रसारित हो रही है।

आज भी कायम है उनकी विरासत

केसरबाई केरकर का संगीत आज भी भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लेकिन उनकी सबसे अनोखी विरासत यह है कि उनकी एक रिकॉर्डिंग पृथ्वी की सीमाओं से बाहर मानव सभ्यता के सांस्कृतिक संदेश के रूप में भेजी गई।

जिस आवाज को कभी भारत के संगीत प्रेमियों ने सुना था, वही आवाज आज Voyager 1 और Voyager 2 के Golden Record पर दर्ज होकर अंतरिक्ष की यात्रा कर रही है।

एक भारतीय गायिका की आवाज, एक पुराना राग और इंसान की हजारों साल पुरानी संगीत परंपरा—तीनों मिलकर केसरबाई केरकर को अंतरिक्ष इतिहास का भी हिस्सा बना देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button