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सिंगल चाइल्ड के बढ़ते ट्रेंड पर एक्सपर्ट की चिंता, कहा- भाई-बहन नहीं होंगे तो चाचा-मामा जैसे रिश्ते भी हो सकते हैं खत्म

नई दिल्ली। आज के समय में कई माता-पिता एक ही बच्चे को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके पीछे बच्चों की पढ़ाई, पालन-पोषण का खर्च और उन्हें बेहतर सुविधाएं देने जैसी कई वजहें हैं। हालांकि, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट कोच अख्तर आलम ने सिंगल चाइल्ड को लेकर एक अलग पहलू सामने रखा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में कहा कि एक बच्चे की परवरिश भले ही आसान हो सकती है, लेकिन इसके कुछ सामाजिक और भावनात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं।

सगे चाचा, मामा और बुआ जैसे रिश्ते कैसे बनेंगे?

अख्तर आलम ने अपने वीडियो में भविष्य के पारिवारिक रिश्तों को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि अगर आने वाली पीढ़ियों में सिंगल चाइल्ड का चलन लगातार बढ़ता गया और परिवारों में भाई-बहन की संख्या कम होती गई, तो चाचा, बुआ, मामा, मामी और ताऊ जैसे रिश्तों का दायरा भी सीमित हो सकता है।

उनके मुताबिक, भाई-बहन नहीं होंगे तो आगे चलकर उनके बच्चों के बीच चचेरे-ममेरे भाई-बहन जैसे रिश्ते भी कम होते जाएंगे। ऐसे में आने वाली पीढ़ियों को कई रिश्ते केवल दूर के रिश्तेदारों के रूप में ही समझने पड़ सकते हैं।

बच्चे को अकेलेपन का सामना करना पड़ सकता है

पर्सनैलिटी डेवलपमेंट कोच ने सिंगल चाइल्ड की एक संभावित समस्या अकेलापन भी बताई। उनके अनुसार, घर में भाई या बहन न होने पर बच्चे के पास अपनी उम्र के किसी ऐसे साथी की कमी हो सकती है, जिसके साथ वह रोजमर्रा की बातें साझा कर सके या खेल सके।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर सिंगल चाइल्ड अकेलेपन का शिकार होता है। बच्चे का सामाजिक और भावनात्मक विकास उसके परिवार, दोस्तों, स्कूल और आसपास के माहौल पर भी निर्भर करता है।

एक बच्चे की परवरिश के फायदे भी हैं

अख्तर आलम ने यह भी माना कि सिंगल चाइल्ड होने के कई फायदे हो सकते हैं। माता-पिता का ध्यान एक ही बच्चे पर केंद्रित रहता है और शिक्षा, स्वास्थ्य, पालन-पोषण तथा अन्य जरूरतों पर अधिक संसाधन खर्च किए जा सकते हैं।

कई परिवारों के लिए एक बच्चे की परवरिश आर्थिक और व्यावहारिक रूप से भी आसान हो सकती है। हालांकि, परिवार का आकार तय करना पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला है और हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं।

क्या सिंगल चाइल्ड होना नुकसानदायक है?

सिंगल चाइल्ड होने को अपने आप में नुकसानदायक कहना सही नहीं होगा। बच्चे के व्यक्तित्व और सामाजिक कौशल पर परिवार का माहौल, माता-पिता का व्यवहार, दोस्तों का साथ और बच्चे को मिलने वाले सामाजिक अवसरों का काफी प्रभाव पड़ता है।

इसलिए यदि परिवार में एक ही बच्चा है, तो माता-पिता उसके लिए दोस्तों, रिश्तेदारों और सामुदायिक गतिविधियों के जरिए पर्याप्त सामाजिक संपर्क उपलब्ध करा सकते हैं। इससे बच्चे को अकेलेपन से बचने और दूसरों के साथ बेहतर तरीके से घुलने-मिलने में मदद मिल सकती है।

अख्तर आलम की बात दरअसल सिंगल चाइल्ड के बढ़ते चलन के सामाजिक प्रभावों पर चर्चा शुरू करने का एक नजरिया है। परिवार छोटा रखना या दूसरा बच्चा करना व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन बच्चों की भावनात्मक और सामाजिक जरूरतों पर ध्यान देना जरूरी है।

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