
सिर्फ 2 दिन में तैयार करें पौधों की खुराक, केले के छिलके और बची चायपत्ती आएगी काम
घर की रसोई से रोज निकलने वाला गीला कचरा अक्सर हम बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन यही कचरा आपके घर के पेड़-पौधों के लिए उपयोगी खाद बनाने में काम आ सकता है। केले के छिलके, प्याज के छिलके, सब्जियों के अवशेष और इस्तेमाल की हुई चायपत्ती से घर पर जैविक खाद तैयार की जा सकती है।
अगर आपके गमलों में लगे पौधों की बढ़त रुक गई है, पत्तियां कमजोर हो रही हैं या फूल कम आ रहे हैं, तो रसोई के इन अवशेषों का सही इस्तेमाल आपके बगीचे के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए आपको महंगी खाद खरीदने की जरूरत नहीं है। आइए जानते हैं घर पर जैविक तरल खाद बनाने का आसान तरीका।
1. सबसे पहले रसोई के कचरे को इकट्ठा करें
खाद बनाने के लिए आपको रोजाना निकलने वाले कुछ जैविक अवशेषों की जरूरत होगी।
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केले के छिलके
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प्याज के छिलके
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सब्जियों के कटे हुए डंठल और अवशेष
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नींबू के बचे हुए छिलके
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इस्तेमाल की हुई चायपत्ती
इन सभी चीजों को एक अलग बर्तन में इकट्ठा करें। ध्यान रखें कि इनमें तेल, नमक, मसाले या पका हुआ भोजन न मिला हो।
2. बची हुई चायपत्ती का भी करें इस्तेमाल
चाय बनाने के बाद बची हुई चायपत्ती को सीधे गमलों में डालने के बजाय पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इससे दूध और चीनी के अवशेष निकल जाएंगे।
चायपत्ती में कुछ जैविक पदार्थ होते हैं, जो खाद बनाने में योगदान दे सकते हैं। हालांकि इसे अधिक मात्रा में डालने से बचना चाहिए।
3. सभी चीजों को पानी में डालकर रखें
अब एक बाल्टी या बड़े बर्तन में केले के छिलके, प्याज के छिलके, सब्जियों के अवशेष और धुली हुई चायपत्ती डालें। इसमें पर्याप्त पानी मिलाएं, ताकि सभी अवशेष पानी में डूब जाएं।
बर्तन को ढककर छायादार जगह पर रख दें। बताई गई विधि में इसे लगभग 48 घंटे रखा जाता है।
4. दो दिन बाद घोल को छान लें
48 घंटे बाद मिश्रण को छन्नी की मदद से छान लें। अब आपको एक तरल घोल मिलेगा। इसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा निश्चित नहीं होती, क्योंकि यह इस्तेमाल किए गए कचरे और पानी पर निर्भर करती है।
ध्यान रखें कि इस घोल को पूरी तरह तैयार और संतुलित खाद नहीं माना जा सकता। यह केवल घरेलू जैविक अवशेषों से बना एक अनिश्चित पोषक घोल है।
5. पौधों में डालने से पहले पानी मिलाएं
बताई गई घरेलू विधि के अनुसार एक भाग तैयार घोल में पांच भाग साफ पानी मिलाया जाता है। हालांकि यह अनुपात वैज्ञानिक रूप से सभी पौधों के लिए प्रमाणित नहीं है। इसलिए पहले किसी एक पौधे के थोड़े से हिस्से में इसका परीक्षण करें।
यदि घोल से बदबू आ रही हो, उसमें फफूंद दिखाई दे या सड़न हो गई हो, तो उसे पौधों में इस्तेमाल न करें।
6. पौधों में डालते समय रखें इन बातों का ध्यान
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घोल को पौधे की जड़ों के आसपास मिट्टी में डालें।
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सूखी मिट्टी में बहुत अधिक मात्रा में घोल न डालें।
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शुरुआत में कम मात्रा का इस्तेमाल करें।
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पत्तियों पर छिड़काव करने से बचें, क्योंकि इससे गंदगी और फफूंद की समस्या हो सकती है।
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छोटे गमलों में अधिक मात्रा डालने से बचें।
केले के छिलकों से पौधों को क्या फायदा मिलता है?
केले के छिलकों में पोटेशियम सहित कई खनिज तत्व मौजूद होते हैं। पोटेशियम पौधों की सामान्य वृद्धि और उनकी विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है।
वहीं सब्जियों के अवशेष और चायपत्ती जैविक पदार्थ उपलब्ध कराते हैं। लेकिन केवल इस घोल से पौधों को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम की संतुलित खुराक मिलने की गारंटी नहीं है।
एक बेहतर विकल्प: रसोई के जैविक कचरे से खाद बनाने के लिए कंपोस्टिंग भी कर सकते हैं। सही तरीके से तैयार कंपोस्ट मिट्टी की संरचना और जल धारण क्षमता सुधारने में मदद करती है।












