SC-OBC छात्रवृत्ति में बड़ी राहत: अब नहीं देना होगा मूल निवास प्रमाण पत्र, DPI ने जारी किए निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति को लेकर बड़ी राहत मिली है। अब संबंधित छात्र-छात्राओं से छात्रवृत्ति आवेदन के लिए मूल निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate) जमा करने की अनिवार्यता नहीं होगी। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
छात्रवृत्ति आवेदन की प्रक्रिया होगी आसान
DPI के निर्देश के मुताबिक भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप SC और OBC विद्यार्थियों को संबंधित केंद्रीय क्षेत्र एवं केंद्र प्रायोजित छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ दिया जाना है। इन योजनाओं के लिए विद्यार्थियों से अब मूल निवास प्रमाण पत्र नहीं मांगा जाएगा।
इस बदलाव से उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी, जिन्हें छात्रवृत्ति आवेदन के दौरान निवास प्रमाण पत्र बनवाने, उसे प्राप्त करने या पोर्टल पर अपलोड करने में परेशानी होती थी।
छात्रवृत्ति पोर्टल में भी होगा बदलाव
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए छात्रवृत्ति पोर्टल में भी आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। DPI ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के वरिष्ठ निदेशक को पोर्टल में जरूरी संशोधन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आवेदन के दौरान मूल निवास प्रमाण पत्र अपलोड करने की अनिवार्यता प्रदर्शित न हो।
केंद्र सरकार ने जून में किया था ऐलान
केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने 19 जून 2026 को छात्रवृत्ति योजनाओं में डोमिसाइल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त करने की घोषणा की थी। मंत्रालय के अनुसार SC और OBC विद्यार्थियों के लिए संचालित प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में करीब 1.2 करोड़ विद्यार्थी सालाना लाभ प्राप्त करते हैं।
सरकार ने इस बदलाव को छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने और विद्यार्थियों पर दस्तावेजी अनुपालन का बोझ कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
स्कूलों और अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ी
DPI के निर्देश के बाद संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पात्र SC और OBC विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति आवेदन के लिए अनावश्यक रूप से मूल निवास प्रमाण पत्र न मांगा जाए। इससे आवेदन प्रक्रिया में लगने वाली अतिरिक्त कागजी कार्रवाई और विद्यार्थियों की भागदौड़ कम होने की उम्मीद है।












