
संगरूर। पंजाब के संगरूर के सिविल अस्पताल में 23 वर्षीय दलित युवक की मौत के बाद गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजनों ने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मोर्चरी के बाहर से जबरन हटाया गया और उनकी गैरमौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि शव तेजी से खराब हो रहा था और परिवार को कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद वे पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के लिए तैयार नहीं थे।
मृतक की पहचान कनोई गांव निवासी सनमदीप सिंह के रूप में हुई है। वह पेशे से राजमिस्त्री था। परिजनों के अनुसार सनमदीप ने 25 सितंबर को जहरीला पदार्थ खा लिया था। उपचार के दौरान 26 सितंबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिवार ने शव को पिछले पांच दिनों से अस्पताल की मोर्चरी में रखा था।
सरपंच और साथियों की गिरफ्तारी की मांग
परिवार का कहना था कि जब तक आम आदमी पार्टी से जुड़े गांव के सरपंच और उसके साथियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे न तो शव लेंगे और न ही पोस्टमार्टम की अनुमति देंगे। परिवार न्याय की मांग को लेकर अस्पताल में धरने पर बैठा था।
मृतक के चाचा गोरा सिंह ने आरोप लगाया कि सनमदीप की शिकायत पर वर्ष 2019 में गांव के सरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। उनका दावा है कि इसी मामले को वापस लेने का दबाव बनाने के लिए करीब पांच महीने पहले परिवार के सात सदस्यों के खिलाफ भी झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि सनमदीप को लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। उनका कहना है कि गांव में सीवर लाइन बिछाए जाने के दौरान उनके चार घरों को छोड़ दिया गया और सनमदीप को मनरेगा में काम भी नहीं दिया गया।
मोर्चरी के बाहर बढ़ा तनाव
गुरुवार दोपहर पुलिस और प्रशासन की टीम मोर्चरी के प्रवेश द्वार को खाली कराने पहुंची। परिवार का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया। उनका कहना है कि सनमदीप की मां और दादी को घसीटकर पुलिस वाहन में बैठाया गया और परिवार की सहमति के बिना शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया।
गोरा सिंह ने आरोप लगाया कि परिवार शांतिपूर्ण तरीके से न्याय और एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग कर रहा था। उनके मुताबिक पुलिस ने पहले दिए गए आश्वासन का पालन नहीं किया और महिलाओं के साथ भी कथित तौर पर हाथापाई की गई।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पूरे गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।
कांग्रेस नेता समेत चार गिरफ्तार
घटना के दौरान पुलिस ने सुनाम से कांग्रेस पदाधिकारी राजिंदर सिंह दीपा और तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक इन लोगों पर पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप हैं।
चारों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने सनमदीप के परिवार के आठ सदस्यों समेत चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया। हालांकि पुलिस के अनुसार इन लोगों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
पुलिस ने कहा- शव तेजी से खराब हो रहा था
संगरूर के डीएसपी दलबीर सिंह सिद्धू ने प्रशासन की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि शव काफी खराब स्थिति में पहुंच चुका था और स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से परिवार को कई नोटिस दिए गए थे।
पुलिस के अनुसार कार्यकारी मजिस्ट्रेट-सह-तहसीलदार जगदीप सिंह और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने परिवार को शव की स्थिति और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को लेकर कई बार सूचित किया था। पुलिस का दावा है कि परिवार ने इन नोटिसों को स्वीकार करने से भी इनकार किया।
डीएसपी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 301 का भी हवाला दिया और कहा कि शव का अपमान करना या उसे दुर्दशा में छोड़ना कानून के तहत अपराध है।
पुलिस बोली- 28 सितंबर को ही दर्ज हो चुकी थी एफआईआर
पुलिस ने यह भी कहा कि परिवार की शिकायत पर संगरूर सदर थाने में 28 सितंबर को ही गांव के सरपंच, उसके भाई, एक पूर्व पंचायत सदस्य और एक महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी थी।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 108 आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है।
डीएसपी का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों की ओर से गिरफ्तारी को लेकर दबाव बनाया गया और पोस्टमार्टम की कानूनी प्रक्रिया में बाधा डाली गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करने और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया।
तीन डॉक्टरों के बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम
पुलिस के अनुसार स्थिति बिगड़ने के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया। इसके बाद तीन चिकित्सा अधिकारियों के बोर्ड ने सनमदीप के शव का पोस्टमार्टम किया।
पोस्टमार्टम के बाद उभावाल रोड स्थित श्मशान घाट पर नगर निगम अधिकारियों और कुछ पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कराया गया।
परिवार और पुलिस के दावों में अंतर
इस पूरे मामले में परिवार और पुलिस की ओर से घटनाक्रम की अलग-अलग तस्वीर सामने आई है। परिवार का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना बलपूर्वक शव का अंतिम संस्कार कराया गया, जबकि पुलिस का कहना है कि शव की स्थिति खराब हो रही थी और परिवार को पहले ही कई बार नोटिस दिए जा चुके थे।
वहीं, सरपंच और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले की जांच जारी है। इस मामले में लगाए गए आरोपों और पुलिस कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियां जांच तथा उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होंगी।












