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धनतेरस आज: घर में आएगी सुख-समृद्धि या बदलेगी किस्मत? जानिए खरीदारी से लेकर पूजा तक की पूरी जानकारी

धनतेरस पर बाजारों में रौनक, सोना-चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा… जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और इस पर्व का महत्व

आज 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को देशभर में धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है। दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत इसी दिन से होती है। धनतेरस को धनत्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है।

धनतेरस के मौके पर सोना, चांदी, आभूषण, नए बर्तन और अन्य धातुओं की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आती हैं। रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के बाजारों में भी धनतेरस को लेकर खरीदारी की विशेष तैयारी है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा क्यों शुरू हुई और इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का क्या महत्व है? आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी खास बातें।

धनतेरस 2026: रायपुर में पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस पूजा

आज, 6 नवंबर

शाम 5:57 से 7:56 बजे

रायपुर के स्थानीय समय के अनुसार

धार्मिक समय शुभ समय
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ सुबह 10:30 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
प्रदोष काल शाम 5:25 से 7:58 बजे
यम दीपदान प्रदोष काल में

स्रोत: द्रिक पंचांग, रायपुर।

Drikpanchang+1

धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?

धनतेरस पर परंपरागत रूप से इन वस्तुओं की खरीदारी शुभ मानी जाती है:

  1. सोना और चांदी: आभूषण, सिक्के और चांदी के बर्तन।

  2. पीतल और तांबे के बर्तन: घर में उपयोग होने वाले नए बर्तन।

  3. झाड़ू: माता लक्ष्मी के स्वागत और स्वच्छता का प्रतीक।

  4. धनिया के बीज: पूजा में उपयोग के लिए।

  5. दीपक: घर और मुख्य द्वार पर दीप जलाने के लिए।

आखिर क्यों मनाई जाती है धनतेरस?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस पर स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की कामना की जाती है।

इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

यम दीपदान का भी है विशेष महत्व

धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर यमराज के निमित्त दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है।

दीपावली की शुरुआत, अब पांच दिनों तक रहेगी रौनक

धनतेरस के साथ ही दीपावली के उत्सव की शुरुआत हो जाती है। इसके बाद नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे त्योहार मनाए जाते हैं। इस दौरान घरों की सजावट, दीप प्रज्ज्वलन, पूजा-पाठ और पारिवारिक मेल-मिलाप का विशेष महत्व रहता है।

 

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