
लखनऊ। नींबू को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक उपाय खोजा है। अध्ययन में लौंग और लेमनग्रास के आवश्यक तेलों ने नींबू में हरे रंग की फफूंद की वृद्धि रोकने में प्रभावी परिणाम दिखाए हैं। प्रयोगशाला में इन तेलों से उपचारित नींबुओं में 14 दिन बाद तक सड़न के दिखाई देने वाले लक्षण नहीं मिले।
इस अध्ययन में वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. प्रदीप कुमार, जैव रसायन विभाग की डॉ. मधु कमले और शोधार्थियों चिकांशी शर्मा, रितुराज बोरा तथा पूर्णमश्री गोगोई शामिल रहे। शोध जर्नल ऑफ फूड प्रोसेसिंग एंड प्रिजर्वेशन में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं ने नींबू में हरे रंग की फफूंद पैदा करने वाले पेनिसिलियम डिजिटेटम पर दोनों तेलों के प्रभाव का परीक्षण किया। प्रयोगशाला में लौंग के तेल से फफूंद की वृद्धि में लगभग 89.81 प्रतिशत और लेमनग्रास के तेल से 76.69 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई।
इसके बाद फफूंद के संपर्क में लाए गए नींबुओं पर भी इन तेलों का परीक्षण किया गया। परिणामों के अनुसार, लौंग के तेल की 1500 पीपीएम और लेमनग्रास के तेल की 2000 पीपीएम सांद्रता से उपचारित नींबुओं में 14 दिन बाद तक सड़न के दिखाई देने वाले लक्षण नहीं मिले।
यह शोध नींबुओं के भंडारण और परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्राकृतिक खाद्य संरक्षण के नए विकल्प विकसित करने की संभावना दिखाता है। हालांकि, व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले इनकी सुरक्षा और प्रभावशीलता का और आकलन जरूरी होगा।












