
मध्य प्रदेश के महू-नीमच मार्ग स्थित रॉयल टाउन कॉलोनी में बिजली और पानी की समस्या को लेकर रहवासियों का आक्रोश गुरुवार सुबह सड़क पर दिखाई दिया। मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने से नाराज 500 से अधिक परिवारों के लोगों ने चक्काजाम कर दिया। इससे मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्कूल बसों और कार्यालय जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रहवासियों का आरोप है कि कॉलोनी में कई दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित है और इसका असर पानी की व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने के कारण लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।
चार-पांच दिनों से बिजली बंद होने का आरोप
कॉलोनी निवासी टीना जादौन सहित अन्य रहवासियों ने बताया कि पिछले चार-पांच दिनों से बिजली नहीं होने के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। बिजली बंद रहने से पानी की आपूर्ति भी बाधित हो रही है, जिससे परिवारों और बच्चों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
रहवासियों के मुताबिक, कॉलोनी को बसे करीब 17 साल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
हर महीने बिल भरने के बाद भी परेशानी
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि वे हर महीने करीब 1,000 से 1,500 रुपये तक बिजली बिल का भुगतान करते हैं। इसके बावजूद नियमित बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है।
रहवासियों का दावा है कि उन्होंने बिजली विभाग, कॉलोनाइजर और कलेक्टर कार्यालय सहित विभिन्न स्तरों पर शिकायत की, लेकिन समस्या का ठोस समाधान नहीं हुआ। लगातार परेशानी झेलने के बाद लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद खुला जाम
चक्काजाम की सूचना मिलने पर किशनगंज थाना पुलिस, एसडीएम राकेश परमार और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत कर उन्हें समझाया। बिजली विभाग के अधिकारियों ने भी समस्या के समाधान को लेकर चर्चा की और जल्द निराकरण का आश्वासन दिया।
इसके बाद रहवासियों ने जाम खोल दिया और मार्ग पर यातायात बहाल हुआ। हालांकि, लोगों ने चेतावनी दी कि यदि बिजली और पानी की समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
फिलहाल रहवासियों को बिजली आपूर्ति सामान्य होने और पानी की व्यवस्था बहाल होने का इंतजार है। अब देखना होगा कि संबंधित विभागों की ओर से समस्या का स्थायी समाधान कब तक किया जाता है।












