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मुस्कान की बच्ची को कौन देगा सहारा? फैजान की पेशकश और कानून में क्या है रास्ता

पिता की हत्या, मां को फांसी की सजा; अब मासूम के भविष्य पर सबकी नजर

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले में सौरभ राजपूत की हत्या हुई थी। फैसले के बाद अब मुस्कान की छोटी बेटी के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच फैजान अंसारी नाम के एक व्यक्ति ने बच्ची की परवरिश, शिक्षा और देखभाल का खर्च उठाने की इच्छा जताई है। लेकिन क्या कोई व्यक्ति केवल इच्छा जताकर बच्चे को गोद ले सकता है? भारत में इसके लिए क्या कानूनी प्रक्रिया है?

मुस्कान की दो बेटियां हैं। जानकारी के मुताबिक, बड़ी बेटी करीब सात साल की है और अपने ननिहाल में रह रही है, जबकि छोटी बेटी का जन्म जेल में हुआ था। बच्ची के भविष्य को लेकर परिवार की स्थिति और उसकी देखभाल की व्यवस्था पर चर्चा हो रही है। ऐसे संवेदनशील मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बच्ची को सुरक्षित माहौल, उचित देखभाल और स्थिर भविष्य कैसे दिया जाए।

कौन हैं फैजान अंसारी?

फैजान अंसारी सोशल मीडिया पर सक्रिय एक व्यक्ति हैं, जो चर्चित मामलों और मनोरंजन जगत से जुड़े विषयों पर अपनी प्रतिक्रियाओं के कारण सुर्खियों में रहते हैं। उपलब्ध खबरों के अनुसार, उन्होंने मुस्कान की छोटी बेटी की परवरिश, शिक्षा और अन्य जरूरतों का खर्च उठाने की इच्छा जाहिर की है।

हालांकि, बच्ची की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जाएगी या नहीं, यह केवल उनकी घोषणा से तय नहीं होगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को बच्ची के हित, कानूनी स्थिति और प्रस्ताव देने वाले व्यक्ति की पात्रता सहित सभी जरूरी पहलुओं पर विचार करना होगा। आर्थिक मदद देने की इच्छा और कानूनी रूप से बच्चा गोद लेना दो अलग-अलग बातें हैं।

भारत में बच्चा गोद लेने का कानून क्या कहता है?

भारत में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया मुख्य रूप से दो कानूनी व्यवस्थाओं के तहत होती है।

1. किशोर न्याय अधिनियम, 2015

किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले अनाथ, परित्यक्त और समर्पित बच्चों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए गोद लिया जा सकता है। इस प्रक्रिया में बच्चे की सुरक्षा और सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जाती है।

2. हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम, 1956

यह कानून हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख समुदायों के उन लोगों पर लागू होता है जो इसकी कानूनी शर्तों के दायरे में आते हैं। इसके तहत बच्चे को गोद लेने और देने के लिए निर्धारित पात्रता और अन्य शर्तें पूरी करनी होती हैं।

किसी मामले में कौन-सा कानून लागू होगा, यह बच्चे और संबंधित व्यक्तियों की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

क्या जेल में बंद माता-पिता के बच्चे को कोई भी गोद ले सकता है?

नहीं। माता-पिता का जेल में होना अपने आप में बच्चे को गोद लेने के लिए उपलब्ध घोषित करने का आधार नहीं है। यदि माता-पिता जीवित हैं, तो उनके कानूनी अधिकार, बच्चे की देखभाल की व्यवस्था और अन्य परिस्थितियों पर विचार करना जरूरी है।

यदि बच्ची की देखभाल के लिए परिवार में कोई उपयुक्त व्यक्ति उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित बाल संरक्षण अधिकारी और बाल कल्याण समिति उसकी स्थिति का आकलन कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर बच्ची को सुरक्षित देखरेख और संरक्षण की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकती है।

यदि बच्ची को कानूनी रूप से गोद लेने योग्य घोषित करने की आवश्यकता हो, तो इसके लिए निर्धारित जांच और प्रक्रिया पूरी करनी होती है। किसी बाहरी व्यक्ति की इच्छा या परिवार की अनौपचारिक सहमति मात्र से कानूनी दत्तक ग्रहण पूरा नहीं हो जाता।

बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?

किशोर न्याय अधिनियम के तहत सामान्य दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) और उसके निर्धारित पोर्टल की अहम भूमिका होती है।

प्रक्रिया के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:

  1. पंजीकरण: पात्र इच्छुक दत्तक माता-पिता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण कराना होता है।
  2. दस्तावेजों की जांच: पहचान, निवास, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाती है।
  3. गृह अध्ययन: संबंधित अधिकारी यह आकलन करते हैं कि आवेदक बच्चे को सुरक्षित और उचित पारिवारिक वातावरण दे पाएगा या नहीं।
  4. बच्चे की कानूनी स्थिति: यह सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चा संबंधित कानून के तहत गोद दिए जाने के योग्य है।
  5. मिलान और कानूनी आदेश: निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर बच्चे और संभावित दत्तक माता-पिता का मिलान किया जाता है तथा सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक आदेश लिया जाता है।

आधिकारिक जानकारी और पंजीकरण के लिए कारा के पोर्टल पर जाएं: https://carings.wcd.gov.in/

बच्ची के भविष्य में सबसे अहम क्या है?

मुस्कान की छोटी बेटी के मामले में सबसे जरूरी है कि उसकी देखभाल, सुरक्षा, शिक्षा और भावनात्मक जरूरतों को प्राथमिकता मिले। यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या परिवार में कोई उपयुक्त व्यक्ति उसकी जिम्मेदारी उठा सकता है और बच्ची के लिए कौन-सी व्यवस्था सबसे सुरक्षित होगी।

फैजान अंसारी की ओर से मदद की इच्छा सामने आई है, लेकिन बच्ची की अभिरक्षा या दत्तक ग्रहण का अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के आकलन के अनुसार ही हो सकता है। फिलहाल, बच्ची के भविष्य को लेकर किसी अंतिम व्यवस्था की पुष्टि के बिना यह कहना उचित नहीं होगा कि उसे किसके संरक्षण में दिया जाएगा।

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