
कई दिनों तक नींद की परेशानी को न करें नजरअंदाज, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल और अनियमित दिनचर्या भी बन सकती है वजह
रतलाम। पढ़ाई, नौकरी, करियर, रिश्तों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच बढ़ता तनाव अब लोगों की मानसिक सेहत को प्रभावित कर रहा है। लगातार तनाव में रहने से न केवल नींद प्रभावित होती है, बल्कि व्यवहार, कामकाज और रिश्तों पर भी इसका असर पड़ सकता है। कई बार लंबे समय तक बनी रहने वाली मानसिक परेशानी डिप्रेशन का रूप भी ले सकती है। ऐसे में नींद की समस्या को सामान्य मानकर लगातार नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है।
नईदुनिया के हेलो डॉक्टर कार्यक्रम में शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. कपिलदेव आर्य ने तनाव, नींद, पारिवारिक दबाव और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि नींद की परेशानी के पीछे तनाव और चिंता जैसे मानसिक कारणों के साथ-साथ गलत दिनचर्या भी जिम्मेदार हो सकती है।
कई दिनों तक नींद न आए तो रहें सतर्क
कार्यक्रम में रतलाम की पुष्पा परमार ने सवाल किया कि नींद नहीं आने की समस्या कब चिंता का विषय बन जाती है। इसके जवाब में डॉ. कपिलदेव आर्य ने बताया कि कभी-कभार नींद प्रभावित होना सामान्य है, लेकिन यदि कई दिनों या हफ्तों तक लगातार नींद की परेशानी बनी रहे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
तनाव, चिंता और डिप्रेशन की स्थिति में नींद कम होने के साथ-साथ जरूरत से ज्यादा नींद आने की समस्या भी हो सकती है। इसलिए केवल नींद के घंटों पर ध्यान देने के बजाय व्यक्ति की मानसिक स्थिति और दिनचर्या को समझना भी जरूरी है।
सोने से पहले मोबाइल चलाने की आदत पड़ सकती है भारी
डॉक्टर के अनुसार, सोने से पहले मोबाइल का अधिक इस्तेमाल, चाय-कॉफी का ज्यादा सेवन और अनियमित दिनचर्या नींद को प्रभावित कर सकती है। देर रात तक स्क्रीन देखने और सोने-जागने का निश्चित समय नहीं होने से भी नींद की परेशानी बढ़ सकती है।
इससे बचने के लिए सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करना, नियमित दिनचर्या अपनाना और दिन के समय शारीरिक गतिविधियां करना उपयोगी हो सकता है।
नींद की दवा खुद से लेना खतरनाक हो सकता है
नींद नहीं आने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना उचित नहीं है। यदि परेशानी लगातार बनी हुई है, तो इसके पीछे की वजह का पता लगाना जरूरी है। खासकर जब नींद की समस्या के साथ उदासी, बेचैनी, थकान या नकारात्मक विचार भी आने लगें, तो मनोरोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
तनाव को नजरअंदाज न करें
लगातार मानसिक दबाव का असर व्यक्ति की कार्यक्षमता और पारिवारिक जीवन पर भी पड़ सकता है। समय रहते समस्या को पहचानना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना महत्वपूर्ण है। बेहतर दिनचर्या, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और सोने से पहले स्क्रीन का उपयोग कम करना नींद सुधारने में मदद कर सकता है।
ध्यान दें: यदि नींद की समस्या कई दिनों तक बनी रहती है या मानसिक परेशानी बढ़ रही है, तो चिकित्सकीय सलाह लें। केवल लक्षणों के आधार पर स्वयं को डिप्रेशन से ग्रस्त न मानें।












