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बाली में 35 भारतीयों को जेल, ऑनलाइन जुए के मामले में अदालत का बड़ा फैसला; जानिए पूरा मामला

नौकरी का झांसा या जुए के नेटवर्क में भूमिका? भारतीयों ने खुद को मानव तस्करी का पीड़ित बताया, फिर भी सुनाई गई सजा

इंडोनेशिया के पर्यटन स्थल बाली से भारतीय नागरिकों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। यहां ऑनलाइन जुए के नेटवर्क से जुड़े मामले में अदालत ने 35 भारतीय नागरिकों को दो से ढाई साल तक की जेल की सजा सुनाई है। डेनपसार जिला अदालत ने 7 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया। मामले में दो आरोपियों को ढाई-ढाई साल, जबकि बाकी 33 लोगों को दो-दो साल की कैद दी गई है। अदालत ने यह भी कहा कि सजा पूरी होने के बाद उन्हें भारत निर्वासित किया जा सकता है और इंडोनेशिया में दोबारा प्रवेश पर रोक लगाई जा सकती है।

दो विला में चल रहा था ऑनलाइन जुए का नेटवर्क

जांच के अनुसार, फरवरी 2026 में बाली के बदुंग और ताबानन क्षेत्रों के दो विला में ऑनलाइन जुए की गतिविधियों का पता चला था। पुलिस ने 3 फरवरी को छापेमारी के दौरान 39 भारतीय नागरिकों को पकड़ा था। इनमें से 35 लोगों के खिलाफ मामला चलाया गया। कार्रवाई के दौरान कई लैपटॉप और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। पुलिस के मुताबिक, इन उपकरणों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी मंच के संचालन में किया जा रहा था।

दो आरोपियों को ढाई साल की सजा

अदालत ने पीयूष शर्मा और यश राज सिंह गौर को दो साल छह महीने की जेल सुनाई है। बाकी 33 आरोपियों को दो-दो साल की सजा दी गई। अभियोजन पक्ष ने दोनों मुख्य आरोपियों के लिए पांच-पांच साल और अन्य 33 लोगों के लिए चार-चार साल की सजा मांगी थी। अदालत का फैसला अभियोजन की मांग से कम अवधि का रहा। हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का भी आदेश दिया गया है।

आरोपियों ने खुद को मानव तस्करी का पीड़ित बताया

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों और उनके वकीलों ने दावा किया था कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के जरिए इस नेटवर्क में फंसाया गया। उनके अनुसार, भारत में रोजगार एजेंसियों के माध्यम से उन्हें बाली में डाटा एंट्री कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड जैसी वैध नौकरियों का भरोसा दिया गया था। हालांकि, अदालत ने मामले में जुए से जुड़े आरोपों को साबित मानते हुए सजा सुनाई। मानव तस्करी से जुड़े उनके दावे को सजा से राहत का आधार नहीं माना गया।

सजा पूरी होने के बाद भारत भेजे जा सकते हैं

अदालत ने कहा कि जेल की सजा पूरी करने के बाद आरोपियों को इंडोनेशिया से निर्वासित करने और दोबारा देश में प्रवेश पर रोक लगाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इस फैसले के बाद सभी 35 भारतीयों को निर्धारित अवधि तक जेल में रहना होगा। मामले को सीमा पार संचालित आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा मानते हुए अदालत ने इसे गंभीरता से लिया।

इस मामले की अहम बात यह है कि विदेश में नौकरी के नाम पर होने वाली भर्तियों की जांच-पड़ताल बेहद जरूरी है। किसी भी विदेशी नौकरी का प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले कंपनी, भर्ती एजेंसी, वीजा और काम की वास्तविक प्रकृति की पुष्टि करना जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।

 

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