भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी की अब CBI जांच, 250 टन स्क्रैप बरामदगी से खुला था मामला; 21 आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति के बाद CBI को मिली जांच की जिम्मेदारी, रसमड़ा स्टील कंपनी के MD और डायरेक्टर भी गिरफ्तार
भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में सामने आए लोहा-स्क्रैप चोरी के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी से जुड़े इस मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगा। छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति के बाद मामले को CBI को सौंपने संबंधी आदेश राजपत्र में जारी किया गया है। इसके साथ ही पुरानी भिलाई पुलिस द्वारा की जा रही जांच के बाद केंद्रीय एजेंसी की औपचारिक एंट्री हो गई है।
मामला अपराध क्रमांक 277/2026 से जुड़ा है। पुलिस की जांच में अब तक BSP से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों, ट्रांसपोर्टरों, कारोबारियों और निजी कंपनी संचालकों समेत 21 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब CBI चोरी के कथित पूरे नेटवर्क, प्लांट से स्क्रैप बाहर निकालने की प्रक्रिया, परिवहन, भंडारण और निजी इकाइयों में इसकी खपत से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी।
250 टन स्क्रैप बरामदगी से खुला था मामला
इस मामले की शुरुआत 26 मई 2026 को हुई थी। पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र के अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स के गोदाम और हथखोज इलाके में पुलिस ने कार्रवाई की थी। यहां करीब 250 टन लौह स्क्रैप बरामद किया गया था।
पुलिस ने स्क्रैप के साथ कई वाहन, जेसीबी, हाइड्रा और अन्य मशीनरी भी जब्त की थी। जब्त सामग्री और वाहनों की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई थी। जांच में पुलिस को संदेह हुआ कि यह स्क्रैप BSP से चोरी कर बाहर निकाला गया था।
फ्लाई ऐश की आड़ में बाहर निकालने का आरोप
पुलिस की जांच के मुताबिक स्क्रैप को फ्लाई ऐश अथवा अन्य सामग्री की आड़ में प्लांट से बाहर निकालकर पहले गोदाम तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद इसे आगे खपाने की कड़ी जुड़ती थी। जांच में ट्रांसपोर्टरों, कारोबारियों और निजी औद्योगिक इकाइयों से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आने के बाद गिरफ्तारी का दायरा बढ़ता गया।
जांच में संजय सिंह समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपितों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
रसमड़ा स्टील कंपनी के MD और डायरेक्टर भी गिरफ्तार
मामले में 18 सितंबर 2026 को रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड, रसमड़ा के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक चोरी के स्क्रैप को निजी औद्योगिक इकाई में खपाने से संबंधित जांच में दोनों के नाम सामने आए थे। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या 21 हो गई।
BSP के अधिकारियों पर भी कार्रवाई
जांच के दौरान BSP प्रबंधन ने GM हिमांशु भूषण मलिक, नॉन-एग्जीक्यूटिव धनंजय वर्मा और मनोज कुमार देवांगन को निलंबित किया था। पुलिस ने स्क्रैप यार्ड की निगरानी, स्टॉक रिकॉर्ड और स्क्रैप के प्लांट से बाहर जाने की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी जांच की।
मामले में कुछ आरोपितों को अदालत से जमानत भी मिल चुकी है। नईदुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक अभय सिंह और हिमांशु खंडेलवाल को अग्रिम जमानत तथा कुछ अन्य आरोपितों को नियमित जमानत मिली है।
CBI जांच की मांग लगातार उठा रहे थे विधायक रिकेश सेन
वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन इस मामले में शुरू से ही CBI जांच की मांग कर रहे थे। उन्होंने केंद्र सरकार समेत विभिन्न स्तरों पर पत्राचार कर मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी। 20 जुलाई को उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर CBI जांच की मांग की थी। बाद में उनका पत्र आवश्यक कार्रवाई के लिए इस्पात मंत्रालय को भेजे जाने की जानकारी दी गई थी।
अब राजपत्र में CBI जांच संबंधी आदेश जारी होने के बाद मामले की जांच का दायरा केंद्रीय एजेंसी तक पहुंच गया है।
CBI के सामने अब कई बड़े सवाल
CBI जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि BSP से कथित तौर पर स्क्रैप बाहर निकालने का नेटवर्क कैसे काम करता था, चोरी का माल किन रास्तों से बाहर जाता था और उसे किन स्थानों पर खपाया जाता था।
इसके अलावा जांच में यह भी सामने आ सकता है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसमें प्लांट के अंदर तथा बाहर किन-किन लोगों की भूमिका रही। अब तक पुलिस द्वारा जुटाए गए दस्तावेज, तकनीकी साक्ष्य और गिरफ्तार आरोपितों से संबंधित रिकॉर्ड CBI जांच का आधार बन सकते हैं।
21 गिरफ्तारियों के बाद अब CBI की एंट्री
250 टन स्क्रैप की बरामदगी से शुरू हुई जांच अब केंद्रीय एजेंसी तक पहुंच गई है। पुलिस पहले ही 21 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। रसमड़ा की निजी स्टील कंपनी के MD और डायरेक्टर की गिरफ्तारी के बाद मामले की कड़ी और आगे बढ़ी थी। अब CBI के जांच में शामिल होने से BSP के कथित स्क्रैप चोरी नेटवर्क से जुड़े सभी पहलुओं की जांच आगे बढ़ेगी।












