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सिर्फ दांतों की चमक नहीं, पूरे शरीर से जुड़ी है मुंह की सेहत; खराब ओरल हाइजीन और कैंसर के बीच क्या है कनेक्शन?

रिसर्च में मसूड़ों की बीमारी, क्रोनिक सूजन और ओरल कैंसर के बीच संबंध सामने आया; विशेषज्ञों ने तंबाकू और सुपारी से दूरी बनाने की दी सलाह

नई दिल्ली। ज्यादातर लोग ओरल हाइजीन यानी मुंह की साफ-सफाई को चमकदार दांत, ताजी सांस और कैविटी से बचाव तक सीमित मानते हैं। लेकिन वैज्ञानिक शोध लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि मुंह की सेहत का संबंध शरीर के व्यापक स्वास्थ्य से भी हो सकता है। मसूड़ों की बीमारी, मुंह के माइक्रोबायोम में बदलाव और लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन को लेकर शोधकर्ता कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों के साथ संभावित संबंधों का अध्ययन कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, खराब ओरल हाइजीन का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को कैंसर हो ही जाएगा। ओरल हाइजीन और कैंसर के बीच संबंधों को समझने के लिए कई कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है। विशेष रूप से तंबाकू, सुपारी, शराब, खान-पान और जीवनशैली जैसे जोखिम कारक ओरल कैंसर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में ओरल कैंसर एक बड़ी चिंता

भारत में ओरल कैंसर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। उपलब्ध शोध के अनुसार, देश में तंबाकू और सुपारी से जुड़े उत्पादों का सेवन ओरल कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है।

स्मोकिंग और बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों के अलावा खैनी, गुटखा, सुपारी और तंबाकू-युक्त पान जैसी आदतें भी जोखिम बढ़ा सकती हैं। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर यानी IARC ने तंबाकू, शराब और सुपारी जैसे उत्पादों को कैंसर के जोखिम से जोड़ा है।

IARC के विश्लेषणों में भारत में ओरल कैंसर के मामलों में बिना धुएं वाले तंबाकू और सुपारी आधारित उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका की ओर भी संकेत किया गया है।

खराब ओरल हाइजीन और ओरल कैंसर के बीच क्या मिला?

पुणे में किए गए एक केस-कंट्रोल अध्ययन में ओरल कैंसर से पीड़ित 187 लोगों की तुलना 240 कंट्रोल प्रतिभागियों से की गई। अध्ययन में खराब ओरल हाइजीन और ओरल कैंसर के बीच एक संबंध पाया गया। तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों में यह संबंध और अधिक महत्वपूर्ण दिखाई दिया।

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि दांतों को ठीक से ब्रश न करने या मसूड़ों की बीमारी से सीधे कैंसर हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खराब ओरल हेल्थ से जुड़ी लंबे समय की सूजन और मुंह के बैक्टीरिया में बदलाव ऐसे जैविक तंत्रों का हिस्सा हो सकते हैं जिनका कैंसर के जोखिम से संबंध तलाशा जा रहा है।

2026 की समीक्षा में भी सामने आया संबंध

2026 में प्रकाशित एक सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में कम बार ब्रश करने और अनियमित डेंटल चेक-अप को ओरल कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया। इस समीक्षा में 15 अध्ययनों को शामिल किया गया था।

हालांकि, शोधकर्ताओं और डॉक्टरों की एक महत्वपूर्ण चेतावनी है—एसोसिएशन और कॉजेशन एक जैसी चीजें नहीं हैं। यानी दो चीजों के बीच संबंध मिलना यह साबित नहीं करता कि एक चीज सीधे दूसरी का कारण है।

तंबाकू और शराब का सेवन, खान-पान, डायबिटीज, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच जैसे कारक भी इन परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या मुंह की बीमारी शरीर के दूसरे अंगों के कैंसर से भी जुड़ सकती है?

मुंह शरीर की एक जटिल जैविक प्रणाली का हिस्सा है। वैज्ञानिक मसूड़ों की बीमारी और शरीर के दूसरे हिस्सों में होने वाले कैंसर के संभावित संबंधों पर भी शोध कर रहे हैं।

कुछ ऑब्जर्वेशनल अध्ययनों में मसूड़ों की बीमारी और कोलोरेक्टल, पैंक्रियाटिक, लंग तथा अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के बीच संबंध देखे गए हैं। इसके संभावित कारणों में क्रोनिक इन्फ्लेमेशन, इम्यून सिस्टम में बदलाव, बैक्टीरियल बायप्रोडक्ट्स और माइक्रोबायोम में परिवर्तन शामिल हो सकते हैं।

लेकिन इन अध्ययनों को इस बात का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता कि मसूड़ों की बीमारी ही इन कैंसर का कारण बनती है।

क्रोनिक इन्फ्लेमेशन क्यों महत्वपूर्ण है?

मसूड़ों की बीमारी में मुंह के अंदर लंबे समय तक सूजन बनी रह सकती है। शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और बैक्टीरियल गतिविधियों से जुड़े बदलावों के कारण वैज्ञानिक यह अध्ययन कर रहे हैं कि ऐसी लगातार सूजन शरीर के दूसरे हिस्सों पर किस तरह असर डाल सकती है।

इसी वजह से ओरल हेल्थ को अब केवल दांतों तक सीमित विषय के रूप में नहीं देखा जा रहा है। हालांकि, क्रोनिक इन्फ्लेमेशन और कैंसर के बीच संबंध जटिल है और केवल ओरल हाइजीन के आधार पर किसी व्यक्ति के कैंसर जोखिम का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

मुंह की सेहत बेहतर रखने के लिए क्या करें?

मुंह की अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतें महत्वपूर्ण हैं—

  • दिन में दो बार फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से ब्रश करें।
  • दांतों के बीच की जगह की नियमित सफाई करें।
  • मसूड़ों से लगातार खून आने, सूजन, दर्द या दांत ढीले होने पर डेंटिस्ट से सलाह लें।
  • बार-बार होने वाले मुंह के छालों या अन्य असामान्य बदलावों को नजरअंदाज न करें।
  • नियमित डेंटल चेक-अप कराएं।
  • तंबाकू और सुपारी से दूरी बनाएं।
  • शराब का सेवन कम करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

मुंह में सफेद या लाल धब्बे, लंबे समय तक रहने वाला छाला, गांठ, मुंह खोलने या निगलने में परेशानी, लगातार आवाज बैठना या बिना वजह खून आना जैसे लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

खासकर तंबाकू या सुपारी का सेवन करने वाले लोगों को ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सिर्फ ब्रश करना ही कैंसर से बचाव की गारंटी नहीं

विशेषज्ञों के मुताबिक, अच्छी ओरल हाइजीन कैंसर से बचाव की गारंटी नहीं देती। लेकिन इससे मसूड़ों और दांतों की सेहत बेहतर रखने, मुंह की बीमारियों को कम करने और संदिग्ध बदलावों का समय रहते पता लगाने में मदद मिल सकती है।

कैंसर से बचाव के व्यापक उपायों में तंबाकू और सुपारी से दूरी, शराब का सीमित सेवन, संतुलित खान-पान, स्वस्थ जीवनशैली, जरूरी मेडिकल स्क्रीनिंग और नियमित ओरल हेल्थ चेक-अप सभी की अपनी भूमिका है।

यानी मुंह की देखभाल को सिर्फ चमकदार दांतों तक सीमित रखने के बजाय इसे पूरे शरीर की सेहत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानना जरूरी है।

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