chhattisgarhHealthLatest

बिहार की 48 वर्षीय महिला की रायपुर में सफल बाईपास सर्जरी, हृदय की 3 नसों में था गंभीर ब्लॉकेज

500 से ज्यादा ब्लड शुगर के बावजूद डॉक्टरों ने पहले स्थिति नियंत्रित की, फिर बिना हृदय रोके की गई जटिल सर्जरी

रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में बिहार के मधुबनी की 48 वर्षीय महिला की जटिल कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। महिला के हृदय की तीन प्रमुख कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था। चिकित्सकीय भाषा में इसे ट्रिपल वेसल डिजीज कहा जाता है। सर्जरी से पहले उनका ब्लड शुगर 500 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक था, इसलिए डॉक्टरों ने पहले शुगर को नियंत्रित किया और इसके बाद बाईपास सर्जरी की।

तीनों प्रमुख धमनियों में था ब्लॉकेज

मधुबनी की रहने वाली 48 वर्षीय महिला को करीब डेढ़ महीने पहले पहली बार सीने में दर्द हुआ था। शुरुआती जांच के बाद उन्हें गैस और एसिडिटी की दवाएं दी गईं। दोबारा सीने में दर्द होने पर परिजन उन्हें दरभंगा के एक बड़े अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां एंजियोग्राफी में हृदय की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज सामने आया।

डॉक्टरों ने बाईपास सर्जरी की सलाह दी। इसके बाद रायपुर में रहने वाले रिश्तेदारों से जानकारी मिलने पर परिवार मरीज की एंजियोग्राफी की सीडी लेकर रायपुर पहुंचा और अंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में डॉक्टरों से परामर्श लिया।

सर्जरी से पहले ब्लड शुगर को किया नियंत्रित

अस्पताल पहुंचने के समय महिला का ब्लड शुगर 500 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक था। डॉक्टरों के अनुसार इतनी अधिक शुगर की स्थिति में तुरंत बाईपास सर्जरी करना जोखिमपूर्ण हो सकता था। इसलिए चिकित्सकीय टीम ने पहले ब्लड शुगर को नियंत्रित किया और मरीज को सर्जरी के लिए तैयार किया।

इसके बाद विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने मरीज की बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी सफलतापूर्वक की।

बिना हृदय को रोके हुई बाईपास सर्जरी

इस सर्जरी की खास बात यह रही कि इसे बीटिंग हार्ट तकनीक से किया गया, यानी ऑपरेशन के दौरान हृदय को रोका नहीं गया। बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी का इस्तेमाल किया गया, जिसे लंबे समय तक प्रभावी रहने वाला आर्टेरियल ग्राफ्ट माना जाता है।

सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी तकनीक से की गई। इसमें सीने की मध्य हड्डी यानी स्टर्नम को सावधानीपूर्वक खोलकर हृदय तक पहुंच बनाई जाती है।

ऑपरेशन के दूसरे दिन चलने लगी मरीज

सर्जरी के बाद महिला की रिकवरी अच्छी रही। अस्पताल के अनुसार ऑपरेशन के दिन ही उन्हें होश आ गया और शाम को उन्होंने हल्का नाश्ता किया। ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही उन्होंने चलना-फिरना शुरू कर दिया। उपचार के बाद उनकी स्थिति अच्छी बताई गई और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया।

बिहार के आयुष्मान कार्ड से रायपुर में मिला इलाज

मरीज बिहार की रहने वाली थीं। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले यह पुष्टि की गई कि बिहार के आयुष्मान कार्ड के माध्यम से छत्तीसगढ़ में उनकी बाईपास सर्जरी हो सकती है या नहीं। आयुष्मान योजना कार्यालय से पुष्टि मिलने के बाद उन्हें अंबेडकर अस्पताल में भर्ती किया गया और योजना के तहत उनका इलाज किया गया।

महिलाओं में भी बढ़ रहा कम उम्र में हृदय रोग का खतरा

डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा आमतौर पर पुरुषों की तुलना में कम माना जाता है और यह बीमारी अक्सर अधिक उम्र में सामने आती है। हालांकि अनियंत्रित मधुमेह, मोटापा, तंबाकू का सेवन, पारिवारिक इतिहास, शारीरिक गतिविधि की कमी और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसी वजहों से महिलाओं में कम उम्र में भी हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।

डॉक्टरों ने महिलाओं को सलाह दी है कि सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान या हृदय से जुड़े अन्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

पड़ोसी राज्यों से भी पहुंच रहे मरीज

अंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में ओपन हार्ट सर्जरी, कोरोनरी बाईपास सर्जरी, चेस्ट सर्जरी और विभिन्न वैस्कुलर सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार छत्तीसगढ़ के अलावा बिहार और आसपास के राज्यों से भी मरीज जटिल हृदय रोग और ओपन हार्ट सर्जरी के इलाज के लिए रायपुर पहुंच रहे हैं। बिहार की इस महिला की सफल बाईपास सर्जरी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में उपलब्ध जटिल हृदय उपचार सुविधाओं को भी रेखांकित करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button