100% भर गया माडमसिल्ली बांध, ऑटोमेटिक साइफन सिस्टम हुआ एक्टिव; 100 साल पुरानी तकनीक ने फिर दिखाया कमाल

धमतरी के ऐतिहासिक माडमसिल्ली बांध में जलस्तर बढ़ते ही अपने आप शुरू हुई पानी की निकासी, 34 साइफन स्पिलवे से निकल रहा हजारों क्यूसेक पानी
रायपुर/धमतरी, 1 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बारिश का असर अब बांधों में साफ दिखाई देने लगा है। धमतरी जिले का ऐतिहासिक माडमसिल्ली बांध 100 फीसदी भर गया है। जलस्तर निर्धारित सीमा तक पहुंचते ही बांध का अनोखा ऑटोमेटिक साइफन सिस्टम सक्रिय हो गया, जिसके बाद अतिरिक्त पानी की निकासी अपने आप शुरू हो गई।
बांध से निकलते पानी और एक साथ सक्रिय होते साइफन सिस्टम का नजारा इन दिनों लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक फिलहाल करीब 3,836 क्यूसेक पानी साइफन सिस्टम के जरिए बाहर निकलकर गंगरेल बांध की ओर जा रहा है।
ब्रिटिश काल में बनी थी यह अनोखी संरचना
माडमसिल्ली बांध को धमतरी जिले के ऐतिहासिक बांधों में गिना जाता है। इसका निर्माण 1914 से 1923 के बीच ब्रिटिश काल में कराया गया था। यानी इस बांध को बने हुए 100 साल से अधिक समय बीत चुका है।
बांध की सबसे खास बात इसकी जल निकासी प्रणाली है, जिसे उस दौर की इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण माना जाता है। आज भी बारिश के मौसम में यही पुरानी तकनीक प्रभावी तरीके से काम करती दिखाई देती है।
पानी बढ़ते ही अपने आप शुरू हो जाता है साइफन सिस्टम
माडमसिल्ली बांध में लगाया गया साइफन सिस्टम इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। बांध में पानी निर्धारित स्तर तक पहुंचने के बाद साइफन अपने आप सक्रिय हो जाता है और अतिरिक्त पानी बाहर निकलने लगता है।
इस व्यवस्था में सामान्य परिस्थितियों की तरह पानी की निकासी के लिए हर बार गेट को मैन्युअली खोलने की आवश्यकता नहीं पड़ती। जलस्तर बढ़ने के साथ सिस्टम खुद काम करना शुरू कर देता है।
बांध में हैं करीब 34 साइफन स्पिलवे
माडमसिल्ली बांध में करीब 34 साइफन स्पिलवे होने की जानकारी है। मानसून के दौरान जब जलस्तर बढ़ता है, तो ये साइफन अतिरिक्त पानी की निकासी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
साइफन सिस्टम से तेज बहाव के साथ बाहर निकलता पानी और सक्रिय होती जल निकासी व्यवस्था बांध को बेहद आकर्षक दृश्य प्रदान करती है। बारिश के मौसम में इसे देखने के लिए आसपास के लोग भी पहुंचते हैं।
एक सदी पुरानी तकनीक आज भी कारगर
माडमसिल्ली बांध केवल पानी के भंडारण के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह पुराने समय की इंजीनियरिंग क्षमता का भी उदाहरण है। एक सदी से अधिक समय बीतने के बावजूद इसकी साइफन आधारित जल निकासी व्यवस्था आज भी काम कर रही है।
बारिश के दौरान बांध के पूर्ण जलभराव के बाद सिस्टम का अपने आप सक्रिय होना यह दिखाता है कि उस समय तैयार की गई तकनीकी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
गंगरेल बांध की ओर जा रहा है पानी
माडमसिल्ली बांध से साइफन सिस्टम के जरिए निकल रहा पानी गंगरेल बांध की ओर जा रहा है। लगातार बारिश के कारण जिले के जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। ऐसे में माडमसिल्ली बांध से अतिरिक्त पानी की निकासी जल प्रबंधन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल 100 फीसदी भर चुके बांध और सक्रिय साइफन सिस्टम का दृश्य धमतरी में चर्चा का विषय बना हुआ है। आधुनिक तकनीक के दौर में भी ब्रिटिश काल की यह जल निकासी प्रणाली लोगों को पुरानी इंजीनियरिंग की याद दिला रही है।












