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Meta पर 18 अरब डॉलर का दबाव, बच्चों के लिए Instagram-Facebook में बदलेंगे कई नियम

बच्चों और किशोरों की सोशल मीडिया लत को लेकर बढ़ा दबाव, स्क्रीन टाइम से लेकर पैरेंटल कंट्रोल तक में बदलाव की तैयारी

टेक डेस्क। Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी Meta पर बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल और कथित लत को बढ़ावा देने के आरोपों के बाद कंपनी पर बड़ा दबाव बना है। अमेरिकी राज्यों के साथ हुए करीब 18 अरब डॉलर यानी लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक समझौते के बाद Meta को भारी रकम चुकाने के साथ-साथ अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में कई महत्वपूर्ण बदलाव करने पड़ सकते हैं।

प्रस्तावित बदलावों का सबसे ज्यादा असर 18 साल से कम उम्र के यूजर्स पर पड़ सकता है। इनमें स्क्रीन टाइम, पुश नोटिफिकेशन, लाइक काउंट, उम्र सत्यापन और पैरेंटल कंट्रोल जैसे फीचर्स शामिल हैं।

बच्चों के लिए 2 घंटे की डिफॉल्ट स्क्रीन टाइम लिमिट?

रिपोर्ट के मुताबिक, 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए Instagram और Facebook पर रोजाना 2 घंटे की डिफॉल्ट समय सीमा तय की जा सकती है। यदि कोई किशोर इससे ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहता है, तो इसके लिए माता-पिता की मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है।

इस बदलाव का उद्देश्य बच्चों और किशोरों के लंबे समय तक सोशल मीडिया इस्तेमाल को कम करना है। हालांकि, यह व्यवस्था किस तरह लागू होगी और किन उम्र के यूजर्स पर कौन से नियम लागू होंगे, इसका अंतिम स्वरूप समझौते की शर्तों पर निर्भर करेगा।

स्कूल टाइम में पुश नोटिफिकेशन पर लग सकता है प्रतिबंध

बच्चों का ध्यान पढ़ाई से हटने और बार-बार सोशल मीडिया चेक करने की आदत को कम करने के लिए स्कूल के समय आने वाले पुश नोटिफिकेशन को सीमित करने की तैयारी भी की जा सकती है।

पुश नोटिफिकेशन यूजर्स को बार-बार ऐप पर वापस लाने वाले प्रमुख फीचर्स में से एक हैं। ऐसे में इनके इस्तेमाल को सीमित करने से बच्चों को पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

लाइक काउंट और एल्गोरिदम पर भी नजर

Meta के प्लेटफॉर्म्स पर लाइक, कमेंट और अन्य सोशल इंटरैक्शन बच्चों और किशोरों के बीच सामाजिक तुलना और दूसरों से मान्यता पाने की भावना को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए ऐसे फीचर्स की समीक्षा भी समझौते के संभावित हिस्से में शामिल हो सकती है।

इसके साथ ही Meta को अपने एल्गोरिदम पर भी अधिक निगरानी रखनी पड़ सकती है। खास तौर पर ऐसे कंटेंट की पहचान और नियंत्रण पर जोर दिया जा सकता है, जो बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

उम्र सत्यापन होगा और मजबूत

कम उम्र के बच्चे गलत उम्र दर्ज करके ऐसे कंटेंट तक न पहुंच सकें जो उनके लिए उपयुक्त नहीं है, इसके लिए Meta को उम्र सत्यापन की प्रक्रिया मजबूत करनी पड़ सकती है।

उम्र सत्यापन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सामने बड़ी चुनौती है, क्योंकि कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ यूजर्स की निजता का भी ध्यान रखना पड़ता है।

बुलिंग और संवेदनशील कंटेंट पर बढ़ेगी निगरानी

बच्चों और किशोरों से जुड़े साइबर बुलिंग, ईटिंग डिसऑर्डर और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित संवेदनशील कंटेंट की निगरानी भी मजबूत की जा सकती है।

ऐसे कंटेंट की पहचान, उसे कम लोगों तक पहुंचाना और जरूरत पड़ने पर उसे हटाना प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। पैरेंटल कंट्रोल के जरिए माता-पिता को भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर ज्यादा नियंत्रण देने की कोशिश की जा सकती है।

माता-पिता को मिलेंगे ज्यादा कंट्रोल

प्रस्तावित बदलावों में पैरेंटल कंट्रोल टूल्स को मजबूत करना भी अहम हिस्सा हो सकता है। माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया गतिविधियों पर ज्यादा नियंत्रण देने की व्यवस्था की जा सकती है।

इसका उद्देश्य बच्चों को लंबे समय तक सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से रोकना और उन्हें संभावित रूप से हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट से बचाना है।

10 साल में चुकाई जाएगी करीब 18 अरब डॉलर की रकम

रिपोर्ट के अनुसार, Meta को करीब 18 अरब डॉलर की पूरी रकम एक साथ नहीं चुकानी होगी। यह राशि अगले 10 वर्षों में किस्तों के रूप में चुकाई जा सकती है।

इस रकम का इस्तेमाल बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, डिजिटल साक्षरता, स्कूल के बाद की गतिविधियों और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जा सकता है।

TikTok और YouTube पर भी बढ़ सकता है दबाव

Meta के साथ होने वाला यह समझौता सिर्फ Facebook और Instagram तक सीमित असर वाला नहीं माना जा रहा है। यदि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नए नियम प्रभावी साबित होते हैं, तो TikTok और YouTube जैसे दूसरे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर भी इसी तरह के नियम लागू करने का दबाव बढ़ सकता है।

सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म डिजाइन, एल्गोरिदम और बच्चों से जुड़े सुरक्षा फीचर्स में बदलाव करने पड़ सकते हैं।

टेक इंडस्ट्री के लिए बन सकता है बड़ा उदाहरण

बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर दुनियाभर में बहस चल रही है। ऐसे में Meta के खिलाफ प्रस्तावित यह समझौता टेक इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

यदि समझौते को अंतिम मंजूरी मिलती है और इसके नियम प्रभावी तरीके से लागू होते हैं, तो भविष्य में दूसरी टेक कंपनियों को भी बच्चों की सुरक्षा के लिए अपने प्लेटफॉर्म्स में इसी तरह के बदलाव करने पड़ सकते हैं।

क्या Meta के प्लेटफॉर्म्स सच में बदल जाएंगे?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि Meta अपने प्लेटफॉर्म्स के उन फीचर्स और एल्गोरिदम में कितने बड़े बदलाव करता है, जिन पर बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक सोशल मीडिया से जोड़े रखने के आरोप लगते रहे हैं।

हालांकि, समझौते के संभावित नियमों को अंतिम रूप मिलने और उनके लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चों के लिए Instagram और Facebook का इस्तेमाल वास्तव में कितना बदलता है।

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