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GDP बढ़ रही, लेकिन क्या यही विकास है? अमर्त्य सेन के नजरिए से भारत की तरक्की का दूसरा पैमाना

नई दिल्ली। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश की GDP लगातार बढ़ रही है और प्रति व्यक्ति आय भी पिछले वर्षों में काफी ऊपर गई है। लेकिन नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के विकास संबंधी विचार एक अलग सवाल खड़ा करते हैं—क्या सिर्फ GDP और प्रति व्यक्ति आय बढ़ने को ही देश की असली तरक्की माना जा सकता है?

अमर्त्य सेन के Capability Approach के मुताबिक विकास का अर्थ केवल लोगों की आमदनी बढ़ना नहीं है। असली विकास तब माना जाएगा, जब लोगों के पास बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की अधिक क्षमताएं और स्वतंत्रताएं हों।

भारत की अर्थव्यवस्था बड़ी हुई, लेकिन विकास को कैसे मापें?

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत की GDP करीब 3.96 ट्रिलियन डॉलर थी, जबकि प्रति व्यक्ति GDP लगभग 2,702.5 डॉलर रही। इसी वर्ष बांग्लादेश की GDP करीब 456.3 अरब डॉलर और प्रति व्यक्ति GDP 2,597.3 डॉलर थी। यानी कुल अर्थव्यवस्था के आकार में भारत बांग्लादेश से कई गुना बड़ा है और nominal per-capita GDP में भी भारत फिलहाल थोड़ा आगे है।

लेकिन यही आंकड़े अमर्त्य सेन के सवाल को महत्वपूर्ण बनाते हैं—क्या प्रति व्यक्ति आय की तुलना से आम नागरिक की जिंदगी की पूरी तस्वीर सामने आ जाती है?

जवाब है—नहीं।

आय के साथ यह देखना भी जरूरी है कि उस आय का असर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, जीवन प्रत्याशा और सामाजिक अवसरों पर कितना पड़ा है।

अमर्त्य सेन का Capability Approach क्या कहता है?

अमर्त्य सेन के विचारों में विकास का केंद्र व्यक्ति है, केवल अर्थव्यवस्था नहीं।

अगर किसी देश की GDP बढ़ती है लेकिन बड़ी आबादी को अच्छी शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा, पर्याप्त पोषण या बेहतर रोजगार के अवसर नहीं मिलते, तो केवल आर्थिक आंकड़ों के आधार पर उसे पूर्ण विकास नहीं कहा जा सकता।

यही वजह है कि सेन की सोच में “Development as Freedom” का विचार महत्वपूर्ण है। व्यक्ति के पास बेहतर जीवन जीने के वास्तविक विकल्प और क्षमताएं होना विकास का अहम हिस्सा है।

भारत की तस्वीर: मानव विकास में सुधार भी हुआ है

हालांकि भारत के बारे में यह कहना भी सही नहीं होगा कि मानव विकास नहीं हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी UNDP की 2025 Human Development Report के अनुसार भारत का HDI 2022 के 0.676 से बढ़कर 2023 में 0.685 हुआ। भारत 193 देशों में 130वें स्थान पर रहा और medium human development category में है।

इसका मतलब है कि भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े मानव विकास संकेतकों में सुधार हुआ है। इसलिए तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।

असल बहस यह है कि आर्थिक विकास की गति और मानव विकास की गति के बीच कितना अंतर है।

भारत और पड़ोसी देशों की प्रति व्यक्ति आय (2010 – 2026)
यह टेबल यूएस डॉलर ($ Current Prices) में देशों की सालाना प्रति व्यक्ति आय के उतार-चढ़ाव को दर्शाती है: [1, 2]

वर्ष 🇮🇳 भारत (India) 🇧🇩 बांग्लादेश (Bangladesh) 🇵🇰 पाकिस्तान (Pakistan) 🇱🇰 श्रीलंका (Sri Lanka) न्यूज़ नोट्स / मुख्य घटनाएं 📌
2010 $1,358 $781 $1,040 $2,740 मनमोहन सरकार का दौर, आर्थिक रिकवरी।
2011 $1,458 $861 $1,110 $3,125 भारत में 7% से अधिक की स्थिर आर्थिक वृद्धि।
2012 $1,444 $883 $1,155 $3,350 वैश्विक मंदी का असर, भारतीय रुपया कमजोर हुआ।
2013 $1,449 $982 $1,210 $3,610 मोदी सरकार के आने से ठीक पहले का समय।
2014 $1,574 $1,110 $1,250 $3,820 मई 2014: मोदी सरकार का पहला कार्यकाल शुरू।
2015 $1,606 $1,248 $1,355 $3,840 विश्व बैंक ने भारत को लो-इनकम से लोअर-मिडिल श्रेणी में डाला।
2016 $1,717 $1,402 $1,430 $3,910 भारत में नोटबंदी (Demonetisation) का फैसला।
2017 $1,958 $1,564 $1,460 $4,040 भारत में GST लागू हुआ, बांग्लादेश की तेज ग्रोथ।
2018 $1,974 $1,715 $1,480 $4,100 पाकिस्तान में आर्थिक संकट की शुरुआत।
2019 $2,100 $1,960 $1,280 $3,850 मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल, मैन्युफैक्चरिंग पर जोर।
2020 $1,910 $2,020 $1,190 $3,680 कोविड-19 महामारी: भारत की प्रति व्यक्ति आय में गिरावट।
2021 $2,230 $2,410 $1,400 $3,970 कोरोना के बाद बांग्लादेश नाममात्र आय में भारत से आगे निकला।
2022 $2,280 $2,520 $1,590 $3,350 श्रीलंका में भयंकर आर्थिक संकट और डिफॉल्ट।
2023 $2,434 $2,620 $1,470 $3,450 भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी कुल जीडीपी बना।
2024 $2,592 $2,680 $1,540 $3,630 लोकसभा चुनाव, मोदी सरकार 3.0 की शुरुआत।
2025 $2,702 $2,790 $1,680 $3,920 श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में पर्यटन से सुधार
2026 $2,812 $2,911 $1,901 $4,110 IMF 2026 का ताजा आंकड़ा: बांग्लादेश मामूली आगे

(स्रोत: IMF वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक डेटा and वर्ल्ड बैंक मैक्रो डेटा। 2025 और 2026 के आंकड़े वर्तमान अनुमानों/प्रोजेक्शंस पर आधारित हैं)

बांग्लादेश की कहानी क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत-बांग्लादेश की तुलना लंबे समय से विकास अर्थशास्त्र में चर्चा का विषय रही है। खासकर अमर्त्य सेन ने दक्षिण एशिया के देशों की तुलना करते हुए यह दिखाने की कोशिश की है कि अपेक्षाकृत कम आय वाला देश भी कुछ सामाजिक संकेतकों में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

हालांकि आज के आंकड़ों में तस्वीर को बहुत सावधानी से देखना जरूरी है। विश्व बैंक के 2025 आंकड़ों में भारत की nominal per-capita GDP $2,702.5 और बांग्लादेश की $2,597.3 है। 2024 में भी भारत $2,694.7 और बांग्लादेश $2,593.4 पर था।

इसलिए आज यह कहना कि “बांग्लादेश भारत से ज्यादा अमीर हो गया है” सही निष्कर्ष नहीं होगा।

लेकिन सामाजिक विकास के अलग-अलग संकेतकों की तुलना फिर भी महत्वपूर्ण है।

GDP बनाम Quality of Life

यही वह जगह है जहां अमर्त्य सेन का विचार आज भी प्रासंगिक दिखाई देता है।

मान लीजिए किसी देश में GDP 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। लेकिन यदि उसी समय किसी गरीब परिवार के बच्चे को अच्छी शिक्षा नहीं मिल रही, परिवार को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल रही और रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं, तो केवल GDP growth उस परिवार के जीवन की पूरी कहानी नहीं बताती।

दूसरी तरफ यदि आर्थिक विकास के साथ स्कूल, अस्पताल, पोषण, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा में सुधार होता है, तो आर्थिक वृद्धि का वास्तविक फायदा लोगों तक पहुंचता है।

भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल

भारत के लिए चुनौती अब केवल GDP बढ़ाने की नहीं है। चुनौती यह है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के अलग-अलग वर्गों तक कितनी समानता से पहुंचे।

देश की अर्थव्यवस्था बड़ी हो रही है, लेकिन आगे की विकास रणनीति में कुछ सवाल महत्वपूर्ण होंगे—

  • क्या हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है?
  • क्या गरीब परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं?
  • क्या महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है?
  • क्या युवाओं को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण रोजगार मिल रहा है?
  • क्या आर्थिक विकास के फायदे ग्रामीण और कमजोर वर्गों तक पहुंच रहे हैं?
  • क्या आय और अवसरों की असमानता कम हो रही है?

केवल GDP नहीं, इंसान भी विकास का केंद्र

अमर्त्य सेन के विचारों का मूल संदेश यही है कि अर्थव्यवस्था साधन है, अंतिम लक्ष्य इंसान का बेहतर जीवन है।

भारत की आर्थिक प्रगति को नकारा नहीं जा सकता। विश्व बैंक के अनुसार 2025 में भारत की GDP growth 7.6 प्रतिशत रही और GDP लगभग 3.96 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंची।

लेकिन विकास की अगली मंजिल केवल बड़ी GDP नहीं हो सकती। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि आर्थिक वृद्धि के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, रोजगार, लैंगिक समानता और जीवन की गुणवत्ता में भी समान गति से सुधार हो।

यही अमर्त्य सेन के विकास दर्शन का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है—देश कितना कमाता है, यह महत्वपूर्ण है; लेकिन उस कमाई से लोगों के जीवन में कितना बदलाव आता है, यह उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

भारत आज आर्थिक रूप से तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रति व्यक्ति nominal GDP के मामले में भी भारत फिलहाल बांग्लादेश से थोड़ा आगे है। इसलिए मौजूदा आंकड़ों के आधार पर यह कहना कि भारत आर्थिक रूप से बांग्लादेश से पीछे है, सही नहीं होगा।

लेकिन अमर्त्य सेन का नजरिया GDP की तुलना से आगे जाकर विकास को देखने की चुनौती देता है। उनके दृष्टिकोण से असली सफलता तब होगी जब आर्थिक विकास का असर आम नागरिक की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता में दिखाई दे।

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