AIIMS रायपुर में स्वर्णप्राशन संस्कार, बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी जागरूकता

रायपुर। बच्चों के स्वास्थ्य और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायपुर में स्वर्णप्राशन संस्कार से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। आयुर्वेद में स्वर्णप्राशन को बच्चों के लिए किए जाने वाले पारंपरिक संस्कारों में महत्वपूर्ण माना गया है। इसमें निर्धारित आयु के बच्चों को चिकित्सकीय देखरेख में स्वर्ण आधारित आयुर्वेदिक औषधीय मिश्रण दिया जाता है।
स्वर्णप्राशन का उल्लेख आयुर्वेद के काश्यप संहिता में मिलता है। आयुर्वेदिक परंपरा में इसे बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, शारीरिक विकास, बुद्धि और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने से जोड़ा गया है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इन सभी दावों के पर्याप्त प्रमाण समान रूप से स्थापित नहीं हैं, इसलिए इसे किसी बीमारी के इलाज या टीकाकरण के विकल्प के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
आयुर्वेदिक परंपरा में स्वर्णप्राशन के लिए पुष्य नक्षत्र को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसी कारण कई संस्थानों और आयुर्वेदिक केंद्रों में इसका आयोजन पुष्य नक्षत्र के अवसर पर किया जाता है। पुष्य नक्षत्र सामान्यतः लगभग 27 दिनों के चंद्र नक्षत्र चक्र में एक बार आता है, इसलिए इसकी तिथि हर महीने बदलती रहती है।
बच्चों को कोई भी औषधीय पदार्थ देने से पहले चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से नवजात शिशुओं, एलर्जी वाले बच्चों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे बच्चों के मामले में अभिभावकों को स्वयं से कोई दवा या मिश्रण नहीं देना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि बच्चे के नियमित टीकाकरण, संतुलित पोषण, स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता दी जाए।
AIIMS रायपुर जैसे संस्थान में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े विषयों पर गतिविधियां आयोजित होना आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच संवाद का अवसर प्रदान करता है। बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा कोई भी निर्णय लेते समय परंपरागत मान्यताओं के साथ-साथ वर्तमान चिकित्सा प्रमाणों और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है।
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