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FMCG प्रोडक्ट्स पर महंगाई की मार, Britannia के ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैकेट का वजन घटेगा

Britannia के ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैकेट का वजन घटेगा, HUL समेत कई FMCG कंपनियां बढ़ा सकती हैं दाम

देश में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले FMCG प्रोडक्ट्स की कीमतों पर एक बार फिर दबाव बढ़ रहा है। कच्चे माल की लागत में लगातार बढ़ोतरी के बीच Britannia समेत कई बड़ी कंपनियां कीमतों और पैकेट के वजन में बदलाव करने की तैयारी कर रही हैं। इसका असर आने वाले समय में बिस्किट, खाद्य पदार्थों और अन्य रोजमर्रा के सामान की खरीदारी पर पड़ सकता है।

देश की प्रमुख बेकरी और स्नैक कंपनी Britannia Industries चालू तिमाही में करीब 1.5 से 2% तक अतिरिक्त प्राइसिंग एक्शन लेने की तैयारी में है। कंपनी के अनुसार चीनी, पाम ऑयल और ईंधन जैसे कच्चे माल की लागत ऊंची बनी हुई है।

₹5 और ₹10 के पैकेट में होगी Shrinkflation

Britannia छोटे मूल्य वाले पैक्स में सीधे कीमत बढ़ाने के बजाय Shrinkflation का इस्तेमाल कर सकती है। इसका मतलब है कि पैकेट की कीमत वही रखी जाएगी, लेकिन उसके अंदर मौजूद बिस्किट की मात्रा या वजन कम किया जा सकता है।

खास तौर पर ₹5 और ₹10 वाले पैकेट इस बदलाव से प्रभावित हो सकते हैं। इससे ग्राहकों को पैकेट खरीदते समय वही कीमत दिखाई देगी, लेकिन प्रति ग्राम उत्पाद की वास्तविक कीमत बढ़ जाएगी।

कंपनी के एमडी और सीईओ रक्षित हरगवे के मुताबिक, जून तिमाही में किए गए मूल्य संबंधी उपायों से बढ़ती लागत का केवल एक हिस्सा ही कवर हो पाया था। अब लागत के दबाव को देखते हुए आगे भी कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है।

HUL भी बढ़ा सकती है कीमत

Hindustan Unilever Limited (HUL) भी अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतों में बदलाव पर विचार कर रही है। कंपनी की रणनीति में पोर्टफोलियो के अनुसार करीब 2 से 5% तक कीमतों में बदलाव शामिल हो सकता है।

Godrej, Dabur और Tata Consumer भी लागत पर नजर रख रहे

Godrej Consumer Products ने पहले ही कुछ उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की है, जबकि कंपनी फिलहाल कमोडिटी बाजार की स्थिति पर नजर रख रही है। Dabur India भी बढ़ती इनपुट कॉस्ट को लेकर चिंतित है।

Tata Consumer Products और Nestle India भी कच्चे माल, वैश्विक परिस्थितियों और उपभोक्ता मांग में संभावित बदलाव को देखते हुए अपनी रणनीति तय कर रही हैं।

ग्राहकों पर पड़ेगा सीधा असर

FMCG कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहकों की मांग को बनाए रखना है। सीधे दाम बढ़ाने पर बिक्री प्रभावित होने का खतरा रहता है, इसलिए कुछ कंपनियां पैकेट का वजन घटाने, प्रीमियम प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने और लागत कम करने जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल कर रही हैं।

इसका मतलब है कि आने वाले समय में ग्राहकों को समान कीमत में कम मात्रा या कुछ उत्पादों के लिए पहले से अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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