
रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल रविवार को आठवें दिन भी जारी रही। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे छात्र नेता की तबीयत रविवार तड़के करीब तीन बजे अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों की जांच में उनका ब्लड शुगर लेवल गिरकर 53 तक पहुंच गया। साथ ही डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर और छाती में इंफेक्शन की शिकायत भी पाई गई। मेडिकल टीम ने सलाइन चढ़ाई और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन महतो ने मांगें पूरी होने तक धरना स्थल छोड़ने से साफ इनकार कर दिया।
25 जुलाई से शुरू हुए इस आंदोलन में देवेंद्र नाथ महतो ने 2 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की थी। 5 अगस्त को सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद उन्होंने पानी ग्रहण किया था, लेकिन अन्न त्याग जारी रखा। अब सत्याग्रह का 16वां दिन और भूख हड़ताल का आठवां दिन चल रहा है। छात्रों की मुख्य मांगें हैं—14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा समेत विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, मामले की सीबीआई या ईडी से निष्पक्ष जांच कराना, परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी (टीडीपीएल/टीएसआर) की भूमिका की समीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
सरकार द्वारा गठित चार मंत्रियों की समिति (सुदिव्य कुमार, दीपिका पांडेय सिंह, चमरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव) ने रविवार को वीडियो कॉल पर देवेंद्र नाथ महतो से बात की। मंत्रियों ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और अनशन समाप्त करने की अपील की। सरकार की ओर से कुछ परीक्षाएं रद्द करने और वित्तीय लेन-देन की ईडी जांच कराने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन छात्र पक्ष लिखित आश्वासन पर अड़ा हुआ है। प्रतिनिधिमंडलों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन ठोस लिखित सहमति अभी तक नहीं बन पाई है।
महतो ने स्पष्ट कहा है कि मांगें लिखित रूप में पूरी होने तक भूख हड़ताल जारी रहेगी। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों और प्रशासन की नजर लगातार उन पर बनी हुई है। झारखंड के युवाओं का यह आंदोलन अब राज्य की भर्ती व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता का बड़ा मुद्दा बन चुका है।












