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दंतेवाड़ा के 4 बाल वैज्ञानिकों का राष्ट्रीय स्तर पर चयन, दिल्ली में दिखाएंगे अपने इनोवेटिव प्रोजेक्ट

छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों ने बढ़ाया मान, महुआ और पुआल संग्रहण मशीन सहित अनोखे प्रोजेक्ट भारत मंडपम में होंगे प्रदर्शित

दंतेवाड़ा/गीदम। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के चार स्कूली विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक सोच और नवाचार से जिले का नाम रोशन किया है। भारत सरकार की इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत इन विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ है। चयनित बाल वैज्ञानिक 12 से 15 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में अपने साइंस प्रोजेक्ट प्रदर्शित करेंगे।

इन विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट स्थानीय जरूरतों और रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान पर आधारित हैं। इनमें महुआ संग्रहण मशीन, पड़ी हुई पुआल इकट्ठा करने की मशीन और उपयोगी तकनीकी उपकरण शामिल हैं। यह उपलब्धि जिले में स्कूली स्तर पर विज्ञान, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इन चार विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट का हुआ चयन

इंस्पायर मानक योजना के जिला नोडल अधिकारी अमुजुरी विश्वनाथ के अनुसार, राज्य स्तरीय प्रदर्शनी एवं प्रोजेक्ट प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर दंतेवाड़ा के चार विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के लिए चुना गया है।

चयनित विद्यार्थियों और उनके प्रोजेक्ट की जानकारी इस प्रकार है:

  • यशवंत नाग — आस्था विद्या मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल, जावंगा। प्रोजेक्ट: ऑल इन वन वेटिंग, लिफ्टिंग एवं कैरिंग मशीन।
  • आयुष जैन — आस्था विद्या मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल, जावंगा। प्रोजेक्ट: यूनिवर्सल इलेक्ट्रो डेस्क।
  • अस्सो सोरी — एकलव्य मॉडल स्कूल, कटेकल्याण। प्रोजेक्ट: पड़ी पुआल संग्रहण मशीन।
  • गुलशन कुमार बरसे — शासकीय मिडिल स्कूल, बर्रेम, कुआकोंडा। प्रोजेक्ट: महुआ संग्रहण मशीन।

इन प्रोजेक्ट के माध्यम से विद्यार्थी अपनी कल्पनाशीलता और तकनीकी समझ का प्रदर्शन करेंगे। खास बात यह है कि पुआल और महुआ संग्रहण जैसे विषय स्थानीय जरूरतों से जुड़े हैं, जिनमें उपयोगी तकनीकी समाधान विकसित करने की संभावना है।

जिले में 175 नवाचार प्रोजेक्ट को मिली स्वीकृति

जिला नोडल अधिकारी के मुताबिक, इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत जिले में पिछले दो सत्रों के दौरान कुल 175 नवाचार प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए। सत्र 2023-24 में 92 और सत्र 2024-25 में 83 प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली।

योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को अपने विचारों का मॉडल या प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए प्रति विद्यार्थी 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल विचार प्रस्तुत करने तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक मॉडल बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

जिला स्तरीय प्रतियोगिता से 18 विद्यार्थी राज्य स्तर पर पहुंचे

जिले में जिला स्तरीय प्रदर्शनी एवं प्रोजेक्ट प्रतियोगिता ऑनलाइन आयोजित की गई थी। सत्र 2023-24 की प्रतियोगिता 15 से 17 जुलाई 2026 तक हुई। इसमें एनएमडीसी डीएवी पॉलीटेक्निक कॉलेज, दंतेवाड़ा के प्राध्यापक डॉ. अरुण कुमार साओ और डॉ. मोतीलाल साहू तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान भारत के प्रोजेक्ट एसोसिएट सुनील कुमार भास्कर ने निर्णायक की भूमिका निभाई। इस सत्र से 10 विद्यार्थियों को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चुना गया।

वहीं, सत्र 2024-25 की जिला स्तरीय प्रतियोगिता 21 और 22 जुलाई 2026 को आयोजित हुई। इसमें एनएमडीसी डीएवी पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. ऋतुराज चंद्राकर और के. पापा राव तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान भारत के जूनियर एसोसिएट सुब्रत कुमार बारीक ने प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किया। इस सत्र से आठ विद्यार्थियों का चयन राज्य स्तर के लिए हुआ।

इस तरह दोनों सत्रों से दंतेवाड़ा जिले के कुल 18 विद्यार्थी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता तक पहुंचे।

राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी जिले का शानदार प्रदर्शन

सत्र 2023-24 की राज्य स्तरीय प्रदर्शनी एवं प्रोजेक्ट प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों से कुल 213 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। इनमें से 20 विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित किया गया, जिनमें दंतेवाड़ा के चार विद्यार्थी शामिल रहे।

राष्ट्रीय स्तर पर चयन के बाद अब इन विद्यार्थियों को नई दिल्ली में अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। यह मंच उन्हें दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों के नवाचार देखने, अपने विचार साझा करने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करेगा।

क्या है इंस्पायर अवार्ड मानक योजना?

इंस्पायर अवार्ड मानक योजना का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करना है। योजना के माध्यम से बच्चों को अपने आसपास की समस्याओं की पहचान कर उनके व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया जाता है।

दंतेवाड़ा के विद्यार्थियों का राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय जरूरतों से जुड़े छोटे-छोटे विचार भी बड़े मंच तक पहुंच सकते हैं। अब भारत मंडपम में होने वाली प्रतियोगिता में इन बाल वैज्ञानिकों के प्रदर्शन पर जिले और प्रदेश की नजर रहेगी।

 

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