नैला में अक्षरधाम की तर्ज पर सजा मां दुर्गा का दरबार; जानिए रूट और पार्किंग व्यवस्था

43वें वर्ष भव्य पंडाल बना आकर्षण
जांजगीर-चांपा जिले के नैला में शारदीय नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है। यहां ऐतिहासिक दुर्गा पूजा आयोजन के 43वें वर्ष अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार किया गया है। मां दुर्गा के विशाल स्वरूप, आकर्षक सजावट और विशेष लाइटिंग के कारण यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना हुआ है। दर्शन के लिए आने वाले लोगों की सुविधा को देखते हुए पुलिस ने यातायात रूट और पार्किंग की व्यवस्था भी निर्धारित की है।
आयोजन समिति की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस वर्ष पंडाल की ऊंचाई लगभग 110 फीट और चौड़ाई 200 फीट रखी गई है। मां दुर्गा की प्रतिमा को भव्य स्वरूप देने के लिए कलाकार लंबे समय से काम कर रहे हैं। प्रतिमा को आकर्षक आभूषणों से सजाने की योजना है, जबकि पंडाल के अंदरूनी हिस्से को स्वर्णिम रंग और सजावटी कलाकृतियों से भव्य रूप दिया गया है।
पंडाल के निर्माण में बांस, सफेद कपड़े और थर्माकोल का इस्तेमाल किया गया है। इसे तैयार करने में कोलकाता के कारीगरों की भूमिका बताई गई है। प्रतिमा निर्माण में भठगांव के मूर्तिकार जुटे हैं, जबकि सजावट के लिए रायगढ़ के कलाकारों का सहयोग लिया जा रहा है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अलग-अलग स्थानीय रिपोर्टों में प्रतिमा की ऊंचाई 32 से 35 फीट तक बताई गई है। इसलिए अंतिम माप की आधिकारिक पुष्टि आयोजन समिति से करना उचित होगा।
इस बार खास क्या है? लाइटिंग, सजावट और छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की झलक
इस वर्ष के आयोजन में धार्मिक भव्यता के साथ जिले की पर्यटन पहचान को भी सामने लाने की तैयारी की गई है। आयोजन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, जांजगीर-चांपा जिले के पर्यटन स्थलों को आठ प्रोजेक्टर के माध्यम से लाइट एंड साउंड शो के जरिए दिखाने की योजना बनाई गई है। इससे श्रद्धालुओं को मां दुर्गा के दर्शन के साथ जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में जानने का अवसर भी मिल सकता है।
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, पंडाल लगभग दो एकड़ क्षेत्र में तैयार किया गया है। विशेष लाइटिंग, विशाल संरचना और सजावट इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।
43 साल से चली आ रही है नैला की दुर्गा पूजा की परंपरा
नैला का दुर्गोत्सव अपनी अलग-अलग मंदिरों से प्रेरित पंडाल थीम और भव्य आयोजन के लिए जाना जाता है। हर साल पंडाल को किसी प्रसिद्ध मंदिर या धार्मिक वास्तुकला की तर्ज पर तैयार करने की परंपरा रही है। इसी वजह से यहां का दुर्गोत्सव आसपास के जिलों के साथ दूसरे राज्यों के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करता है।
आयोजन समिति की खासियत यह बताई जाती है कि सदस्य मिलकर जिम्मेदारियां निभाते हैं। इस बार भी आयोजन को व्यवस्थित और भव्य बनाने के लिए निर्माण, सजावट, दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा पर ध्यान दिया गया है।
नैला दुर्गा पंडाल जाने से पहले जान लें रूट और पार्किंग
जांजगीर-चांपा पुलिस ने 10 अक्टूबर को नवरात्रि के लिए यातायात रूट और पार्किंग व्यवस्था की जानकारी जारी की थी। नैला में अग्रसेन भवन के सामने स्थित दुर्गा पंडाल में दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को निर्धारित पार्किंग स्थलों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
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नैला फाटक, बलौदा और सरखों की ओर से आने वाले: नैला दशहरा मैदान, बस स्टैंड और अन्य निर्धारित पार्किंग स्थल।
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बनारी और अकलतरा की ओर से आने वाले: शारदा चौक के आसपास निर्धारित पार्किंग स्थल।
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केरा रोड, खोखरा और सुकली की ओर से आने वाले: तहसील चौक स्थित सी-मार्ट परिसर, गणेश समिति ग्राउंड और तहसील कार्यालय परिसर।
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चांपा की ओर से आने वाले: जांजगीर के हाई स्कूल मैदान, डाइट स्कूल और अन्य निर्धारित पार्किंग स्थल।
पुलिस की सूचना के मुताबिक, कुछ मार्गों पर चारपहिया वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा और नैला-जांजगीर टाउन क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। निकलने से पहले स्थानीय यातायात पुलिस से मौजूदा रूट की पुष्टि करना उचित होगा।
श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा नैला का दुर्गोत्सव
नवरात्रि के शुरुआती दिनों में ही नैला के भव्य पंडाल को लेकर उत्सुकता है। अक्षरधाम की तर्ज पर तैयार की गई संरचना, विशाल मां दुर्गा की प्रतिमा, स्वर्णिम सजावट और विशेष प्रकाश व्यवस्था इस आयोजन को अलग पहचान देती है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए यातायात और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना जरूरी रहेगा।
नोट: यह खबर 12 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों और आयोजन संबंधी जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। प्रतिमा और पंडाल की ऊंचाई के आंकड़ों में रिपोर्टों के बीच अंतर है।












