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छत्तीसगढ़ में बारिश के बाद फसलों पर संकट, धान से लेकर सब्जियों तक कीट और रोग का खतरा;

किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

कृषि समाचार | छत्तीसगढ़ | 12 अक्टूबर 2026 छत्तीसगढ़ में सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई भारी बारिश का असर अब खेतों में दिखाई देने लगा है। रायपुर समेत कई जिलों में लगातार बारिश और खेतों में पानी भरने से सब्जियों, फलदार पौधों और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। अक्टूबर में मानसून की विदाई का दौर शुरू होने के साथ मौसम में नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और बादलों की आवाजाही फसलों में कीटों तथा फफूंदजनित बीमारियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकती है।Chhattisgarh Waterlogging in many parts of Raipur | रायपुर के कई इलाकों में जलभराव, सड़कें डूबी, VIDEO: घरों में घुसा नाली का गंदा पानी; नगर निगम की तैयारियों की खुली पोल - Raipur News | Dainik Bhaskar

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े कृषि वैज्ञानिक डॉ. घनश्याम साहू ने किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। हालांकि, सभी जिलों में नुकसान की मात्रा एक जैसी नहीं है। वास्तविक नुकसान का आकलन स्थानीय खेतों की स्थिति और कृषि विभाग के सर्वेक्षण के आधार पर ही किया जा सकता है।

डॉ. घनश्याम साहू, कृषि वैज्ञानिक, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने बताया:

“मानसून की विदाई और ठंड की शुरुआत के बीच मौसम में बदलाव होता है। इस दौरान वातावरण में नमी, बादलों की स्थिति और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण फसलों में कीटों और बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है।”

फल और सब्जियों में सड़न को लेकर कृषि वैज्ञानिक की सलाह:

“लगातार बारिश के बाद खेतों में पानी जमा रहने से पपीते में फल सड़ने, अनार में पत्तियों पर धब्बे पड़ने और दूसरी फलदार फसलों में भी रोगों की समस्या देखने को मिल सकती है। किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उचित उपचार करना चाहिए।”

कीट नियंत्रण को लेकर विशेषज्ञ की सलाह:

“अधिक नमी और बदलते मौसम में चूसक कीटों सहित विभिन्न कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। किसानों को फसल के अनुसार उचित कीटनाशक या नीम आधारित उत्पादों का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए।”

फफूंदजनित बीमारियों पर विशेषज्ञ की राय:

“खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से फसलों में रोगों का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को सबसे पहले खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और रोग के लक्षणों की पहचान करने पर ध्यान देना चाहिए। दवाओं का प्रयोग फसल और बीमारी के अनुसार ही करना चाहिए।”

छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का साइड इफेक्ट, सब्जियों की फसल को ज्यादा नुकसान

सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई बारिश के बाद छत्तीसगढ़ के कई कृषि क्षेत्रों में जलभराव की समस्या सामने आई। खेतों में पानी जमा रहने से टमाटर, मिर्च, खीरा, बरबटी, लौकी, लाल भाजी और पालक जैसी सब्जियों की फसल प्रभावित हुई। अत्यधिक नमी के कारण पौधों की जड़ें गलने, पत्तियां खराब होने और फूल व छोटे फल गिरने की समस्या बढ़ सकती है।Balrampur paddy and vegetable crops badly affected due to unseasonal rain Chhattisgarh ann | Balrampur: मिचौंग तूफान से बलरामपुर में हरी सब्जी की फसलों को नुकसान, 5 हजार हेक्टेयर खेत हुए प्रभावित

रायपुर के आसपास भाठागांव, काठाडीह और अभनपुर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सब्जी उत्पादकों को नुकसान की खबरें सामने आई थीं। खेतों से पानी नहीं निकलने के कारण किसानों को बची हुई फसल को सुरक्षित रखने में परेशानी हुई। उत्पादन घटने पर बाजार में सब्जियों की आवक और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।अंबिकापुर में लगातार 12 घंटे बरसा 'मौसम का कहर' रिकॉर्ड 172 मिमी बारिश, कई इलाकों में भरा पानी, जनजीवन अस्त-व्यस्त

बस्तर में धान की फसल पर भी पड़ी बारिश और बाढ़ की मार

सितंबर के अंतिम दिनों में बस्तर संभाग में भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात के कारण धान की फसल प्रभावित होने की खबर सामने आई थी। किसान इंडिया की 4 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, बस्तर में लगभग 4,000 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित हुई थी और 300 से अधिक गांवों पर बाढ़ का असर पड़ा था। खेतों में लंबे समय तक पानी रहने और तेज बहाव से धान के पौधों के गिरने तथा फसल खराब होने का खतरा बढ़ा।

धान की फसल में नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि खेत में कितनी देर तक पानी जमा रहा, पौधे किस अवस्था में थे और पानी निकलने के बाद मौसम कैसा रहा। ऐसे में किसानों को खेतों का निरीक्षण करके प्रभावित हिस्सों का आकलन करना चाहिए।

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया, मौसम बदलने पर क्यों बढ़ती हैं बीमारियां?

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. घनश्याम साहू के हवाले से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मानसून की विदाई, तापमान में बदलाव और वातावरण में नमी का उतार-चढ़ाव फसलों में कीटों तथा रोगों के प्रकोप को बढ़ा सकता है।

इस दौरान अलग-अलग फसलों में अलग तरह की समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।

  • पपीता: अधिक नमी और जलभराव से फल तथा जड़ों में सड़न का खतरा।

  • अनार: पत्तियों पर धब्बे और फफूंदजनित रोग की संभावना।

  • केला, आम और अमरूद: पत्तियों पर धब्बे, सड़न और कीटों का प्रकोप।

  • टमाटर और मिर्च: जड़ों में सड़न, पत्तियों के रोग और फूल-फल गिरने की समस्या।

  • धान: लंबे समय तक जलभराव के बाद पौधों के गिरने, पत्तियों पर रोग के लक्षण और फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा।

  • मूंग और उड़द: अधिक नमी के कारण फफूंदजनित रोग और कीटों की समस्या बढ़ सकती है।

इनमें से कौन-सा रोग किसी खेत में मौजूद है, इसकी पुष्टि लक्षणों और जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की जांच से करनी चाहिए।

किसानों को क्या करना चाहिए? जानिए बचाव के उपाय

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बारिश के बाद फसलों को बचाने के लिए सबसे जरूरी है खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था करना और रोग के शुरुआती लक्षणों को पहचानना। किसान निम्न उपाय अपना सकते हैं।

1. खेत से अतिरिक्त पानी निकालें

सब्जियों, दलहन और फलदार पौधों के आसपास पानी जमा न रहने दें। जलनिकासी के लिए नालियां साफ रखें। हालांकि, पानी निकालते समय मिट्टी का कटाव और पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचने से बचाएं।

2. कीटों और बीमारियों की नियमित जांच करें

पत्तियों के नीचे, तने, जड़ों और फलों पर धब्बे, सड़न, चिपचिपापन या कीट दिखाई देने पर प्रभावित पौधों की पहचान करें। केवल बारिश होने के आधार पर कीटनाशक का छिड़काव न करें।

3. नीम आधारित उत्पादों का इस्तेमाल सावधानी से करें

कुछ कीटों के नियंत्रण में नीम आधारित उत्पाद उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन उत्पाद का चुनाव फसल और कीट के अनुसार करें तथा लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करें।

4. फफूंदजनित रोग के लिए सही दवा चुनें

कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या अन्य फफूंदनाशक केवल तभी इस्तेमाल करें, जब संबंधित फसल और बीमारी के लिए उसका उपयोग स्वीकृत हो। सही मात्रा और प्रतीक्षा अवधि के लिए कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग से सलाह लें।

5. धान और सब्जियों में अलग-अलग प्रबंधन अपनाएं

धान, सब्जियों, फलदार पौधों और दलहन की बीमारियां अलग होती हैं। इसलिए एक ही दवा सभी फसलों पर इस्तेमाल करना उचित नहीं है। गंभीर प्रकोप में कृषि विस्तार अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।

12 अक्टूबर 2026 का मौसम अपडेट: रायपुर में फिलहाल बारिश से राहत

Budha Talab Raipur - Tourist attraction - Raipur - Chhattisgarh | Yappe.in

रायपुर का आज का मौसम  32°C / 21°C

अधिकतम / न्यूनतम तापमान

आसमान साफ रहने का अनुमान

NDTV के 12 अक्टूबर के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार रायपुर में दिन का अधिकतम तापमान लगभग 32°C और न्यूनतम तापमान 21°C रहने का अनुमान है।

मौसम विभाग से जुड़ी हालिया रिपोर्टों में 12 से 14 अक्टूबर के दौरान छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं की संभावना का उल्लेख किया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में भारी बारिश होगी। जिलेवार चेतावनी और वर्षा की संभावना अलग-अलग हो सकती है।

किसानों को सलाह है कि मौसम में बदलाव होने पर खेतों में कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव करने से पहले स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देखें। तेज हवा, बारिश या बिजली की आशंका होने पर छिड़काव टालें।

क्या आगे सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं?

बारिश से सब्जियों की फसल खराब होने और आवक कम होने पर कीमतें बढ़ सकती हैं। सितंबर के अंतिम दिनों में प्रकाशित स्थानीय रिपोर्टों में टमाटर के दाम लगभग 35 से 40 रुपये प्रति किलो बताए गए थे। यह पुराना बाजार भाव है, 12 अक्टूबर का सत्यापित भाव नहीं।

आने वाले दिनों में सब्जियों की कीमतों पर असर इस बात से तय होगा कि प्रभावित क्षेत्रों में कितनी फसल बची है, नई फसल कितनी जल्दी बाजार में पहुंचती है और परिवहन व्यवस्था कैसी रहती है।

किसानों के लिए जरूरी सूचना

किसानों को अपने खेतों में हुए नुकसान की तस्वीरें, फसल का विवरण और प्रभावित क्षेत्र की जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। यदि फसल को भारी नुकसान हुआ है, तो स्थानीय कृषि विभाग, राजस्व विभाग या संबंधित बीमा कंपनी से सर्वे और सहायता की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लें। मुआवजे की पात्रता और सहायता की राशि संबंधित सरकारी नियमों तथा सत्यापित नुकसान पर निर्भर करेगी।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ में सितंबर के अंतिम सप्ताह की भारी बारिश का असर सब्जियों और बस्तर की धान की फसल पर सामने आया है। अब अक्टूबर में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क होने के बावजूद खेतों में बची नमी, जलभराव और तापमान में बदलाव के कारण फसलों की निगरानी जरूरी है। समय पर जलनिकासी, सही रोग पहचान और कृषि विशेषज्ञ की सलाह से किसानों को आगे होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

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