chhattisgarhCrimeLatest

गोकुल डेयरी में चुनाव के बाद क्यों बदले नियम? राहुल गांधी के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई

गोकुल डेयरी में बहुमत का गणित बदलने की तैयारी? चार नए निदेशकों को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित गोकुल डेयरी को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। सहकारी संस्था के चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल को बहुमत मिलने के बाद अब सरकारी निदेशकों की नियुक्ति का मुद्दा विवाद का कारण बन गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार नियमों में बदलाव कर निर्वाचित बोर्ड का समीकरण बदलना चाहती है। वहीं, विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल को मिली थी बढ़त

कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ को गोकुल डेयरी के नाम से जाना जाता है। इसके निदेशक मंडल के चुनाव 19 अक्टूबर को हुए थे। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के अनुसार, चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने 25 में से 13 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिली थीं।

इस परिणाम के बाद कांग्रेस समर्थित पैनल को एक सीट के अंतर से बहुमत मिला। हालांकि, अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान महायुति समर्थित निदेशकों की अनुपस्थिति के चलते प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को दोबारा चुनाव कराने का निर्देश दिया।

सरकार के एक फैसले ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

गोकुल डेयरी का विवाद उस समय और बढ़ गया, जब महाराष्ट्र कैबिनेट ने 500 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं में मतदान का अधिकार रखने वाले सरकारी मनोनीत निदेशकों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

विपक्ष का आरोप है कि इस फैसले के जरिए गोकुल डेयरी में चार अतिरिक्त निदेशकों को शामिल करने की कोशिश की जा रही है। इससे निदेशक मंडल की संख्या 12 से बढ़ाकर 16 किए जाने की चर्चा है। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव में बहुमत नहीं मिलने के बाद सत्ता का समीकरण बदलने के लिए यह रास्ता अपनाया जा रहा है।

राहुल गांधी ने इसे बताया मतदाताओं के साथ धोखा

राहुल गांधी ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की सोशल मीडिया पोस्ट साझा करते हुए महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि दूध उत्पादकों ने मतदान के जरिए अपना फैसला सुना दिया था, लेकिन अब चुनाव के बाद नियमों में बदलाव कर उस जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम को दूध उत्पादकों के मताधिकार के साथ खिलवाड़ बताया और भाजपा पर सत्ता हासिल करने के लिए नियम बदलने का आरोप लगाया।

रोहित पवार ने भी सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने भी इस मामले में विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि करीब 5.5 लाख मतदाताओं के फैसले को नजरअंदाज कर मनोनीत सदस्यों को शामिल करने का कदम उचित नहीं है।

उन्होंने लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों से अध्यक्ष पद के चुनाव के दिन गोकुल डेयरी का घेराव करने की अपील की। उनके मुताबिक, यह विवाद केवल कोल्हापुर या किसी एक राजनीतिक नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि सहकारी संस्थाओं में मतदाताओं के फैसले के सम्मान से जुड़ा है।

अब कानूनी लड़ाई की तैयारी में कांग्रेस

महाराष्ट्र कैबिनेट के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि चुनाव के बाद सरकारी मनोनयन के जरिए निर्वाचित निदेशक मंडल की स्थिति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

अब इस पूरे विवाद में 10 नवंबर को होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव और संभावित कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सरकारी मनोनयन का फैसला गोकुल डेयरी के सत्ता समीकरण पर कितना असर डालता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button