
गरीब मजदूर परिवारों को एडवांस रकम और कर्ज के जाल में फंसाकर दूसरे राज्यों में भेजने का पुलिस का दावा, 1.48 करोड़ रुपये नकद समेत रजिस्टर, बैंक दस्तावेज और मोबाइल जब्त
महासमुंद, छत्तीसगढ़। महासमुंद जिले में पुलिस ने मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और बाल मजदूरी से जुड़े कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर परिवारों को एडवांस रकम देकर बाद में कर्ज के दबाव में दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों पर काम के लिए भेजा जाता था। मामले की जांच उस समय शुरू हुई, जब 15 वर्षीय नाबालिग के गर्भवती होने की जानकारी अस्पताल के मेमो के जरिए पुलिस तक पहुंची। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को मजदूरों की आवाजाही से जुड़े एक बड़े कथित नेटवर्क के सुराग मिले। (Naidunia)
अस्पताल के मेमो से शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार, 21 सितंबर 2026 को एक अस्पताल से मिले मेमो में नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। प्रारंभिक जांच में पता चला कि नाबालिग अपने परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के एक ईंट भट्ठे पर गई थी। पुलिस के अनुसार, वहां उसके शारीरिक शोषण का आरोप सामने आया। इसी घटना की जांच के दौरान पुलिस को मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजने वाले कथित नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। (UNA – United News of Asia)
पुलिस का आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पहले एडवांस रकम दी जाती थी। इसके बाद उन्हें उस रकम को चुकाने के नाम पर दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों में काम करने के लिए भेजा जाता था। जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि कुछ मजदूरों पर कर्ज और काम का दबाव बनाया जाता था।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 10 ठिकानों पर एक साथ दबिश
मामले की गंभीरता सामने आने के बाद महासमुंद पुलिस ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में नेटवर्क से जुड़े करीब 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई में पुलिस ने 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नकद बरामद किए। इसके अलावा मजदूरों के पलायन से जुड़े रजिस्टर और डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्गेज संबंधी दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन भी जब्त की गई।
किन राज्यों तक पहुंची थी मजदूरों की कड़ी?
पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच में उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और गुजरात सहित अन्य राज्यों तक मजदूरों की आवाजाही से जुड़े सुराग मिलने की बात सामने आई है। हालांकि इस नेटवर्क से जुड़े मजदूरों की वास्तविक संख्या और पूरी गतिविधि की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। (Naidunia)
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की दस्तावेजी जांच में यह दावा सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग हर साल बड़ी संख्या में मजदूरों को अलग-अलग राज्यों के ईंट भट्ठों तक भेजते थे। यह दावा अभी पुलिस जांच और जब्त दस्तावेजों की पड़ताल के दायरे में है।
पांच आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मुकेश चंद्राकर, नसीम बानो उर्फ लता सबर, मनीष गुप्ता, नंदकुमार मोहंती उर्फ नंदू और पीयूष अग्रवाल शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, मुकेश चंद्राकर को कथित नेटवर्क का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, मुकेश चंद्राकर और नसीम बानो ओडिशा के नुआपाड़ा क्षेत्र से जुड़े हैं, जबकि अन्य आरोपी महासमुंद जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के रहने वाले बताए गए हैं। आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर पेश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
खल्लारी थाने में दर्ज हुआ मामला
इस मामले में महासमुंद जिले के खल्लारी थाना में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की विवेचना के दौरान भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ संगठित अपराध से संबंधित धारा 111 भी जोड़ी है।
अब मोबाइल और बैंक खातों से खुलेगा पूरा नेटवर्क
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खातों और बरामद रजिस्टर-डायरियों की जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि मजदूरों को कौन जोड़ता था, एडवांस रकम कौन देता था, उन्हें दूसरे राज्यों तक कौन पहुंचाता था और किन ईंट भट्ठों पर उन्हें भेजा जाता था।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस कथित नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और अब तक कितने परिवारों को दूसरे राज्यों में भेजा गया।
नाबालिग से जुड़े मामले ने खोली बड़ी जांच
इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 15 वर्षीय नाबालिग से जुड़ी घटना है। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, नाबालिग अपने परिवार के साथ मजदूरी के लिए उत्तर प्रदेश पहुंची थी और वहीं उसके शारीरिक शोषण का आरोप सामने आया। उसके गर्भवती होने की जानकारी अस्पताल तक पहुंचने के बाद मामला पुलिस की जांच में आया और इसी जांच ने मजदूरों की कथित तस्करी तथा बंधुआ मजदूरी के नेटवर्क की ओर पुलिस का ध्यान खींचा।
मामले में आगे की कार्रवाई अब जब्त दस्तावेजों, मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन और कॉल रिकॉर्ड की जांच पर निर्भर है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था, कितने मजदूर इससे जुड़े थे और इसके पीछे और कौन-कौन लोग शामिल थे।
महत्वपूर्ण: नाबालिग और अन्य पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।












