जब विमान से पूरी दुनिया का लगाया गया चक्कर, 175 दिनों तक चली ऐतिहासिक हवाई यात्रा

28 सितंबर 1924 को अमेरिकी सेना के विमानों ने पहली बार हवाई जहाज से पूरी दुनिया का चक्कर लगाने का अभियान पूरा किया। यह उपलब्धि विमानन इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनी।
नई दिल्ली। आज से 102 साल पहले, 28 सितंबर 1924 को इंसानी उड़ान के इतिहास में एक ऐसा कारनामा हुआ जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। अमेरिकी सेना के विमानों ने दुनिया की पहली सफल हवाई विश्व-परिक्रमा पूरी की। उस दौर में विमानन तकनीक आज की तरह विकसित नहीं थी और लंबी दूरी की उड़ान अपने आप में बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती थी।
इस ऐतिहासिक अभियान की शुरुआत 6 अप्रैल 1924 को सिएटल से हुई थी। अमेरिकी सेना के एयर सर्विस ने दुनिया का चक्कर लगाने के लिए चार विमानों को अभियान में शामिल किया था। इन विमानों के नाम सिएटल, शिकागो, बोस्टन और न्यू ऑरलियन्स रखे गए थे।
चार विमानों ने शुरू किया था सफर
अभियान के दौरान विमानों को प्रशांत और अटलांटिक महासागर के ऊपर लंबी दूरी तय करनी थी। उस समय विमानों की क्षमता सीमित थी, इसलिए यात्रा के दौरान कई जगहों पर ईंधन, मरम्मत और अन्य तकनीकी जरूरतों के लिए रुकना पड़ा।
सफर के दौरान सिएटल नाम का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, लेकिन उसके चालक दल को बचा लिया गया। इसके बाद अभियान में शामिल बाकी विमानों ने यात्रा जारी रखी।
समुद्र पार करने के लिए जहाजों की भी मदद
उस समय विमानों के लिए समुद्र के ऊपर लगातार लंबी दूरी तय करना आसान नहीं था। इसलिए इस अभियान में अमेरिकी नौसेना के जहाजों और अन्य सहायता का भी इस्तेमाल किया गया। विमान जहां उतर सकते थे, वहां लैंडिंग की गई और कठिन समुद्री हिस्सों में अभियान को आगे बढ़ाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई।
175 दिनों में पूरा हुआ ऐतिहासिक अभियान
लगभग 175 दिनों तक चले इस अभियान के बाद 28 सितंबर 1924 को अमेरिकी सेना के विमान अपने विश्व-परिक्रमा अभियान को पूरा करने में सफल हुए। इस यात्रा ने यह साबित कर दिया कि विमानों के जरिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ना अब केवल कल्पना नहीं रहा।
इस उपलब्धि ने आगे लंबी दूरी की विमान यात्राओं और वैश्विक विमानन के विकास के लिए नई संभावनाएं पैदा कीं।
विमानन इतिहास में क्यों खास है यह दिन?
आज कुछ घंटों में एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंचना सामान्य बात है, लेकिन 1924 में पूरी दुनिया का हवाई चक्कर लगाना तकनीकी और मानवीय दोनों दृष्टि से बड़ी चुनौती थी। 28 सितंबर 1924 की यह उपलब्धि उस दौर की विमानन तकनीक, पायलटों के साहस और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबी दूरी की उड़ान की संभावनाओं का प्रतीक बन गई।
यही वजह है कि 28 सितंबर विमानन इतिहास में एक ऐसी तारीख के रूप में दर्ज है, जब इंसान ने पहली बार सफलतापूर्वक आसमान के रास्ते पूरी दुनिया का चक्कर लगाने का अभियान पूरा किया।












