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अंग: नागालैंड की अनसुनी कहानी ने टोरंटो में जीता बड़ा सम्मान, अब ऑस्कर की राह पर फिल्म

तेजा रियो के निर्देशन में बनी ‘अंग’ ने 2026 टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्लेटफॉर्म प्राइज जीता है। कोन्याक भाषा में बनी यह फिल्म नागालैंड की एक विलुप्त होती सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को सामने लाती है।

मनोरंजन डेस्क। नागालैंड की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘अंग’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सिनेमा का ध्यान अपनी ओर खींचा है। फिल्म ने 2026 टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) की प्लेटफॉर्म प्रतियोगिता में प्लेटफॉर्म प्राइज अपने नाम किया है। इस उपलब्धि के बाद फिल्म की ऑस्कर की दौड़ को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

टोरंटो में ‘अंग’ ने बनाई खास पहचान

‘अंग’ को टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में उसकी कहानी और सिनेमाई प्रस्तुति के लिए सम्मान मिला। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी पृष्ठभूमि है, जिसमें नागालैंड के कोन्याक समुदाय और उससे जुड़ी संस्कृति को केंद्र में रखा गया है।

फिल्म कोन्याक भाषा में बनाई गई है। भारतीय सिनेमा में इस भाषा में बनने वाली फिल्मों की संख्या काफी कम रही है। ऐसे में ‘अंग’ का अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में सम्मान हासिल करना क्षेत्रीय भाषा और पूर्वोत्तर भारत की कहानियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

ऑस्कर से क्या है कनेक्शन?

टोरंटो फिल्म फेस्टिवल की प्लेटफॉर्म प्रतियोगिता में पुरस्कार हासिल करने के बाद ‘अंग’ की ऑस्कर को लेकर संभावनाओं पर चर्चा शुरू हुई है। हालांकि, प्लेटफॉर्म प्राइज जीतना अपने आप में ऑस्कर के लिए आधिकारिक चयन की गारंटी नहीं है। फिल्म का ऑस्कर तक पहुंचना संबंधित नियमों और आधिकारिक चयन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

पहले शॉर्ट फिल्म के रूप में बनी थी ‘अंग’

‘अंग’ की शुरुआत एक शॉर्ट फिल्म के रूप में हुई थी। बाद में इसे फीचर फिल्म के रूप में विकसित किया गया। फिल्म की कहानी नागालैंड की उस सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को सामने लाने की कोशिश करती है, जो समय के साथ बदल रही है और जिसके कई पहलू धीरे-धीरे विलुप्त होने की स्थिति में हैं।

कौन हैं निर्देशक तेजा रियो?

फिल्म का निर्देशन तेजा रियो ने किया है। वह नागालैंड से आने वाले फिल्ममेकर हैं और उन्होंने यूके स्थित नेशनल फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल से पढ़ाई की है। इससे पहले वह ‘डिसोसिएट’, ‘चेकपोस्ट’ और ‘एडे ऑन ए संडे’ जैसी शॉर्ट फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं।

रियो के काम में पूर्वोत्तर भारत की कहानियों और वहां की स्थानीय आवाजों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने पर जोर दिखाई देता है। ‘अंग’ इसी दिशा में उनका फीचर फिल्म स्तर पर बड़ा कदम है।

टोरंटो में प्लेटफॉर्म प्राइज जीतने के बाद ‘अंग’ ने नागालैंड की स्थानीय भाषा, संस्कृति और कहानी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि फिल्म आगे ऑस्कर की आधिकारिक चयन प्रक्रिया में किस तरह आगे बढ़ती है।

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