समुद्र के अंदर भी सूरज की रोशनी से बनेगी बिजली, चीन के वैज्ञानिकों का 10 मीटर गहराई तक सफल प्रयोग

युन्नान यूनिवर्सिटी की टीम ने पेरोव्स्काइट सोलर सेल को समुद्र में उतारकर बैटरी चार्ज की और एलईडी पैनल जलाया, कम रोशनी में भी दिखी तकनीक की क्षमता
चीन के वैज्ञानिकों ने समुद्र के भीतर सौर ऊर्जा पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग किया है। युन्नान यूनिवर्सिटी की टीम ने दक्षिण चीन सागर में 10 मीटर की गहराई तक पेरोव्स्काइट आधारित फोटोवोल्टिक सिस्टम का परीक्षण किया। वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र के भीतर जहां सूर्य की रोशनी काफी कम हो जाती है, वहां भी इस तकनीक से उपयोगी मात्रा में बिजली हासिल की जा सकती है।
समुद्र की गहराई बढ़ने के साथ सूर्य का प्रकाश तेजी से कम होता जाता है। करीब 10 मीटर की गहराई पर सतह की लगभग 10 प्रतिशत रोशनी ही पहुंचती है। लाल रंग की रोशनी पानी में अधिक अवशोषित हो जाती है और नीला-हरा प्रकाश अपेक्षाकृत ज्यादा गहराई तक पहुंचता है। इसी विशेषता को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने लेड हैलाइड पेरोव्स्काइट सोलर सेल विकसित किया, जिसका बैंड गैप करीब 1.96 eV है।
प्रयोगशाला परीक्षण में छोटे आकार के सेल ने 34.71 प्रतिशत पावर कन्वर्जन एफिशिएंसी हासिल की, जबकि बड़े 28.79 वर्ग सेंटीमीटर मॉड्यूल ने 29.40 प्रतिशत दक्षता दिखाई। इसके बाद वास्तविक समुद्री पानी में भी परीक्षण किया गया।
वैज्ञानिकों ने सेल को अंडरवाटर रोबोट से जोड़कर 2, 6 और 10 मीटर की गहराई पर उतारा। दो घंटे के परीक्षण में सिस्टम ने 2 मीटर पर 1,416 mWh, 6 मीटर पर 752 mWh और 10 मीटर पर 324 mWh ऊर्जा स्टोर की। इसी ऊर्जा से लिथियम-आयन बैटरियां चार्ज की गईं और एलईडी पैनल भी सफलतापूर्वक जलाया गया।
समुद्री पानी में पेरोव्स्काइट के खराब होने और लेड के संभावित रिसाव जैसी चुनौतियों को देखते हुए वैज्ञानिकों ने विशेष सुरक्षा पैकेजिंग का इस्तेमाल किया। ब्यूटाइल रबर, कवर ग्लास और पारदर्शी एपॉक्सी रेजिन की कई परतों ने सेल को पानी, दबाव और जंग से बचाने में मदद की।
सिम्युलेटेड समुद्री परिस्थितियों में 1,000 घंटे तक परीक्षण के बाद भी सेल ने अपनी शुरुआती दक्षता का 99.58 प्रतिशत बनाए रखा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 25 डिग्री सेल्सियस पर निर्धारित परिस्थितियों में इसकी T80 लाइफ करीब 48,094 घंटे हो सकती है।
इस प्रयोग से पानी के अंदर काम करने वाले सेंसर, कैमरा, डिटेक्टर, संचार उपकरण, अंडरवाटर रोबोट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को लंबे समय तक ऊर्जा देने की संभावनाएं सामने आई हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले समुद्री परिस्थितियों में लंबे समय तक स्थिरता, सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे पहलुओं पर और परीक्षण जरूरी होंगे।












