
11,200 मेगावाट के बांध पर क्यों भड़के लोग?
अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना को लेकर स्थानीय समुदायों और सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। 23 अक्टूबर 2026 को विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कम से कम 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
प्रस्तावित बांध अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी पर बनाया जाना है। इसकी प्रस्तावित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 11,200 मेगावाट है। परियोजना का विकास राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) कर रहा है।
सरकार इस परियोजना को बिजली उत्पादन, जल सुरक्षा और चीन की ओर से नदी के ऊपरी हिस्से में प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना के मद्देनजर महत्वपूर्ण मानती है। दूसरी ओर, स्थानीय आदिवासी समुदायों को आशंका है कि बांध बनने से उनके पुश्तैनी गांव, कृषि भूमि और पारंपरिक जीवन प्रभावित हो सकते हैं।
बांध का विरोध क्यों कर रहे हैं स्थानीय लोग?
विरोध कर रहे संगठनों और स्थानीय लोगों की प्रमुख चिंताएं ये हैं:
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गांवों के डूबने का डर: प्रदर्शनकारियों का दावा है कि 27 पुश्तैनी गांव पूरी तरह डूब सकते हैं और 40 से 50 अन्य गांव भी प्रभावित हो सकते हैं।
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जमीन और आजीविका का संकट: कृषि भूमि और नदी पर निर्भर जीवन प्रभावित होने की आशंका है।
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पर्यावरण को नुकसान: हिमालय के भूकंप-संवेदनशील क्षेत्र में इतनी बड़ी परियोजना के संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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स्थानीय सहमति की मांग: विरोध करने वाले संगठन चाहते हैं कि सर्वेक्षण और परियोजना से जुड़े फैसलों में प्रभावित समुदायों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।
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सुरक्षा बलों की तैनाती: कुछ स्थानीय संगठनों ने क्षेत्र में सुरक्षा बलों की मौजूदगी और कार्यकर्ताओं की हिरासत पर भी आपत्ति जताई है।
प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?
23 अक्टूबर को सियांग घाटी और ईस्ट सियांग जिले के पासिगाट क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ गई। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और अवरोधक तोड़ने की कोशिश की। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
इसके बाद पुलिस स्टेशन और एनएचपीसी के एक कार्यालय में आगजनी तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। रॉयटर्स के मुताबिक, 27 अक्टूबर तक कम से कम 21 गिरफ्तारियां हो चुकी थीं और प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया था।
सियांग नदी तिब्बत से भारत में प्रवेश करती है। तिब्बत में इसे यारलुंग त्सांगपो के नाम से जाना जाता है। चीन ने दिसंबर 2024 में इस नदी के ऊपरी हिस्से में विशाल जलविद्युत परियोजना बनाने की योजना घोषित की थी।
भारत को चिंता है कि नदी के ऊपरी हिस्से में चीन की बड़ी परियोजना से जल प्रवाह और सुरक्षा से जुड़े सवाल पैदा हो सकते हैं। इसी संदर्भ में भारत की प्रस्तावित सियांग परियोजना को रणनीतिक महत्व दिया जा रहा है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि बांध के सभी तकनीकी और पर्यावरणीय प्रभाव पहले से तय हैं।
सरकार का क्या कहना है?
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने परियोजना को लेकर फैली आशंकाओं को दूर करने के लिए बातचीत, पारदर्शिता और सही जानकारी पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि फिलहाल पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया परियोजना की तकनीकी संभावनाओं का आकलन है, न कि निर्माण की अंतिम मंजूरी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि परियोजना को लेकर लोगों की चिंताओं को सुना जाएगा। हालांकि, स्थानीय विरोध के बीच बातचीत और सहमति बनाने की चुनौती बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस विवाद में तीन बड़े सवाल अहम हैं—क्या सरकार स्थानीय समुदायों की चिंताओं का समाधान कर पाएगी, क्या प्रस्तावित बांध के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का पर्याप्त आकलन होगा, और क्या परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले प्रभावित लोगों का भरोसा जीता जा सकेगा?
यह मामला केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसमें आदिवासी समुदायों के अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय जल सुरक्षा और स्थानीय लोगों की सहमति जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हैं।












