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कामधेनु विश्वविद्यालय भर्ती विवाद में राजभवन का बड़ा हस्तक्षेप, शैक्षणिक पदों की भर्ती और इंटरव्यू अगले आदेश तक स्थगित

दुर्ग के अंजोरा स्थित दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में भर्ती और निर्माण कार्यों से जुड़ी शिकायतों पर राज्यपाल सचिवालय ने लिया संज्ञान

दुर्ग। अंजोरा स्थित दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच राजभवन ने हस्तक्षेप किया है। राज्यपाल सचिवालय की ओर से 1 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों पर भर्ती, नियुक्ति और साक्षात्कार की पूरी प्रक्रिया को अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है।

राज्यपाल सचिवालय के उप सचिव निषिध साहू की ओर से जारी आदेश में विश्वविद्यालय के भवन निर्माण एवं रखरखाव कार्यों में कथित अनियमितताओं और शैक्षणिक पदों पर भर्ती से संबंधित शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। आदेश के मुताबिक, इन शिकायतों को राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने संज्ञान में लिया है और संबंधित जांच की प्रगति का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

भर्ती प्रक्रिया पर पहले से उठ रहे थे सवाल

कामधेनु विश्वविद्यालय में विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं। शिकायतों में वेतन संरक्षण, स्थानीय शिक्षकों की पदोन्नति, आरक्षण एवं रोस्टर निर्धारण, पहले से निर्धारित रोस्टर में बदलाव और बैकलॉग पदों पर भर्ती जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

इसके अलावा विभागवार पदों के निर्धारण, कार्यकारिणी परिषद की मंजूरी के बिना भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने तथा स्वीकृत सेटअप से अधिक पदों के लिए विज्ञापन जारी किए जाने संबंधी आरोप भी लगाए गए थे।

इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग के बीच अब राजभवन ने भर्ती प्रक्रिया को अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है।

मंत्री की नोटशीट के बाद बढ़ा था मामला

इससे पहले कृषि विकास, किसान कल्याण एवं पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम की नोटशीट भी सामने आई थी। इसमें विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच कराने और जांच पूरी होने तक आगामी भर्ती प्रक्रिया स्थगित रखने के निर्देश दिए गए थे।

मंत्री स्तर पर निर्देश सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद और गंभीर हो गया था।

विधायक ने राज्यपाल से की थी शिकायत

मामले में स्थानीय विधायक ने 19 अगस्त 2026 को राज्यपाल को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। पत्र में विधानसभा क्षेत्र के युवाओं एवं अन्य लोगों से प्राप्त शिकायतों का हवाला देते हुए भर्ती प्रक्रिया को राज्य लोक सेवा आयोग या किसी अन्य प्रदेश स्तरीय एजेंसी के माध्यम से कराने का अनुरोध किया गया था।

अब जांच के बाद आगे की स्थिति होगी साफ

राजभवन के ताजा आदेश के बाद विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों पर भर्ती, नियुक्ति और साक्षात्कार की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित रहेगी। वहीं भवन निर्माण एवं रखरखाव कार्यों से जुड़ी शिकायतों की जांच की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी।

हालांकि, शिकायतों में लगाए गए अनियमितता और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही होगी। फिलहाल राजभवन के आदेश से भर्ती प्रक्रिया पर रोक लग गई है और आगे की कार्रवाई जांच की प्रगति पर निर्भर करेगी।

 

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