
पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित चोराबागान दुर्गा पूजा पंडाल में उत्सव के दौरान एक अत्यंत दर्दनाक और हृदयविदारक हादसा सामने आया है। भारी भीड़ के बीच मची भगदड़ के कारण कम से कम 19 श्रद्धालुओं की असमय मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस बड़ी त्रासदी ने राज्य की सुवेंदु अधिकारी सरकार को एक गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक संकट में ला खड़ा किया है, जिससे पुलिस और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों की पोल खुल गई है।
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पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी ने इस घटना के लिए पुलिस-प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पूजा समिति के पदों पर भाजपा विधायक विजय ओझा और मुख्यमंत्री से जुड़े लोग काबिज हैं, जिसके चलते मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की गई है। टीएमसी नेताओं ने खराब भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन सहायता प्रणाली की विफलता पर तीखे सवाल उठाए हैं।
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दूसरी ओर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए भ्रामक बताया है। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हादसे के बाद अपने सभी उत्सव संबंधी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री का एक्शन, मुआवजा और न्यायिक जांच: घटना की गंभीरता को भांपते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने देर रात अस्पताल और दुर्घटनास्थल का दौरा किया। राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए—
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प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 25 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को ग्रुप-डी की सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है।
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कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से न्यायिक (तथ्य-अन्वेषण) जांच कराने का अनुरोध किया गया है, और रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।
प्रशासनिक विफलता और पुलिस पर सवाल: मुख्यमंत्री ने प्रारंभिक बयान में भारी बारिश के दौरान ड्यूटी से गायब रहने वाले अस्थाई होमगार्डों को इस अराजकता के लिए जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, माकपा नेता सुजान चक्रवर्ती और कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा है कि प्रशासन आम जनता की सुरक्षा के बजाय वीआईपी व्यवस्था में व्यस्त रहा, जिसके कारण यह भयानक हादसा हुआ।












