
दमोह में समग्र आईडी से जुड़ा कथित फर्जीवाड़ा, 105 बच्चों के पंजीयन की जांच में चौंकाने वाले तथ्य
दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में समग्र आईडी से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और पुलिस की जांच को गंभीर मोड़ दे दिया है। मिशन ट्रस्ट के बाल भवन में पढ़ने वाले 105 बच्चों का पंजीयन एक ही परिवार की समग्र आईडी से जुड़े होने का मामला सामने आया है। जांच में बच्चों की पहचान और पारिवारिक संबंधों से जुड़े रिकॉर्ड में कथित हेरफेर की बात सामने आई है। मामले में पुलिस ने मिशन ट्रस्ट से जुड़े संजीव लैंबरर्ट को गिरफ्तार किया है, जबकि पांच अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
प्रशासन को शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। जांच के दौरान समग्र आईडी में गड़बड़ी के आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। आरोपियों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका उपयोग करने सहित संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।
बच्चों के जैविक माता-पिता की जगह एक ही परिवार का नाम
पुलिस के अनुसार, बच्चों के जैविक माता-पिता के विवरण में कथित बदलाव कर कई बच्चों को एक ही परिवार की समग्र आईडी से जोड़ा गया। जांच में कुछ ऐसे रिकॉर्ड भी सामने आए, जिनमें बच्चों के रिश्ते को गोद लिया हुआ दर्शाया गया था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन प्रविष्टियों के पीछे क्या कारण थे और बच्चों की पहचान से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव किस तरह किया गया।
मामले में रामलाल कश्यप, प्रवीण पाल, जगदीश, पार्थ राजपूत और दिलीप के फरार होने की जानकारी दी गई है। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। जांच में सामने आए दस्तावेजों और संबंधित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
मतांतरण की आशंका, लेकिन जांच अभी बाकी
इस मामले में बच्चों के मतांतरण की आशंका भी जताई गई है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान संजीव लैंबरर्ट ने वर्ष 2016 में एक बालक का नाम अपने घर की समग्र आईडी में दर्ज कराने की बात बताई। संबंधित बालक के वर्तमान में छत्तीसगढ़ में रहने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस वहां जाकर जांच करने की तैयारी में है।
हालांकि, मतांतरण के आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि संबंधित बालक का बयान दर्ज करने और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही इस पहलू पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब किन सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस?
जांच में सबसे अहम सवाल यह है कि 105 बच्चों का पंजीयन एक ही परिवार की समग्र आईडी से कैसे जुड़ा और रिकॉर्ड में बदलाव किसके निर्देश पर किए गए। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि बच्चों को गोद लिए जाने संबंधी प्रविष्टियां वास्तविक थीं या दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी का हिस्सा थीं।
फिलहाल पुलिस दस्तावेजों की जांच, फरार आरोपियों की तलाश और संबंधित बच्चों के बयान के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित फर्जीवाड़े और मतांतरण की आशंका से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
दमोह का यह मामला अब समग्र आईडी की विश्वसनीयता, बच्चों की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रहा है।












