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बिहार के मजदूरों को लखनऊ में नौकरी का झांसा, बिहार भवन ने मांगी कार्रवाई

 गोपालगंज के करीब एक दर्जन मजदूरों को लखनऊ में रोजगार दिलाने का भरोसा देकर मध्य प्रदेश के रतलाम ले जाने का आरोप है। मजदूरों ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद बिहार भवन ने रतलाम प्रशासन से तत्काल रेस्क्यू की मांग की।

गोपालगंज/रतलाम/लखनऊ। नौकरी और बेहतर मजदूरी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों के शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है। बिहार के गोपालगंज जिले के करीब एक दर्जन मजदूरों को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रोजगार दिलाने का झांसा देकर मध्य प्रदेश के रतलाम ले जाने और वहां कथित तौर पर बंधक बनाकर काम कराने का आरोप लगा है। मजदूरों ने वीडियो संदेश जारी कर अपनी परेशानी बताई और सुरक्षित घर वापसी के लिए मदद मांगी है। मामला सामने आने के बाद बिहार भवन ने भी हस्तक्षेप करते हुए रतलाम प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।

लखनऊ में नौकरी का भरोसा, रतलाम में फंसने का आरोप

मजदूरों के अनुसार, उन्हें लखनऊ में अच्छा काम और बेहतर वेतन दिलाने का भरोसा दिया गया था। आरोप है कि डोमाहाता गांव के रहने वाले एजेंट धर्मेंद्र यादव ने उन्हें रोजगार का आश्वासन देकर बुलाया और बाद में मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावड़ा गांव स्थित एक निर्माण स्थल पर भेज दिया।

बताया गया है कि निर्माण स्थल दुर्गम पहाड़ी इलाके में है, जहां मजदूरों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। मजदूरों का आरोप है कि उनसे सरिया बांधने समेत अन्य भारी काम कराया जा रहा है, लेकिन उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा।

घर लौटने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप

पीड़ित मजदूरों ने आरोप लगाया है कि जब वे काम छोड़कर घर लौटने या काम का विरोध करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। मजदूरों ने वीडियो के माध्यम से अपनी स्थिति बताकर संबंधित अधिकारियों और पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ नेता मिथिलेश तिवारी से हस्तक्षेप की अपील की है।

वीडियो सामने आने के बाद गोपालगंज में मजदूरों के परिवारों की चिंता बढ़ गई है। परिजन अपने प्रियजनों की सुरक्षा और उनकी सकुशल वापसी को लेकर परेशान हैं।

बिहार भवन ने रतलाम प्रशासन को लिखा पत्र

मामले की गंभीरता को देखते हुए नई दिल्ली स्थित बिहार भवन ने कार्रवाई की पहल की है। बिहार भवन के संयुक्त श्रम आयुक्त कुमार दिग्विजय ने रतलाम के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पुलिस बल की मदद से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।

पत्र में मजदूरों को कथित बंधन से मुक्त कराने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सुरक्षित घर भेजने पर जोर दिया गया है। साथ ही रेस्क्यू के बाद मजदूरों को भोजन, सुरक्षित आश्रय और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

बंधुआ मजदूरी कानून के तहत कार्रवाई की मांग

बिहार भवन ने बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 तथा अन्य लागू श्रम एवं आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। इसके अलावा मजदूरों की बकाया मजदूरी का भुगतान कराने और उन्हें बिहार के गोपालगंज जिले तक सुरक्षित पहुंचाने की मांग भी उठाई गई है।

मामले में कथित तौर पर शामिल ठेकेदार, नियोक्ता और मध्यस्थ एजेंट धर्मेंद्र यादव के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की जांच और संबंधित पक्षों की भूमिका की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

मजदूरों की सुरक्षित वापसी पर टिकी निगाहें

इस मामले ने दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में जाने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल उपलब्ध समाचार के अनुसार, रतलाम प्रशासन और बिहार सरकार के बीच समन्वय के जरिए मजदूरों को निकालने की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मजदूरों को कब तक सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा और उनकी बकाया मजदूरी का भुगतान कैसे सुनिश्चित होगा। पीड़ितों के परिवार प्रशासन की कार्रवाई और अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

महत्वपूर्ण: मजदूरों को बंधक बनाने, धमकी देने और मजदूरी नहीं देने से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। प्रशासन की आधिकारिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

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