कोरिया में स्टॉपडेम ने बदली आदिवासी किसानों की जिंदगी, 30 एकड़ खेतों में लहलहा रही धान की फसल

जोबापारा में नकटी नाले पर बने स्टॉपडेम से दर्जनभर किसान परिवारों को मिली सिंचाई की सुविधा, सोलर पंप से खेतों तक पहुंच रहा पानी
पहाड़ के नीचे बसे गांव में पानी ने बदली तस्वीर
कोरिया, 22 सितंबर 2026। कोरिया जिले के कदमनारा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम जोबापारा में एक छोटे से जल संरक्षण कार्य ने आदिवासी किसान परिवारों की खेती की तस्वीर बदल दी है। पहाड़ी के नीचे बहने वाले नकटी नाले पर बनाए गए स्टॉपडेम से अब गांव के दर्जनभर किसान परिवारों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच रहा है।
कभी पानी होने के बावजूद सिंचाई की समस्या से जूझने वाले इन किसानों के करीब 30 एकड़ खेतों में अब धान की फसल लहलहा रही है। किसानों ने आगे धान के बाद सब्जी और गेहूं की खेती करने की भी योजना बनाई है।
पहाड़ी इलाके में खेती थी बड़ी चुनौती
जोबापारा पहाड़ी क्षेत्र में बसा हुआ गांव है। यहां जमीन ऊंची-नीची होने के कारण खेती करना आसान नहीं था। गांव के नीचे नकटी नाला बहता है, लेकिन नाले में पानी होने के बावजूद उसे खेतों तक पहुंचाना किसानों के लिए बड़ी समस्या थी।
तेज बहाव के कारण पानी को रोककर उसका उपयोग करना मुश्किल था। ऐसे में किसानों को बारिश पर काफी निर्भर रहना पड़ता था।
ग्राम सभा की पहल से बना स्टॉपडेम
सिंचाई की समस्या से परेशान किसानों ने ग्राम पंचायत में नकटी नाले पर स्टॉपडेम बनाने की मांग रखी। ग्राम सभा के निर्णय के बाद मनरेगा के अंतर्गत 19 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई।
ग्राम पंचायत की देखरेख में स्टॉपडेम का निर्माण पूरा हुआ। इसके बाद नाले के पानी को रोककर खेती के लिए इस्तेमाल करने का रास्ता खुल गया।
सोलर पंप ने आसान कर दी सिंचाई
स्टॉपडेम बनने के बाद किसानों ने सौर सुजला योजना के तहत सोलर पंप भी लगाए। अब सौर ऊर्जा की मदद से स्टॉपडेम में जमा पानी को ऊंचाई पर स्थित खेतों तक पहुंचाया जा रहा है।
जरूरत के अनुसार बिजली से चलने वाले पंप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पहले जैसी परेशानी नहीं उठानी पड़ रही है।
30 एकड़ में पहुंचा सिंचाई का पानी
ग्राम पंचायत के सरपंच दयाल साय के अनुसार, पहले नाले में तेज बहाव के कारण पानी को रोकना मुश्किल था। स्टॉपडेम बनने के बाद स्थिति बदल गई है और करीब 30 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिल रही है।
अब किसानों की योजना केवल धान तक सीमित नहीं है। धान की फसल के बाद खेतों में सब्जी और गेहूं की खेती भी की जाएगी। यानी एक ही जल संरचना से किसानों को अलग-अलग मौसम में खेती का अवसर मिलने लगा है।
इन किसानों को मिल रहा लाभ
स्टॉपडेम से जोबापारा के कई किसान परिवारों को सीधे लाभ मिल रहा है। इनमें धर्मपाल की 2 एकड़, राम सिंह की 2 एकड़, प्रभुदयाल की 1 एकड़, जोखन राम की 1 एकड़, गणेश की डेढ़ एकड़, उमेश कुमार की 3 एकड़, दयाल साय की 5 एकड़, करण साय की 3 एकड़, वंश गोपाल की 3 एकड़, लोधे राम की 3 एकड़, शेषमन की 2 एकड़ और दखल साय की 3 एकड़ कृषि भूमि शामिल है।
इन किसानों के खेतों में अब सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने लगा है और परिवार आगामी फसलों की तैयारी कर रहे हैं।
एक स्टॉपडेम, कई उम्मीदें
जोबापारा की कहानी बताती है कि ग्रामीण इलाकों में पानी की छोटी लेकिन जरूरी संरचनाएं किसानों के लिए कितना बड़ा बदलाव ला सकती हैं। जहां पहले नाले का पानी बहकर निकल जाता था, वहीं अब उसी पानी को रोककर खेतों तक पहुंचाया जा रहा है।
स्टॉपडेम, सोलर पंप और किसानों की मेहनत के मेल से जोबापारा में खेती को नई दिशा मिली है। अब यहां के किसान सिर्फ बारिश के भरोसे नहीं, बल्कि सिंचाई की बेहतर सुविधा के साथ अगली फसल की तैयारी कर रहे हैं।












