चुरहट अस्पताल से रीवा ले जाते समय 6 साल के बैगा बच्चे की मौत, ऑक्सीजन व्यवस्था पर गंभीर सवाल

परिजनों का आरोप- अस्पताल में ऑक्सीजन मास्क नहीं मिला, 108 एंबुलेंस में भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी; सीएमएचओ ने एंबुलेंस सेवा में खामियां होने की बात मानी
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। चुरहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रीवा रेफर किए गए छह वर्षीय बैगा आदिवासी बच्चे की रास्ते में मौत हो गई। बच्चे को सांस लेने में परेशानी के बाद अस्पताल लाया गया था, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उसे संजय गांधी अस्पताल, रीवा रेफर किया गया।
परिजनों के मुताबिक, बच्चे को ऑक्सीजन की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन उपलब्ध होने के बावजूद उसे लगाने के लिए मास्क नहीं मिल सका। परिवार का आरोप है कि मास्क की तलाश में काफी समय निकल गया और ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने भी व्यवस्था करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद मशीन से सीधे ऑक्सीजन देने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई।
परिजनों के अनुसार अस्पताल से रेफरल की प्रक्रिया पूरी होने में करीब 40 मिनट से अधिक समय लगा। इसी दौरान बच्चे की हालत लगातार गंभीर बनी रही। बाद में 108 एंबुलेंस से उसे रीवा ले जाने की व्यवस्था की गई, लेकिन परिवार का दावा है कि एंबुलेंस में भी गंभीर मरीज के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन संबंधी व्यवस्था नहीं थी।
बताया गया कि 108 एंबुलेंस को सीधी से चुरहट पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगा। इसके बाद बच्चे को चुरहट से रीवा ले जाया गया, लेकिन शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे रीवा पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
बच्चे की मौत के बाद उसकी मां मुन्नी बैगा ने अस्पताल और एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर जरूरी ऑक्सीजन सुविधा और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था मिलती तो बच्चे को बचाने की संभावना हो सकती थी।
मामले ने खास तौर पर दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गंभीर मरीजों को समय पर ऑक्सीजन, जरूरी उपकरण और बेहतर एंबुलेंस सुविधा मिलना बेहद जरूरी माना जाता है।
वहीं, सीएमएचओ डॉ. अशोक खरे ने बताया कि जिले में 108 एंबुलेंस व्यवस्था लंबे समय से खराब चल रही है। उनके अनुसार इस संबंध में कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मामले की शिकायत वरिष्ठ कार्यालय में की जाएगी और घटना में यदि किसी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसे तय किया जाएगा।
इस घटना के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए आवश्यक जीवनरक्षक सुविधाएं मौके पर उपलब्ध क्यों नहीं थीं और रेफरल के दौरान एंबुलेंस की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।











