chhattisgarhLatestNational

200 आत्मसमर्पित माओवादियों को परिवार बसाने की उम्मीद, नसबंदी खोलने के लिए बस्तर में लगेगा विशेष चिकित्सा शिविर

संगठन में रहते कराया गया था नसबंदी का ऑपरेशन, मुख्यधारा में लौटने के बाद शादी और परिवार की इच्छा; विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम करेगी जांच और आवश्यक प्रक्रिया


छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे 200 से अधिक पूर्व माओवादी अब परिवार बसाना चाहते हैं। संगठन में रहते जिन युवाओं की नसबंदी कराई गई थी, उनकी नसबंदी खोलने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बस्तर में विशेष शिविर लगा सकती है। प्रशासन इसे आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास की प्रक्रिया का हिस्सा मान रहा है। इससे पहले भी विशेषज्ञ डॉक्टर करीब 50 लोगों की ऐसी प्रक्रिया कर चुके हैं और चार आत्मसमर्पित माओवादी नसबंदी खुलने के बाद पिता बन चुके हैं।

संगठन में भर्ती के बाद कराई जाती थी नसबंदी

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, माओवादी संगठन में भर्ती होने वाले कई युवाओं की नसबंदी कराई जाती थी। इसका उद्देश्य संगठन में रहते हुए पारिवारिक जिम्मेदारियों से उन्हें दूर रखना बताया गया है। अब आत्मसमर्पण के बाद इनमें से कई लोग सामान्य जीवन जीना चाहते हैं और विवाह कर परिवार बसाने की इच्छा जता रहे हैं।

इसी वजह से 200 से अधिक आत्मसमर्पित माओवादियों ने नसबंदी खुलवाने के लिए प्रशासन से मदद मांगी है। सरकार इस मांग को उनके पुनर्वास और मुख्यधारा में स्थायी रूप से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देख रही है।

बस्तर में पहुंचेगी विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम

आत्मसमर्पित माओवादियों की मांग को देखते हुए बस्तर में विशेष चिकित्सा शिविर लगाने की तैयारी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम शिविर में इच्छुक लोगों की चिकित्सकीय जांच करेगी और जिन मामलों में चिकित्सकीय रूप से संभव होगा, उनमें आवश्यक प्रक्रिया की जाएगी।

उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी पुलिस अधिकारियों के साथ पुनर्वास की समीक्षा के दौरान इस विषय पर चर्चा की है। अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

चार आत्मसमर्पित माओवादी बन चुके हैं पिता

इस पहल का एक उदाहरण राजनांदगांव में सामने आया है। यहां नसबंदी खुलवाने के बाद चार आत्मसमर्पित माओवादियों ने शादी की और अब वे पिता भी बन चुके हैं। इससे दूसरे आत्मसमर्पित माओवादियों में भी परिवार बसाने की उम्मीद बढ़ी है।

पहले भी विशेषज्ञ कर चुके हैं प्रक्रिया

बस्तर के एसएसपी शलभ सिन्हा के अनुसार, नसबंदी खोलने के मामले पहले भी सामने आए हैं। सुकमा और बस्तर के अन्य इलाकों में विशेष शिविर लगाए जा चुके हैं। यूरोलॉजिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों ने बस्तर पहुंचकर करीब 50 आत्मसमर्पित माओवादियों की नसबंदी खोलने की प्रक्रिया की थी।

फिलहाल प्रस्तावित शिविर में आत्मसमर्पित महिला माओवादियों को शामिल किया जाएगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। अब तक सामने आए मामलों में नसबंदी खुलवाने वाले सभी लोग पुरुष हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button