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देश-दुनिया के इतिहास में आज के दिन की महत्त्वपूर्ण घटना:हीलियम का रहस्य

सूर्य ग्रहण के अध्ययन के दौरान पियरे जेनसीन को एक अनोखी पीली वर्णक्रमीय रेखा दिखाई दी थी।

नई दिल्ली। विज्ञान के इतिहास में 18 अगस्त का दिन एक महत्वपूर्ण खोज से जुड़ा है। वर्ष 1868 में फ्रांसीसी खगोलविद पियरे जेनसीन ने सूर्य के अध्ययन के दौरान एक ऐसी चमकीली पीली वर्णक्रमीय रेखा देखी, जो उस समय ज्ञात किसी तत्व से मेल नहीं खाती थी। यह अवलोकन आगे चलकर हीलियम की खोज का आधार बना।

पियरे जेनसीन उस समय सूर्य ग्रहण का अध्ययन कर रहे थे। उन्होंने सूर्य के वातावरण से निकलने वाले प्रकाश का स्पेक्ट्रम तैयार किया। इस दौरान उन्हें पीले रंग की एक विशिष्ट रेखा दिखाई दी। वैज्ञानिकों ने माना कि यह किसी अज्ञात तत्व की मौजूदगी का संकेत हो सकती है।

सूर्य के नाम पर रखा गया हीलियम

इस नए तत्व का नाम बाद में ग्रीक भाषा के शब्द ‘हेलियोस’ से लिया गया, जिसका अर्थ सूर्य होता है। हीलियम की खासियत यह थी कि इसकी पहचान सबसे पहले सूर्य के स्पेक्ट्रम में हुई, जबकि उस समय तक पृथ्वी पर इसका पता नहीं चला था।

हालांकि, बाद में वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर भी हीलियम की मौजूदगी का पता लगाया। वर्ष 1895 में ब्रिटिश रसायनशास्त्री विलियम रैम्जे ने खनिज से निकली गैस का अध्ययन करते हुए पृथ्वी पर हीलियम की पुष्टि की।

आज बेहद उपयोगी है हीलियम

हीलियम को आमतौर पर गुब्बारों में भरी जाने वाली गैस के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होता है। चिकित्सा क्षेत्र में कुछ उपकरणों को ठंडा रखने, वैज्ञानिक अनुसंधान, औद्योगिक प्रक्रियाओं और अंतरिक्ष तकनीक में भी हीलियम का उपयोग किया जाता है।

हीलियम एक रंगहीन, गंधहीन और बेहद हल्की गैस है। यह रासायनिक रूप से काफी निष्क्रिय होती है, जिसके कारण कई तकनीकी और वैज्ञानिक उपयोगों में इसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

विज्ञान के इतिहास में क्यों खास है यह खोज?

पियरे जेनसीन का 1868 का अवलोकन इस लिहाज से ऐतिहासिक था कि इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि दूर स्थित तारों और सूर्य की संरचना का पता उनके प्रकाश के अध्ययन से लगाया जा सकता है। इस तकनीक को स्पेक्ट्रोस्कोपी कहा जाता है और आज यह खगोल विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक है।

इस तरह 18 अगस्त 1868 को हुआ सूर्य का अध्ययन केवल एक ग्रहण का वैज्ञानिक अवलोकन नहीं था, बल्कि इसने ब्रह्मांड में मौजूद एक नए तत्व की पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।

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