शादी हुई तो क्या बेटी हो गई परिवार से अलग? हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, अनुकंपा नौकरी पर साफ की तस्वीर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा—सिर्फ विवाहित होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से बाहर नहीं किया जा सकता, वास्तविक निर्भरता देखना जरूरी है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विवाहित बेटियों के अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ बेटी के शादीशुदा होने के आधार पर उसे मृत कर्मचारी पर आश्रित नहीं मान लेना उचित नहीं है। पात्रता तय करने में वास्तविक आर्थिक निर्भरता को देखा जाना चाहिए।
मामला छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से जुड़ा था। दो मृत कर्मचारियों की विवाहित बेटियों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा किया था। बैंक की ओर से शादी को आधार बनाकर उनकी पात्रता पर आपत्ति की गई थी।
शादी को नहीं बनाया जा सकता अकेला आधार
हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित योजना में “wholly dependent son” और “wholly dependent daughter” का उल्लेख है, लेकिन बेटी के लिए विवाहित या अविवाहित होने के आधार पर अलग-अलग शर्त नहीं रखी गई है। ऐसे में केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर किसी बेटी को बाहर नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी माना कि निर्भरता एक तथ्यात्मक सवाल है, जिसे उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाना चाहिए। सिर्फ यह मान लेना कि शादी के बाद बेटी अपने पति पर निर्भर हो गई होगी, पर्याप्त आधार नहीं है।
विवाहित बेटों और बेटियों के लिए अलग मापदंड पर सवाल
सुनवाई के दौरान बैंक ने माना कि कुछ मामलों में विवाहित बेटों को भी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि यदि शादी किसी बेटे को आश्रित परिवार सदस्य होने से अपने-आप बाहर नहीं करती, तो केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर बेटी के लिए अलग मापदंड नहीं बनाया जा सकता।
दो बेटियों को नियुक्ति देने का निर्देश
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक को दोनों मामलों में अनुकंपा नियुक्ति देने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि संबंधित योजना की अन्य पात्रताएं पूरी होने पर सिर्फ शादी को अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जा सकता।
यह फैसला अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में वैवाहिक स्थिति और वास्तविक आर्थिक निर्भरता के बीच अंतर को स्पष्ट करता है।












