
रायपुर। छत्तीसगढ़ में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है और तेज धूप के कारण दिन के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 6 अक्टूबर से मौसम का मिजाज बदल सकता है। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की संभावना जताई गई है। वहीं रात के तापमान में गिरावट आने से बस्तर और सरगुजा संभाग में गुलाबी ठंड का असर बढ़ सकता है।
इसी बीच पड़ोसी मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मौसम में बदलाव का असर लंपी वायरस के संक्रमण पर भी दिखाई देने की बात सामने आई है। बारिश कम होने और धूप बढ़ने के साथ बीमारी फैलाने वाले कीटों की सक्रियता कम होने से संक्रमण का चक्र कमजोर पड़ने का दावा पशु चिकित्सकों ने किया है।
छत्तीसगढ़ में अभी शुष्क है मौसम
पिछले 24 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ में मौसम पूरी तरह शुष्क रहा। इस दौरान राजनांदगांव में अधिकतम तापमान 35.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 18.0 डिग्री सेल्सियस रहा।
दिन में तेज धूप के कारण गर्मी महसूस की जा रही है, जबकि बस्तर और सरगुजा के कुछ इलाकों में रात के समय हल्की ठंड का एहसास होने लगा है। फिलहाल मौसम विभाग ने प्रदेश के लिए किसी बड़े मौसम संबंधी अलर्ट की घोषणा नहीं की है।
6 अक्टूबर से बदल सकता है मौसम
मौसम विभाग के अनुसार 5 अक्टूबर तक मौसम मुख्यतः शुष्क रहने के बाद 6 अक्टूबर से बदलाव देखने को मिल सकता है। 6 अक्टूबर को प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश की संभावना है।
इस दौरान कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात भी हो सकता है। 7 और 8 अक्टूबर को भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और बिजली गिरने की संभावना बनी रह सकती है।
आगामी दिनों में रात के तापमान में गिरावट आने से मौसम में ठंडक बढ़ने के संकेत हैं।
मानसून की वापसी जारी
छत्तीसगढ़ से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया जारी है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून वापसी की रेखा फिलहाल सुपौल, रांची, रायपुर, ब्रह्मपुरी, परभणी, बारामती और हरनाई से होकर गुजर रही है।
वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश से दक्षिण बिहार होते हुए विदर्भ तक एक द्रोणिका बनी हुई है। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण मानसून की विदाई क्रमिक रूप से आगे बढ़ रही है।
MP के ग्वालियर में लंपी वायरस का संक्रमण हुआ कमजोर
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में लंपी वायरस को लेकर राहत की खबर सामने आई है। पशु चिकित्सकों के अनुसार बारिश का दौर कम होने और धूप निकलने से बीमारी फैलाने वाले मक्खी, मच्छर और किलनी जैसे कीटों की सक्रियता में कमी आई है। इससे संक्रमित गोवंश से स्वस्थ पशुओं में वायरस के फैलने की रफ्तार कम होने की बात कही जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लंपी वायरस का प्रसार बरसात के दौरान अधिक तेजी से होता है, क्योंकि नमी के कारण संक्रमण फैलाने वाले कीट अधिक सक्रिय रहते हैं। मौसम के शुष्क होने के साथ इनकी सक्रियता कम होने से संक्रमण चक्र कमजोर पड़ सकता है।
ग्वालियर में 60 हजार से ज्यादा गोवंश का टीकाकरण
लंपी वायरस की रोकथाम के लिए ग्वालियर जिले में टीकाकरण अभियान चलाया गया। विभागीय टीमों के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को मिलाकर अब तक 60 हजार से अधिक गोवंश का गोटपॉक्स वैक्सीन से निःशुल्क टीकाकरण किया जा चुका है।
हालांकि, बीमारी से हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर विभागीय आंकड़ों और स्थानीय पशुपालकों एवं गोसेवकों के दावों में अंतर बताया गया है। विभाग के अनुसार जिले में अब तक करीब 65 गोवंश की मौत दर्ज की गई है, जबकि कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
गोशाला में 20 संक्रमित गोवंश का इलाज
ग्वालियर की रतवाई गोशाला में बनाए गए विशेष आइसोलेशन वार्ड में करीब 20 संक्रमित गोवंश का उपचार चल रहा है। संक्रमित पशुओं को स्वस्थ गोवंश से अलग रखा गया है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है।
पशु चिकित्सकों के अनुसार संक्रमित पशुओं को आवश्यक दवाओं के साथ एंटीबायोटिक्स और मल्टीविटामिन दिए जा रहे हैं।
पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह
विशेषज्ञों ने पशुपालकों से अपील की है कि संक्रमण कम होने के बावजूद लापरवाही न बरतें। यदि किसी गोवंश के शरीर पर गांठें दिखाई दें, बुखार हो या पशु सुस्त नजर आए तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग कर देना चाहिए।
इसके बाद नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क कर जांच और उपचार कराया जाना चाहिए।












