दिमाग की याददाश्त और भावनाओं का राज खोलने वाली खोज को नोबेल….

नई दिल्ली। इंसानी दिमाग कैसे काम करता है? हम यादें कैसे बनाते हैं, भावनाओं को कैसे महसूस करते हैं और आखिर हमारा व्यवहार किस तरह नियंत्रित होता है? इन बेहद जटिल सवालों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले तीन वैज्ञानिकों को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों में से एक नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
2026 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार कार्ल डाइसेरोथ (Karl Deisseroth), पीटर हेगेमैन (Peter Hegemann) और जॉर्ज नागेल (Georg Nagel) को संयुक्त रूप से दिया गया है। तीनों वैज्ञानिकों को प्रकाश की मदद से नर्व सेल्स की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाली तकनीक यानी ऑप्टोजेनेटिक्स (Optogenetics) से जुड़ी महत्वपूर्ण खोजों के लिए यह सम्मान मिला है।
इस खोज ने वैज्ञानिकों के लिए दिमाग के भीतर मौजूद अलग-अलग नर्व सर्किट को समझने का एक नया रास्ता खोल दिया है। इसकी मदद से रिसर्चर्स यह पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि मस्तिष्क का कोई विशेष हिस्सा याददाश्त, भावनाओं या व्यवहार में किस तरह भूमिका निभाता है।
किन वैज्ञानिकों को मिला मेडिसिन का नोबेल?
2026 के मेडिसिन नोबेल पुरस्कार के लिए तीन वैज्ञानिकों का चयन किया गया है।
कार्ल डाइसेरोथ अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिक हैं। उन्होंने ऑप्टोजेनेटिक्स को न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में इस्तेमाल करने और नर्व सेल्स की गतिविधियों को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया।
पीटर हेगेमैन जर्मनी की हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं, जबकि जॉर्ज नागेल यूनिवर्सिटी ऑफ वुर्जबर्ग में कार्यरत रहे हैं। दोनों वैज्ञानिकों ने प्रकाश के प्रति संवेदनशील प्रोटीन और उनके जरिए कोशिकाओं में होने वाले बदलावों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
क्या है ऑप्टोजेनेटिक्स?
आसान भाषा में समझें तो ऑप्टोजेनेटिक्स ऐसी वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें रोशनी की मदद से खास नर्व सेल्स को सक्रिय या निष्क्रिय किया जा सकता है।
आमतौर पर हमारे दिमाग की नर्व सेल्स यानी न्यूरॉन्स इलेक्ट्रिकल और केमिकल सिग्नल के जरिए एक-दूसरे से संपर्क करते हैं। वैज्ञानिकों के लिए किसी एक खास न्यूरॉन या नर्व सर्किट की गतिविधि को अलग करके देखना लंबे समय से चुनौती रहा है।
ऑप्टोजेनेटिक्स ने इस चुनौती को काफी हद तक आसान किया। इसमें कुछ विशेष प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद निर्धारित रोशनी डालकर संबंधित नर्व सेल की गतिविधि को नियंत्रित किया जा सकता है।
शैवाल से शुरू हुई महत्वपूर्ण खोज
ऑप्टोजेनेटिक्स की कहानी एक छोटे से शैवाल पर हुई रिसर्च से जुड़ी है। पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल ने चैनलरोडोप्सिन नाम के प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन से जुड़ी महत्वपूर्ण खोज की।
यह प्रोटीन प्रकाश के संपर्क में आने पर कोशिका की झिल्ली में मौजूद चैनल को खोल सकता है। जब इस पर खास तरह की रोशनी डाली जाती है तो आयन कोशिका के अंदर जाने लगते हैं और इससे इलेक्ट्रिकल गतिविधि पैदा हो सकती है।
यही विशेषता आगे चलकर नर्व सेल्स को नियंत्रित करने वाली तकनीक विकसित करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।
कार्ल डाइसेरोथ ने इसे दिमाग की रिसर्च से जोड़ा
पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल की खोज को दिमाग के अध्ययन के लिए इस्तेमाल करने में कार्ल डाइसेरोथ का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा।
उन्होंने प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन से जुड़े जीन को नर्व सेल्स में इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया। इसके बाद वैज्ञानिक खास रोशनी के जरिए इन नर्व सेल्स की गतिविधि को नियंत्रित करने में सक्षम हुए।
आगे चलकर इस तकनीक का इस्तेमाल जीवित जानवरों के दिमाग में भी किया गया। इससे वैज्ञानिकों को यह देखने का मौका मिला कि किसी विशेष नर्व सर्किट को सक्रिय करने या उसकी गतिविधि को रोकने से व्यवहार में क्या बदलाव आता है।
यही तकनीक आगे ऑप्टोजेनेटिक्स के नाम से जानी गई।
याददाश्त और भावनाओं को समझने में कैसे मदद मिलती है?
हमारे दिमाग में अरबों न्यूरॉन्स होते हैं और वे आपस में जटिल नेटवर्क के जरिए जुड़े रहते हैं। किसी याद को बनाना, किसी घटना पर भावनात्मक प्रतिक्रिया देना या कोई व्यवहार करना केवल एक न्यूरॉन का काम नहीं होता, बल्कि इसमें कई नर्व सर्किट शामिल हो सकते हैं।
ऑप्टोजेनेटिक्स की मदद से वैज्ञानिक किसी विशेष नर्व सर्किट को नियंत्रित करके उसके प्रभाव का अध्ययन कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर किसी विशेष सर्किट को सक्रिय करने पर किसी व्यवहार में बदलाव आता है तो वैज्ञानिक यह समझने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं कि उस सर्किट की क्या भूमिका है।
इसी वजह से यह तकनीक याददाश्त, डर, भावनाओं, प्रेरणा और व्यवहार जैसे विषयों पर होने वाली रिसर्च के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गई है।
मानसिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों पर रिसर्च में भी मदद
ऑप्टोजेनेटिक्स का महत्व केवल सामान्य दिमागी गतिविधियों को समझने तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक इसका इस्तेमाल कई तरह की न्यूरोलॉजिकल और मानसिक बीमारियों से जुड़े नर्व सर्किट को समझने के लिए भी कर रहे हैं।
किसी बीमारी में दिमाग के कौन से सर्किट प्रभावित होते हैं और उनमें होने वाले बदलाव व्यवहार या अन्य लक्षणों से किस तरह जुड़े हैं, इसे समझने में यह तकनीक रिसर्चर्स को मदद देती है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऑप्टोजेनेटिक्स अभी मुख्य रूप से वैज्ञानिक और मेडिकल रिसर्च का महत्वपूर्ण उपकरण है। इसका यह मतलब नहीं है कि इससे सभी मानसिक या न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का इलाज उपलब्ध हो गया है।
आंखों की रोशनी वापस लाने पर भी रिसर्च
ऑप्टोजेनेटिक्स का एक दिलचस्प संभावित इस्तेमाल आंखों की रोशनी से जुड़ी समस्याओं के क्षेत्र में भी हो रहा है।
वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन और ऑप्टोजेनेटिक तकनीक का इस्तेमाल करके कुछ प्रकार की दृष्टि संबंधी समस्याओं वाले मरीजों की देखने की क्षमता में मदद की जा सकती है या नहीं।
हालांकि, इसे लेकर अभी शोध जारी है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ऑप्टोजेनेटिक्स के कारण आंखों की रोशनी वापस लाने का कोई सामान्य और पूरी तरह उपलब्ध इलाज मिल गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह नोबेल पुरस्कार?
मेडिसिन का यह नोबेल केवल एक नई तकनीक की खोज के लिए सम्मान नहीं है, बल्कि यह इस बात को भी रेखांकित करता है कि वैज्ञानिक किस तरह दिमाग के सबसे जटिल सवालों को समझने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
दिमाग के भीतर मौजूद नर्व सर्किट को सीधे नियंत्रित करके उनके प्रभावों का अध्ययन करने की क्षमता ने न्यूरोसाइंस में रिसर्च के तरीके को बदल दिया है।
इसी वजह से ऑप्टोजेनेटिक्स आज दुनिया की कई प्रयोगशालाओं में ब्रेन रिसर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
12 मिलियन स्वीडिश क्रोना की पुरस्कार राशि
कार्ल डाइसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को संयुक्त रूप से 12 मिलियन स्वीडिश क्रोना की पुरस्कार राशि मिलेगी। यह राशि तीनों वैज्ञानिकों के बीच साझा की जाएगी।
मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार के साथ ही 2026 के नोबेल सप्ताह की शुरुआत हुई है। इसके बाद भौतिकी, रसायन विज्ञान और साहित्य समेत अन्य क्षेत्रों के पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा भी इसी सप्ताह की जाएगी, जबकि आर्थिक विज्ञान से जुड़े नोबेल मेमोरियल पुरस्कार की घोषणा बाद में होगी।












