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कोयला तस्करी में ED का बड़ा एक्शन! 136 करोड़ की संपत्तियां अटैच, जानिए पूरा मामला

अनूप मांझी उर्फ लाला के कथित नेटवर्क पर ईडी की कार्रवाई, अब तक 815 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां अटैच

नई दिल्ली। कोयला तस्करी और कथित अवैध कमाई से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने कोयला सिंडिकेट के कथित सरगना अनूप मांझी उर्फ लाला और उससे जुड़े नेटवर्क की 136.44 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।

ईडी के मुताबिक, यह मामला ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की कोयला परियोजनाओं से कथित अवैध कोयला निकासी और उसकी बिक्री से जुड़ा है। ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में अब तक अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य बढ़कर 815.08 करोड़ रुपये हो गया है।

इको टूरिज्म परियोजनाओं से लेकर कोलकाता की संपत्तियों तक कार्रवाई

जांच एजेंसी ने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित गढ़ पंचकोट इको टूरिज्म और बांकुड़ा स्थित बिहारीनाथ इको टूरिज्म से जुड़ी संपत्तियों को भी कार्रवाई के दायरे में लिया है। इसके अलावा कोलकाता की दो अन्य अचल संपत्तियां भी अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं।

ईडी को आशंका है कि इन संपत्तियों में कथित अवैध कमाई का निवेश किया गया था। एजेंसी अब संपत्तियों की खरीद, उनमें लगाए गए धन और कथित अपराध से अर्जित आय के बीच संबंधों की जांच कर रही है।

बैंक खातों, शेयर और म्यूचुअल फंड पर भी नजर

ईडी की कार्रवाई केवल जमीन और इमारतों तक सीमित नहीं है। जांच में आरोपी से जुड़े बैंक खातों में जमा रकम, शेयर बाजार के निवेश और म्यूचुअल फंड में लगाई गई राशि भी शामिल है।

एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अवैध कमाई को किन वित्तीय माध्यमों से अलग-अलग संपत्तियों और निवेशों में लगाया गया। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि कहीं कंपनियों या कारोबारी गतिविधियों के जरिए इस धन को वैध कमाई के रूप में दिखाने की कोशिश तो नहीं की गई।

बंद खदानों से कोयला निकालने का क्या है आरोप?

ईडी की जांच के अनुसार, अनूप मांझी उर्फ लाला पर पश्चिम बंगाल और झारखंड में कथित कोयला सिंडिकेट संचालित करने का आरोप है। एजेंसी को संदेह है कि इस नेटवर्क ने ईसीएल के अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की कथित मिलीभगत से कोयले की अवैध निकासी और बिक्री की।

आरोप है कि कुछ खदानों को कागजों पर गैर-संचालित दिखाकर वहां से कथित तौर पर कोयला निकाला जाता था और फिर उसे दूसरे बाजारों में बेचा जाता था। जांच एजेंसी इस नेटवर्क के जरिए हुई कथित कमाई और उससे बनाई गई संपत्तियों का हिसाब जुटा रही है।

हालांकि, ये आरोप जांच का हिस्सा हैं। इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

815 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच होने का क्या मतलब है?

संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने का उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित संपत्ति को कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित रखना है, ताकि जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई प्रभावित न हो। यह कार्रवाई अपने आप में किसी आरोपी को दोषी ठहराए जाने के समान नहीं है।

ईडी अब कथित अवैध कमाई, वित्तीय लेनदेन, कंपनियों और संपत्तियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है। जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड से इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने में मदद मिल सकती है।

 

 

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