छत्तीसगढ़ में दशहरे पर कहां-कहां जला रावण? रायपुर से बस्तर तक दिखा उत्सव का रंग

रायपुर। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयादशमी का पर्व छत्तीसगढ़ में धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में रावण दहन के आयोजन हुए, वहीं कई स्थानों पर रामलीला का मंचन भी किया गया। राजधानी रायपुर से लेकर दुर्ग-भिलाई और बस्तर तक उत्सव की रौनक देखने को मिली। लोगों ने परिवार और दोस्तों के साथ कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और दशहरे की परंपराओं को उत्साहपूर्वक निभाया।
रायपुर में रावण दहन देखने उमड़े लोग
राजधानी रायपुर के रावणभाठा मैदान में विजयादशमी के अवसर पर रावण के पुतले का दहन किया गया। वहीं, डब्ल्यूआरएस कॉलोनी मैदान में भी रावण दहन का आयोजन हुआ। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। रावण दहन के साथ लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश याद किया।
दुर्ग और भिलाई में भी दिखा उत्साह
दुर्ग में मुख्य दशहरा आयोजन पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम में किया गया। वहीं, भिलाई के सेक्टर-2 में भी रावण दहन हुआ। अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। दशहरे के आयोजनों ने शहरों में उत्सव का माहौल बना दिया।
भिलाई-3 में रामलीला का मंचन
भिलाई-3 की बिजली नगर कॉलोनी में सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति की ओर से रावण दहन से पहले रामलीला का आयोजन किया गया। कलाकारों ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

भिलाई-3 के मिनी स्टेडियम में आयोजित सार्वजनिक दशहरा उत्सव में भी रामलीला का मंचन हुआ। दर्शकों ने भगवान राम की लीला देखी और धार्मिक आयोजन में हिस्सा लिया।
बस्तर में मावली परघाव ने खींचा ध्यान
छत्तीसगढ़ में दशहरे की पहचान केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है। बस्तर का दशहरा अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं के लिए देशभर में जाना जाता है। मावली परघाव के दौरान मां दंतेश्वरी का छत्र और मावली माता की डोली आकर्षण का केंद्र रहे। आसमान में आतिशबाजी की रोशनी और पारंपरिक आयोजन के दृश्यों को लोगों ने अपने मोबाइल में कैद किया।
बस्तर की यह परंपरा प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था की विशिष्ट झलक प्रस्तुत करती है।
आस्था और परंपरा के रंग में रंगा छत्तीसगढ़
विजयादशमी को भगवान राम द्वारा रावण पर विजय प्राप्त करने की मान्यता से जोड़कर देखा जाता है। यह पर्व अहंकार, अन्याय और बुराई के अंत का संदेश देता है। छत्तीसगढ़ में रायपुर, दुर्ग, भिलाई और बस्तर सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुए आयोजनों ने धार्मिक आस्था के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को भी सामने रखा।
इस तरह दशहरा 2026 प्रदेश में रावण दहन, रामलीला और पारंपरिक उत्सवों के साथ मनाया गया।












