दुर्ग में साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा,

म्यूल बैंक खातों के मामले में 33वां आरोपी गिरफ्तार
बंधन बैंक के 172 खातों के दुरुपयोग की जांच में प्रकाश मंगराज गिरफ्तार, ठाणे में ऑनलाइन सट्टा-बेटिंग के दो पैनलों से जुड़े 10 आरोपी भी पकड़े गए; बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की कड़ियां खंगाल रही पुलिस
दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए बैंक खातों के कथित दुरुपयोग और ऑनलाइन सट्टा-बेटिंग नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। सुपेला थाना क्षेत्र में बंधन बैंक के 172 खातों के दुरुपयोग से जुड़े मामले में पुलिस ने एक और आरोपी प्रकाश मंगराज को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है।
पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया कि बैंक खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर देश के अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा करने और उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। आरोप है कि कुछ लोग कमीशन के बदले अपने बैंक खाते दूसरे व्यक्तियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों में रकम आने के बाद उसे आगे ट्रांसफर किया जाता था।
इसी बीच, दुर्ग पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे में एक किराए के फ्लैट से ऑनलाइन सट्टा-बेटिंग के दो पैनलों का संचालन करने के आरोप में 10 लोगों को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दोनों मामलों में वित्तीय लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी रखी है। हालांकि, इन दोनों प्रकरणों के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
बंधन बैंक के 172 खातों के दुरुपयोग का मामला, 33वां आरोपी गिरफ्तार
दुर्ग पुलिस के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर सुपेला थाने में अपराध क्रमांक 679/2026 दर्ज किया गया था। जांच के दौरान बंधन बैंक के 172 खातों के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया।
पुलिस को संदेह है कि इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के लिए किया गया। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ खाताधारक अपने बैंकिंग विवरण और खाते दूसरे लोगों को उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था।
इस प्रकरण में पुलिस ने 12 अक्टूबर को सुपेला निवासी 23 वर्षीय प्रकाश मंगराज को गिरफ्तार किया। इससे पहले पुलिस 32 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। नई गिरफ्तारी के बाद कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 33 हो गई है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों से कितनी रकम का लेन-देन हुआ, रकम किन खातों में पहुंची और इस गतिविधि में अन्य किन लोगों की भूमिका रही।
ठाणे के किराए के फ्लैट से चल रहे थे ऑनलाइन सट्टा-बेटिंग के दो पैनल
दुर्ग पुलिस ने 8 अक्टूबर को थाना वैशाली नगर और एसीसीयू की संयुक्त टीम के माध्यम से महाराष्ट्र के ठाणे में कार्रवाई की थी। पुलिस के अनुसार, एक किराए के फ्लैट से ऑनलाइन सट्टा-बेटिंग के दो पैनलों का संचालन किया जा रहा था। इस कार्रवाई में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
प्रारंभिक जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और संदिग्ध बैंक खातों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की पड़ताल करते हुए पुलिस इस नेटवर्क तक पहुंची। पुलिस का कहना है कि पैनलों के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन किए जाने की जानकारी मिली है। इस लेन-देन की वास्तविक सीमा और नेटवर्क की पूरी संरचना का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए। इनमें चार लैपटॉप, 31 मोबाइल फोन, 12 एटीएम कार्ड, दो पैन कार्ड, दो बैंक पासबुक, वाई-फाई उपकरण, पेन ड्राइव, नकदी और अन्य डिजिटल सामग्री शामिल हैं।
जब्त उपकरणों की फॉरेंसिक जांच के जरिए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ऑनलाइन पैनलों का संचालन किस तरह किया जाता था, वित्तीय लेन-देन किन माध्यमों से होते थे और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कैसे की जा सकती है।
कमीशन के लालच में बैंक खाता देना पड़ सकता है भारी
म्यूल बैंक अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल अक्सर किसी दूसरे व्यक्ति की रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। साइबर अपराधों में ठगी की रकम को कई खातों के जरिए आगे भेजने के लिए ऐसे खातों का दुरुपयोग किया जा सकता है।
कई मामलों में खाताधारकों को नौकरी, कमीशन या अतिरिक्त कमाई का लालच देकर अपने खाते इस्तेमाल करने देने के लिए कहा जाता है। खाते में आने वाली रकम के वास्तविक स्रोत की जानकारी नहीं होने का दावा करने पर भी खाताधारक की भूमिका की जांच हो सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होता है।
दुर्ग में सामने आए मामले ने एक बार फिर बैंक खातों और डिजिटल भुगतान माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल की जरूरत को रेखांकित किया है। लोगों को अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, ओटीपी और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
दोनों मामलों में वित्तीय लेन-देन की जांच जारी
दुर्ग पुलिस अलग-अलग प्रकरणों में बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन और डिजिटल उपकरणों से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है। म्यूल अकाउंट मामले में पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी की रकम किन राज्यों और खातों तक पहुंची। वहीं, ठाणे में पकड़े गए ऑनलाइन सट्टा-बेटिंग नेटवर्क के मामले में जब्त डिजिटल सामग्री और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
दोनों मामलों में जांच के आगे बढ़ने के साथ अन्य संदिग्धों की भूमिका और संभावित वित्तीय कड़ियों की जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल, दोनों प्रकरणों को अलग-अलग जांच के आधार पर देखा जा रहा है और उनके बीच सीधा संबंध स्थापित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
दुर्ग पुलिस की लोगों से अपील, साइबर ठगी होने पर 1930 पर करें शिकायत
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, एटीएम कार्ड, पासबुक और अन्य बैंकिंग साधनों का दुरुपयोग होने पर खाताधारक को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है, तो उसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
पुलिस की जांच का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की कड़ियों का पता लगाना, कथित रूप से संलिप्त लोगों की पहचान करना और साइबर अपराध से जुड़ी रकम के प्रवाह को समझना है। आने वाले समय में डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच से इन मामलों में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।












