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रोज सुबह खाते हैं अंकुरित अनाज? कहीं सेहत बनाने की जगह नुकसान तो नहीं कर रहे, जानिए पूरी बात

आजकल अच्छी सेहत और वजन नियंत्रित रखने के लिए अंकुरित अनाज यानी स्प्राउट्स खाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। सुबह के नाश्ते में मूंग, चना, मसूर और मेथी के अंकुरित दाने खाना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इसकी वजह है इनमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज तत्व।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस स्प्राउट्स को आप सेहत का खजाना समझकर रोज खा रहे हैं, वही गलत तरीके से तैयार होने पर पेट के संक्रमण की वजह भी बन सकता है? खासकर गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए कच्चे स्प्राउट्स जोखिम भरे हो सकते हैं।

स्प्राउट्स खाना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इन्हें कितनी मात्रा में, किस तरीके से और किन परिस्थितियों में खाना चाहिए, यह जानना जरूरी है। आइए समझते हैं अंकुरित अनाज के फायदे, संभावित नुकसान और इनके सेवन का सही तरीका।

1. क्या रोजाना स्प्राउट्स खाना सुरक्षित है?

स्वस्थ व्यक्ति संतुलित मात्रा में स्प्राउट्स अपनी रोजाना की डाइट में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, कच्चे स्प्राउट्स को रोज खाना हर व्यक्ति के लिए जरूरी या सुरक्षित नहीं है।

अंकुरण के दौरान अनाज और दालों में नमी और गर्म वातावरण के कारण पोषक तत्वों में बदलाव होता है। इसी वातावरण में साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे हानिकारक बैक्टीरिया भी पनप सकते हैं।

इसलिए स्प्राउट्स को अच्छी तरह पकाकर खाना अधिक सुरक्षित विकल्प है। इन्हें हल्का उबालकर, भाप में पकाकर या सब्जी के रूप में तैयार किया जा सकता है।

2. स्प्राउट्स खाने से शरीर को क्या फायदे मिलते हैं?

अंकुरित अनाज पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। अलग-अलग अनाज और दालों से शरीर को अलग-अलग तरह के पोषण मिलते हैं।

मूंग के अंकुरित दाने

मूंग के अंकुरित दानों में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व मिलते हैं। ये संतुलित आहार का हिस्सा बनकर पाचन और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं।

चना और मसूर के अंकुरित दाने

इनमें वनस्पति आधारित प्रोटीन, आयरन और फाइबर पाया जाता है। ये पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने और संतुलित पोषण देने में मदद कर सकते हैं।

मेथी के अंकुरित दाने

मेथी के अंकुरित दानों में फाइबर और कई अन्य पोषक तत्व होते हैं। हालांकि, इन्हें मधुमेह का इलाज या इंसुलिन की दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

गेहूं और अन्य साबुत अनाज के अंकुर

अंकुरण से अनाज की पोषण संरचना में बदलाव आता है। कुछ पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ सकती है और कुछ लोगों के लिए पाचन आसान हो सकता है। लेकिन गेहूं अंकुरित करने से उसका ग्लूटेन खत्म नहीं होता।

3. क्या स्प्राउट्स खाने से तेजी से घटता है मोटापा?

स्प्राउट्स को वजन नियंत्रित रखने वाले आहार में शामिल किया जा सकता है, लेकिन केवल इन्हें खाने से तेजी से वजन कम होने की गारंटी नहीं है।

इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:

  • फाइबर: पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है।

  • प्रोटीन: मांसपेशियों को बनाए रखने और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए जरूरी है।

  • कम ऊर्जा वाला भोजन: बिना अधिक तेल और मसाले के तैयार किए गए स्प्राउट्स कम कैलोरी वाला नाश्ता बन सकते हैं।

वजन घटाने के लिए संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद भी जरूरी है।

4. किन लोगों को कच्चे स्प्राउट्स खाने से बचना चाहिए?

कुछ लोगों के लिए कच्चे अंकुरित अनाज खाना सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक जोखिम भरा हो सकता है।

गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव और संक्रमण के गंभीर परिणामों की आशंका को देखते हुए कच्चे या अधपके स्प्राउट्स से बचना चाहिए।

छोटे बच्चे: पांच साल से कम उम्र के बच्चों को कच्चे स्प्राउट्स नहीं देने चाहिए। इनके कारण खाद्य संक्रमण का खतरा हो सकता है।

बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए इन्हें अच्छी तरह पकाकर ही खाना बेहतर है।

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग: कैंसर का उपचार करा रहे लोगों, अंग प्रत्यारोपण करा चुके मरीजों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को कच्चे स्प्राउट्स से परहेज करना चाहिए।

अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन और कनाडा के स्वास्थ्य विभाग ने भी इन जोखिम समूहों को कच्चे स्प्राउट्स के बजाय अच्छी तरह पकाए हुए अंकुरित अनाज खाने की सलाह दी है।

5. क्या स्प्राउट्स से पेट में संक्रमण हो सकता है?

हां, यह स्प्राउट्स से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में से एक है।

अंकुरण के लिए बीजों को पानी और नमी वाले वातावरण में रखा जाता है। यदि बीजों के ऊपर पहले से साल्मोनेला या ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया मौजूद हों, तो अंकुरण के दौरान उनकी संख्या तेजी से बढ़ सकती है।

ऐसे संक्रमित स्प्राउट्स खाने से ये समस्याएं हो सकती हैं:

  • पेट में दर्द और ऐंठन।

  • दस्त और उल्टी।

  • बुखार।

  • शरीर में पानी की कमी।

  • गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की नौबत।

सिर्फ पानी से धोने पर सभी हानिकारक बैक्टीरिया खत्म नहीं होते। अच्छी तरह पकाना संक्रमण का खतरा कम करने का अधिक भरोसेमंद तरीका है।

6. क्या स्प्राउट्स से थायरॉइड और विटामिन के पर असर पड़ता है?

यह सवाल भी काफी महत्वपूर्ण है, खासकर उन लोगों के लिए जो नियमित रूप से दवाइयां लेते हैं।

थायरॉइड की समस्या: ब्रोकली, सरसों, मूली और अन्य क्रूसिफेरस पौधों में गोइट्रोजेन नामक प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। बहुत अधिक मात्रा में कच्चे रूप में सेवन और आयोडीन की कमी होने पर ये थायरॉइड के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, सामान्य मात्रा में इन सब्जियों और इनके अंकुरों को खाने से हर थायरॉइड मरीज को नुकसान होता है, ऐसा कहना सही नहीं है।

विटामिन के और खून पतला करने वाली दवाएं: अल्फाल्फा जैसे कुछ स्प्राउट्स में विटामिन के पाया जाता है। यह खून के थक्के जमने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वारफेरिन दवा लेने वाले लोगों को विटामिन के के सेवन में अचानक बदलाव नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

ऑटोइम्यून बीमारी: अल्फाल्फा में एल-कैनावेनाइन नामक पदार्थ पाया जाता है। इसके सेवन और ल्यूपस जैसी बीमारी के लक्षण बढ़ने के बीच संबंध की रिपोर्ट मौजूद है। इसलिए ऐसी बीमारी से पीड़ित लोगों को अल्फाल्फा के अंकुर या इसके पूरक उत्पाद लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

7. स्प्राउट्स खाने का सही तरीका क्या है?

स्प्राउट्स के पोषक तत्वों का लाभ लेने के साथ संक्रमण से बचना भी जरूरी है। इसके लिए कुछ सावधानियां अपनाएं।

  1. अच्छे बीज चुनें: अंकुरण के लिए खाने योग्य और साफ बीजों का इस्तेमाल करें।

  2. साफ पानी का इस्तेमाल करें: बीजों को पीने योग्य साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।

  3. बर्तनों की सफाई रखें: अंकुरण के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तन और कपड़े साफ रखें।

  4. फ्रिज में रखें: तैयार स्प्राउट्स को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न छोड़ें।

  5. अच्छी तरह पकाएं: इन्हें भाप में पकाएं या अच्छी तरह उबालकर खाएं।

  6. खराब स्प्राउट्स फेंक दें: यदि उनमें बदबू, चिपचिपापन या रंग में असामान्य बदलाव दिखाई दे तो सेवन न करें।

विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्प्राउट्स को अच्छी तरह पकाकर खाना बेहतर है।

 

8. क्या स्प्राउट्स के साथ दूध पीना नुकसानदायक है?

आयुर्वेद में कुछ खाद्य पदार्थों के मेल को विरुद्ध आहार माना गया है। हालांकि, स्प्राउट्स खाने के बाद दूध पीने से भोजन विषैला हो जाता है या मेटाबॉलिज्म खराब हो जाता है, इस दावे को साबित करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

इसलिए हर व्यक्ति के लिए स्प्राउट्स और दूध के सेवन को हानिकारक बताना सही नहीं होगा। यदि किसी व्यक्ति को दूध से गैस, पेट फूलने या पाचन की समस्या होती है, तो उसे अपनी सहनशीलता के अनुसार भोजन चुनना चाहिए।

9. क्या आयुर्वेद में भी रोजाना स्प्राउट्स खाने की मनाही है?

अंकुरित अनाज को आज भले ही आधुनिक खानपान में सुपरफूड के रूप में प्रचारित किया जाता हो, लेकिन अनाज और दालों को अंकुरित करके खाने की परंपरा काफी पुरानी है।

आयुर्वेद में भोजन की प्रकृति, पाचन क्षमता और व्यक्ति की शारीरिक स्थिति को महत्व दिया गया है। कुछ खाद्य पदार्थों को पचने में भारी माना गया है। हालांकि, चरक संहिता में सभी प्रकार के स्प्राउट्स को स्पष्ट रूप से रोज खाने की मनाही होने का दावा करने से पहले संबंधित मूल श्लोक और उसका संदर्भ देखना जरूरी है।

इसलिए आयुर्वेद के नाम पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं कि हर स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना स्प्राउट्स खाने से नुकसान होगा।

निष्कर्ष: स्प्राउट्स खाएं, लेकिन सही तरीके से

अंकुरित अनाज प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। इन्हें संतुलित आहार में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इन्हें वजन घटाने की दवा या किसी बीमारी का इलाज नहीं समझना चाहिए।

सबसे जरूरी बात यह है कि कच्चे स्प्राउट्स में बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है। इसलिए साफ-सफाई के साथ तैयार करें और बेहतर सुरक्षा के लिए अच्छी तरह पकाकर खाएं। गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग विशेष सावधानी बरतें।

 

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